बीकानेर लगभग सवा सौ वर्षों से निकल रही चांदमल ढढ्ढा की गणगौर के पीछे भी पुत्र की मनोकामना की चाह प्रमुख रही है। कहा जाता है की देशनोक से बीकानेर आकर बसे सेठ उदयमल ढढ्ढा के कोई पुत्र नहीं था। राजपरिवार में अच्छी प्रतिष्ठा के कारण उनको शाही गणगौर देखनें का निमंत्रण मिला। तब उदयमल की पत्नी ने प्रण लिया की पुत्र होने के बाद ही गणगौर दर्शन करूंगी। एक वर्ष गणगौर की विशवास एवं आस्था के साथ साधना करने से उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम चांदमल…
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बाली गवरजा की विदाई जस्सूसर गेट पर भरा मेला देखे वीडियो
सबसे बड़ी हिन्दू नववर्ष धर्मयात्रा बीकानेर, देखिये पूरी धर्मयात्रा का वीडियो
सड़क किनारे कोई असहाय लाचार दिखे तो इनसे संपर्क करें, ये संस्था करेगी इनकी मदद
‘मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था’ जिसकी शुरुआत राजस्थान के भरतपुर जिले से हुई आज इसकी पुरे देश में कई शाखाएं है। हम बीकानेर जिले रानी बाजार स्थित अपना घर आश्रम पहुंचे। संस्था द्वारा असहाय मरीजों, लाचार की सेवा करने का भाव इतना शुद्ध है की आश्रम में इनको प्रभुजी कहकर सम्बोधित किया जाता है और इनके नहलाने को भी प्रभु जी का अभिषेक कहा जाता है। आपको कही भी सड़क किनारे लाचार, पीड़ित, असहाय, मानसिक रोगी, जिसके आगे पीछे कोई भी ना हो तो आप इनसे…
Read Moreजाने नवरात्रि का मुहूर्त, नौ देवियों का महत्व व पूजा विधि
नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं – चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है। यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से प्रारंभ है और समापन…
Read Moreघुड़ला और दातनिया देना क्या है, कटे हुए सर का प्रतीक क्यों है
गणगौर में बाली गवर का पूजन करने वाली लड़किया दोपहर को दातनिया देती है और शाम को घुड़ला लेकर मोहल्ले में घर घर जाती है और गीत गाती है- ‘ म्हारो तेल बले घी घायल की घुड़लो घूमे ला जी घूमे ला’ कटे हुए सर का प्रतीक माने जाने वाला घुड़ला इसके क्या कारण जानिये इस वीडियो में
Read Moreघुड़ले का पूरा गीत
घुडळा गीत: (प्राचीन परम्परागत गीत:रमक झमक) म्हारों तैल बले घी घाल, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । घुड़ले रे बाँध्यो सूत, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । (रमक झमक) सुहागण बाहर आय, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । इशरदसजी रै जायो पूत, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । म्हारों तैल बले घी घाल, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । सोने रो थाळ बजाय, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । मोत्यों रा आखा घाल, घुड़लो घूमे ला जी घूमें ला । सोने रो ट्कको घाल,…
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