बीकानेर को राती घाटी, जांगल प्रदेश, उंटो का प्रदेश, धर्मनगरी का शहर कहा जाता है। इस वर्ष बीकानेर शहर अपना 535 वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस शहर की स्थापना राव बीकाजी द्वारा 1488 ई में करणी माता के आशीर्वाद से हुई थी। बीकाजी ने अपने पिता के राज्य के राज पाठ को छोड़ ये नया शहर बीकानेर बसाया था। आखाबीज के दिन राव बीकाजी ने बीकानेर शहर की स्थापना की थी। उस समय से शहर में चंदा उड़ाने से लेकर हर घर में खिचड़ा, इमलानी, बड़ी की सब्जी,…
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बीकानेर की ‘पौषवाळ’ और बीकानेर के ‘मारजा’
बीकानेर शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिये उन दिनों पौषवाळ हुआ करती थी। जिसमें महाजनी पद्धति चलती थी। बाणिका पढ़ाया जाता और साथ साथ हिंदी भी पढ़ाते। (गंगाशाही पट्टो बहियो में लिखावट बाणिका में ही है) । मुख्य रूप से पहाड़ों पर ज्यादा जोर दिया जाता। छुट्टी से पहले पहाड़ों की मालनी बोलाई जाती थी। पहाड़ो में 1 से 40 तक पेली कक्षा तक सीख जाते, फिर सवाया, डोढ़ा, पूणा, ढुंचा और उण्ठा के पहाड़े होते। पौषवाळ में मारजा से पढ़े कुछ शिष्य आज भी है जो मौखिक हिसाब…
Read Moreजाने राजस्थान के लोकप्रिय त्यौहार गणगौर के बारे में
गणगौर राजस्थान के सबसे लोकप्रिय त्यौहारों मे से एक है । गणगौर का त्यौहार होली के अगले दिन ही यानि चैत्र की एकम से शुरू हो जाता हैं और अमावस्या के बाद की तीज तक मनाया जाता हैं । गणगौर मे गवर और इश्वर जी को पूजा जाता हैं । इस पूजा मे गवर यानि माता गौरी का रूप और इश्वर जी यानि भगवान शिव का रूप माना गया हैं । तीज तक चलने वाले इस त्यौहार मे यह माना जाता है कि हर वर्ष 16 दिन के लिए गवर…
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