कोलकाता में मारवाड़ी समाज की भव्य गणगौर

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कोलकत्ता में लोक सस्कृति का भव्य आयोजन ‘गणगौर महोत्सव’ महोत्सव में नजर आता है रंगीलो राजस्थान की झलक लोक उत्सव,लोक परम्परा और लोक सस्कृति का जीवंत दृश्य  कोलकता के बड़ा बाजार में राजस्थानी गणगौर उत्सव की झलकियां देख कर हर किसी को लगता है कि वो अपने मूल शहर /राजस्थान में आ गया है । राजस्थान में जहाँ बालाएं / महिलाएं गवरजा पूजा करती है दातनीयां देती है,बासा देती हुई गीत गाती है ,तीज -चौथ को गवरे घुमाती हैं , घुलड़े का गीत गाती है,कुए का पानी पीलाती है और…

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सोने से सजी गवरजा मां

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बीकानेर लगभग सवा सौ वर्षों से निकल रही चांदमल ढढ्ढा की गणगौर के पीछे भी पुत्र की मनोकामना की चाह प्रमुख रही है। कहा जाता है की देशनोक से बीकानेर आकर बसे सेठ उदयमल ढढ्ढा के कोई पुत्र नहीं था। राजपरिवार में अच्छी प्रतिष्ठा के कारण उनको शाही गणगौर देखनें का निमंत्रण मिला। तब उदयमल की पत्नी ने प्रण लिया की पुत्र होने के बाद ही गणगौर दर्शन करूंगी। एक वर्ष गणगौर की विशवास एवं आस्था के साथ साधना करने से उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम चांदमल…

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बाली गवरजा की विदाई जस्सूसर गेट पर भरा मेला देखे वीडियो

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सड़क किनारे कोई असहाय लाचार दिखे तो इनसे संपर्क करें, ये संस्था करेगी इनकी मदद

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‘मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन अपना घर संस्था’ जिसकी शुरुआत राजस्थान के भरतपुर जिले से हुई आज इसकी पुरे देश में कई शाखाएं है। हम बीकानेर जिले रानी बाजार स्थित अपना घर आश्रम पहुंचे। संस्था द्वारा असहाय मरीजों, लाचार की सेवा करने का भाव इतना शुद्ध है की आश्रम में इनको प्रभुजी कहकर सम्बोधित किया जाता है और इनके नहलाने को भी प्रभु जी का अभिषेक कहा जाता है। आपको कही भी सड़क किनारे लाचार, पीड़ित, असहाय, मानसिक रोगी, जिसके आगे पीछे कोई भी ना हो तो आप इनसे…

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जाने नवरात्रि का मुहूर्त, नौ देवियों का महत्व व पूजा विधि

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नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं – चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है। यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से प्रारंभ है और समापन…

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घुड़ला और दातनिया देना क्या है, कटे हुए सर का प्रतीक क्यों है

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गणगौर में बाली गवर का पूजन करने वाली लड़किया दोपहर को दातनिया देती है और शाम को घुड़ला लेकर मोहल्ले में घर घर जाती है और गीत गाती है- ‘ म्हारो तेल बले घी घायल की घुड़लो घूमे ला जी घूमे ला’ कटे हुए सर का प्रतीक माने जाने वाला घुड़ला इसके क्या कारण जानिये इस वीडियो में

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