बीकानेर शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिये उन दिनों पौषवाळ हुआ करती थी। जिसमें महाजनी पद्धति चलती थी। बाणिका पढ़ाया जाता और साथ साथ हिंदी भी पढ़ाते। (गंगाशाही पट्टो बहियो में लिखावट बाणिका में ही है) । मुख्य रूप से पहाड़ों पर ज्यादा जोर दिया जाता। छुट्टी से पहले पहाड़ों की मालनी बोलाई जाती थी। पहाड़ो में 1 से 40 तक पेली कक्षा तक सीख जाते, फिर सवाया, डोढ़ा, पूणा, ढुंचा और उण्ठा के पहाड़े होते। पौषवाळ में मारजा से पढ़े कुछ शिष्य आज भी है जो मौखिक हिसाब…
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जानिए कैसे हुई बीकानेर की स्थापना
पिछली 5 सदियों से भी अधिक समय से अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़ा बीकानेर शहर हर वर्ष आखाबीज के दिन अपने जन्मदिन यानी स्थापना दिवस को मनाता है। इस शहर की स्थापना राव बीकाजी ने अक्षय तृतिया से एक दिन पहले करणी माता के आशीर्वाद से की थी। राव बीकाजी जोधपुर के राजा राव जोधा के सबसे बड़े पुत्र थे और राजवंश की परंपरा के तौर पर वे अगले जोधपुर के राजा होते लेकिन ऐसा न होकर उन्होंने नया शहर बसाने का निर्णय क्यों लिया आइए जानते है। पिता…
Read Moreबीकानेर शहर की ये 20 बातें जिसके कारण पहचाना जाता है पूरे विश्व में
बीकानेर धर्म संस्कृति और कला के तौर पर विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान तो रखता ही है साथ ही ऐसी और भी वजह है जिसके कारण बीकानेर को दुनिया में पहचाना जाता है। इनमे बहुत सी ऐसी बाते है जो आपको सायद ही पता हो, तो आइए जानते हैं 20 ऐसी वो जगह और ऐसे तथ्य जिसके कारण बीकानेर की दुनिया में एक अलग पहचान है जो आपको जरूर मालूम होना चाहिए और इसके लिए पुरे 20 तथ्य जरूर देखें – 20 – महाजन फाइल फायरिंग रेंज- …
Read Moreबारहमासा गणगौर कथा व व्रत की सम्पूर्ण विधि तथा नियम
यह व्रत चैत्र सुदी रामनवमी के दिन शुरू होता है। यह सुहागन औरतें ही करती है। अखंड सुहाग, मंगल कामना, वंश वृद्धि, सद्बुद्धि व मोक्ष के लिए व्रत किया जाता है। एक कहानी के अनुसार इस व्रत को सर्वप्रथम राजा युधिष्ठिर व द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से आज्ञा प्राप्त करके किया। जिससे मोक्ष प्राप्त हुआ। यह व्रत रामनवमी से एकादशी तक यह किया जाता है। वैधव्य से छुटकारा दिलाता है ये व्रत – बारहमासा गवर की पूजा विधवा स्त्री भी कर सकती है विधवाओं को भी इस व्रत उपवास के…
Read Moreलोकायुक्त श्री लोहरा का अभिनन्दन
लोकायुक्त श्री लोहरा का अभिनन्दन बीकानेर। न्यायमूर्ति श्री पी के लोहरा अभिनन्दन समारोह समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान के लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री प्रतापकृष्ण लोहरा के बीकानेर आगमन पर अभिनन्दन किया गया। अपने काम के प्रति सजग रहने वाले श्री प्रताप कृष्ण लोहरा पुष्करणा समाज के गौरव, काव्य और संस्कृति प्रेमी है इसलिए श्री लोहरा जी को रमक झमक की ओर से काव्यात्मक शैली में तैयार शब्दाभिनन्दन पत्र भेंट कर समान्नित किया गया। ‘रमक झमक’ के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’, समिति अध्यक्ष महेंद्र आचार्य, रमक झमक डॉट कॉम के राधेकृष्ण…
Read Moreहोली पर हुड़दंग और पौरुष शक्ति के देवता इलोजी
होली पर हुड़दंग और पौरुष शक्ति के देवता इलोजी इलोजी की होली के हुड़दंग देवता, फागण के देवता, पौरुष शक्ति के देवता के रूप में पूजा की जाती है। पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही इनकी पूजा करते हैं। पुरुष अपना पौरुष और यौन शक्ति बढ़ाने के लिए तथा महिलाएं पुत्र की चाह में इनकी पूजा करते हैं। होली के अवसर पर राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रो में इलोजी की प्रतिमाएं किसी बड़े चौक चौराहों पर बनी हुई है। कुछ जगहों पर इलोजी को नाथुरामजी नाम से भी जाना जाता है। होलिका…
Read Moreबीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली
बीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली आपने बीकानेर की होली के विभिन्न रंग देखे होंगे। यहां गीत, संगीत, हुलड़, मौज, मस्ती, गेवर और रंग गुलाल के साथ बीकानेर की होली का बहुत अनूठा व सकारात्मक शक्ति देने वाला एक आयोजन और भी है जिसको बहुत कम लोगों ने सुना है और उससे भी कम लोगों ने देखा है। हम बात कर रहे है होलिका दहन के पश्चात पास बैठकर मंत्र जाप करने वाले ब्राह्मणों की संस्कृति की। होलिका…
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