पुष्करणा सावा में हर घर कुरीतियों को दूर करने का सन्देश लेके पहुंची रमक झमक टीम

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पुष्करणा सावा में हर घर कुरीतियों को दूर करने का सन्देश लेके पहुंची रमक झमक टीम बीकानेर ।पुष्करणा सावा में शादियां अधिक से अधिक हो ,बींद विष्णु गणवेश में अधिक से अधिक हो ये निवेदन के साथ रमक-झमक डॉट कॉम के 21 युवाओं की अलग अलग टीमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निकली । रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भेरु’ ने बताया कि नथानी सराय, बारह गुवाड चौक सुरदासनी गली , रघुनाथ सर कुवा,साले की होली, मोहता चौक,भटडो का चौक व् सिंगियो के चौक में घरो में व् पाटों…

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सावे की परम्परा को बचाने में पहल करेगी महिलायें रमक झमक ने करवाया महिला सम्मेलन

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सावे की परम्परा को बचाने में पहल करेगी महिलायें रमक झमक ने करवाया महिला सम्मेलन बीकानेर। सावे की परम्परा बचाने के लिये सोमवार को पुष्करणा समाज की महिलायें एक मंच पर जुटी। कैसे अपनी पंरपरा को बचाने के लिए कम खर्च में और कुरीतियों को मिटाने में महिलायें सहयोग कर सकती है। इन्ही मुद्वो पर रमक झमक डॉट कॉम के बैनर तले महिला सम्मेलन में चर्चा हुई। सम्मेलन में पहॅुची महिलाओ ने संकल्प लिया कि वे अपने परिवार और मिलने वालों में सावे की परंपरा को बचाने में पहल करेगी।…

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‘सावा संस्कृति का सम्मान’ कार्यक्रम मे हुआ रोबीलों का सम्मान

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‘सावा संस्कृति का सम्मान’ कार्यक्रम मे हुआ रोबीलों का सम्मान बीकानेर, 8 जनवरी। रमक-झमक संस्था द्वारा रविवार को बारहगुवाड़ में ‘सावा संस्कृति का सम्मान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर की लोक एवं पुष्करणा सावा संस्कृति को बढ़ावा देने वाले रोबीलों एवं शंखवादक का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बार एसोशिएसन के अध्यक्ष कमल नारायण पुरोहित ने कहा कि रोबीलों ने बीकानेर की संस्कृति को देश और दुनिया में विशिष्ठ पहचान दिलाई है। ऊँट उत्सव के अलावा पुष्करणा समाज की सावा संस्कृति एवं पारम्परिक कार्यक्रमों में इनकी प्रभावी भूमिका…

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पुष्करणा सावा संस्कृति का संवाहक है ‘रमक-झमक’ :डाॅ.जोशी(विधायक)

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पुष्करणा सावा संस्कृति का संवाहक है ‘रमक-झमक’ :डाॅ.जोशी(विधायक) पुष्करणा सावा वेबसाइट ‘रमक-झमक डाॅट काॅम’ की हुई रीलांचिंग बीकानेर। बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक डाॅ. गोपाल जोशी ने कहा कि ‘रमक-झमक’ संस्था पुष्करणा के रीति-रिवाज, परम्परा और संस्कृति की संवाहक है। संस्था द्वारा सूचना प्रौद्योगिक के माध्यम से यहां की संस्कृति को देश और दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है, यह सराहनीय कार्य है। डाॅ. जोशी ने रमक-झमक संस्था की सामाजिक व सावा संस्कृति के लिए बनी वेबसाइट ‘रमक झमक डाॅट काॅम’ की री-लांचिंग पर यह उद्गार व्यक्त…

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पुष्करणा सावा रीति रीवाज के पीछे गहरी सोच और तर्क

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विवाह के रीति रीवाज के पीछे गहरी सोच और तर्क सगाई- पुष्करण समाज के विवाह संस्कार में जो परंपराएं, रीति रीवाज बने है उसके पीछे एक गहरी सोच है, एक तर्क है, मनोविज्ञान है, आध्यात्मिकता है व सामुहिकता की सोच है। जब सगाई होती है तो लडकी वाले वर पक्ष के बडे बुजुर्ग को बोलते है `म्हारी बाई थोरे गोबर थापणने दी` विनम्रता का भाव देखने को मिलता है वहीं लडके के परिवार वाले ये कहते है आपने हमारे वंश को बढाने के लिए कन्या दी है इसलिए हम ऋणि…

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जानिए हरिशंकर आचार्य ने सावा संस्कृति के बारे मे क्या कहा

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सावा संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी रमक झमक के माध्यम से पहुँच रही है-हरिशंकर आचार्य (सुचना एवं जनसंपर्क अधिकारी)

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रमक-झमक के ‘सावा-2017’ फोल्डर का विमोचन, कुरीतियों को कम करने के लिए विवाह वाले घरों मे दिया जाएगा फ़ोल्डर

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वरिष्ठ साहित्यकार शिवराज छंगाणी ने कहा कि पुष्करणा समाज का ‘ओलम्पिक सावा’ पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। यह संस्कृति और परम्पराओं को जीवंत रखने में सहायक है। आज भी देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग बीकानेर की इस पुरातन परम्परा को देखने आते हैं। रमक-झमक द्वारा सावे की परम्परा संरक्षण के लिए किया जा रहा कार्य अनुकरणीय है। छंगाणी बुधवार को रमक-झमक संस्था द्वारा बारहगुवाड़ स्थित कार्यालय में रमक-झमक पुष्करणा सावा-2017 के फोल्डर के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देखादेखी की हौड़ में…

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