देव उठनी एकादशी, जानिए कब होगा तुलसी विवाह और व्रत

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देवउठनी एकादशी तिथि सभी एकादशी तिथियों में महत्वपूर्ण है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकदशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहते हैं। देव उठनी एकादशी को देवउठनी एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और उत्थान एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह बाद योगनिंद्रा से जागते हैं और पृथ्वी के समस्त कार्यों को एक बार फिर अपने हाथों में ले लेते हैं। चार महीनो के बाद देव उठनी एकादशी से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। देवउठनी एकादशी के दिन होता है तुलसी –…

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क्या है धनतेरस का अर्थ क्यों मनाते है क्या है इसका महत्व

dhanteras festival kyo manaya jata hai
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धनतेरस का अर्थ क्या है ? इस त्यौहार को क्यों मनाते है ? क्या धनतेरस को धन से जोड़कर देखना सही है ? और इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है धनतेरस का क्या महत्त्व है ? धनतेरस के दिन क्या खरीददारी करना शुभ माना जाता है ? अगर ये जानने की जिज्ञासा आप रखते है तो हम आपको ये सभी जानकारी देने जा रहे है। क्या है धनतेरस का अर्थ और क्यों मनाया जाता है पांच दिन के दीपावली पर्व को एकीकृत रूप में देखा जाता है इसके हर…

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नये संसद भवन में अशोक स्तंभ को रूप देने वाले मूर्तिकार लक्ष्मण व्यास, साहित्यकार छंगाणी, डॉ सोनी व डाँ अबरार का रमक अभिनन्दन

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संसद भवन में राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ को आकार देने वाले देश के प्रख्यात मूर्तिकार लक्ष्मण व्यास, साहित्यकार छंगाणी, डॉ सोनी व डॉ अबरार का अभिनन्दन   बीकानेर। सांस्कृतिक गतिविधियों में निरन्तर गतिशील संस्थान रमक झमक के खुले प्रांगण में सांस्कृतिक विरासत व पौराणिक कला पर चर्चा तथा सम्मान समारोह का आयोजन किया। समारोह में संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ को आकार देने वाले देश के प्रख्यात मूर्तिकार लक्ष्मण व्यास का भव्य अभिनन्दन किया गया। रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’, राधेकृष्ण ओझा,…

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‘करवो ले करवो ले व्रत भोंगनी करवो ले ‘ जानिये करवा चौथ की कथा और चंद्रोदय का समय

karwa chauth 2022
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सुहागिन महिलाओं में जिस व्रत का उत्साह कई दिन पहले शुरू हो जाता है वह करवा चौथ का व्रत आ रहा है। किसी भी व्रत का आधार आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक होता है। जब आप व्रत रखते हैं, तब आपका पूरा शरीर शुद्ध हो जाता है। जब शरीर में से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, तब मन तीक्ष्ण होता है। ऐसी अवस्था में आप जो भी इच्छा करते हैं या जिस भी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, वह पूरा होता है। यह श्रद्धा है, नियम भी है और इसका…

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मेले मगरिये, कौनसा मेला कब कहां और क्या खास, देखे कैलेंडर

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पूरे साल में जिस त्योहार और मेलो का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है वो अब शुरू हो चुके है। इसके बारे में कहावत भी प्रचलित है – ‘तीज त्योहारा बावड़ी, ले डूबी गणगौर’ इसका अर्थ है तीज से त्योहारों की शुरुआत हो जाती है और गणगौर आते ही समापन हो जाता है। अब तीज से त्योहारों और पर्व की शुरुआत हो चुकी है और इसके लिए रमक झमक आपको ‘ मेला मगरिया व त्योहार ‘ का कैलेंडर तिथि उपलब्ध करवा रहा है। चौमासे में चार महीनें तक कोई भी पर्व…

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पशु पक्षियों की अठखेलियों से पता चल जाता है बारिश कब होगी

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सेटेलाइट से हमारे मौसम विभाग द्वारा वर्तमान समय में बारिश पर भविष्यवाणी की जाती है। लेकिन जब आज का आधुनिक सिस्टम नही था विज्ञान नही था तब भी हमारे बुजुर्ग भी अनूठे तरीकों से अनुमान लगा लेते थे और आज भी गांवों में बड़े बुजुर्ग कई तरीकों से बारिश का अनुमान बता देते है। पारंपरिक तरीके से बुजुर्ग कीट, पतंग, पशु व पक्षियों के व्यवहार से ही बरसात का अनुमान लगा लेते थे और आज भी बुजुर्गो से ये तरीके सुनने को मिल जाते है। प्रकृति को लगातार महसूस करने…

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‘ दाड़ी ऊपर टैक्स ‘

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जमानौ बदळग्यौ, रंग-ढंग बदळग्या , भेस बदळग्यौ भासा बदळगी, मन बदळग्या , मानतावां बदळगी, सैंसकार बदळग्या धरम रौ सरूप बदळग्यौ अर बदळग्या मोल तोल करण री निजर रा आधार । पण आ सगळी उथळ-पुथळ घणखरी सैरां मैं ई हुई । गांव इणां सूं घणी बातां मैं अछूता रैयग्या । म्हारां गांवां मैं हाल ई जूनी बातां अर इसा भोळाभाळा मिनख मिळे है जिकां नै बदळियोडै जमानै री हवा ई का छीपी नी। म्हांरौ लक्खू जाट इणी तरै रौ जीव हौ। किणी काम सूं माड़ाणी सैर रौ मूंडौ देखणौ पड़ियौ ।…

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