शीतला अष्टमी ‘बास्योड़ा’ पूजन की पौराणिक कथा व पूरी जानकारी

Shitla mata
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शीतलाष्टमी का त्योहार होली के बाद मनाया जाता है। कई जगह इसे बासौड़ा भी कहते हैं। ये हमें ऋतु परिवर्तन का संकेत भी देते है। इस त्योहार में शीतला माता की पूजा की जाती है और माता को बासी खाने का भोग लगाया जाता है। इसके लिए एक दिन पहले है घरों में भोजन बना लिया जाता है और अष्टमी के दिन माता के भोग लगाया जाता है। शीतला माता वाले दिन गर्म खाना पीना निषेध है। इस दिन माता के मटके में पानी भरा ठंडा जल चढ़ाने व ठंडा…

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सखी सखी में सूरज दिख्यो ? ज्योहीं टुठ्यो, सूरज रोटा कथा व्रत विधि

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होली दहन के बाद प्रथम रविवार को सूरज रोटे का व्रत होता है। भगवान सूर्य के लिये गेहूं के आटा से करीब 1 इंच मोटाई की रोटी हाथ से थप थपा कर बनाई जाती है जिसके सेंटर में एक छेद रख दिया जाकर पकाई/सेकी जाती है। महिलाएं ये रोटा लेकर घर की छत या आंगन में जहां सूर्य अच्छे से दिखाई पड़ता है वहाँ से समूह के रूप में एकत्रित होकर अपना अपना रोटा लेकर उसमें से भगवान सूर्य के दर्शन करती है और अर्घ्य देती है। जब रोटे के…

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गोबर की माला (भरभोलिए) से करें माला घाेलाई की रस्म

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होली वाले दिन भाई के माला घोलाई की परम्परा है। आजकल होली के दिन माला घोलाई रस्म भाई को पुष्प माला पहनाकर की जा रही है, जो गलत है। इन्ही पुष्प माला को होली में डाला जा रहा है जो पूर्णतया निषेद्ध है । तो आइये जानते क्या करना चाहिये जिससे भाई की रक्षा दैहिक रक्षा हो और पर्यावरण शुद्ध हो तथा स्वयं बहन के लिये भी मंगल हो । क्या होते है भरभोलिये:- (रमक झमक) देशी गाय के गोबर को हाथ से जमीन पर रखकर थेपडीनुमा गोल लगभग 3…

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शिव पुराण के अनुसार जानिए महाशिवरात्रि कथा और महत्व

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महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इस दिन क्या हुआ था इसके बारे अलग अलग मत माने जाते है । कई जगह भगवान शिव के विवाह और कई जगह शिव भगवान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। चेन नाथ जी धुणा शिव मंदिर के योगी विलासनाथ जी ( शिव सत्यनाथ जी महाराज के शिष्य ) ने बताया कि भगवान शिव के मुख्य पुराण ‘ शिव पुराण ‘ में कहीं भी इस दिन भगवान शिव के विवाह का उल्लेख नहीं है, शिव जी के विवाह का पुराण में अलग…

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बीकानेर के देवी कुंड सागर का चमत्कारी सती माता मंदिर जहां खंभों से आज भी बहता है दूध

Bikaner dev kund sagar
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बीकानेर का देवी कुंड सागर जो यहां से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर गडसीसर गांव के पास स्थित है बीकानेर राजवंश का श्मशान घाट कहा जाता है। बीकानेर के पूर्व राजाओं महाराजाओं रानियों का अंतिम संस्कार इसी जगह पर किया गया वह जिस जगह पर उनका दाह संस्कार किया गया उसी जगह पर एक छतरी बना दी गई। यहां महाराजा गंगा सिंह जी की पत्नी वल्लभ कुंवर देवी की भी छतरी है जिसे ‘दूध झरने वाली छतरी’ भी कहा जाता है। यहां आज भी दूध झरने की घटना होती…

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षट्तिला एकादशी व्रत कथा

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भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा को समर्पित षटतिला एकादशी 20 जनवरी 2020 दिन सोमवार को है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने और भगवान की पूजा करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति तो होती है, व्यक्ति को नर्क से मुक्ति के साथ मोक्ष भी मिलता है। उस व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात वैकुण्ठ की प्राप्ति भी होती है। षटतिला एकादशी के पूजा, स्नान आदि के समय काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। षटतिला एकादशी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्तियों को षटतिला एकादशी कथा जरूर सुननी चाहिए।…

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भारत एकमात्र गणेश मंदिर जो राजस्थान के बीकानेर में है

Kan wale ganesh ji
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भारतवर्ष में कई ऐसे प्राचीनतम मंदिर अनोखे मंदिर है जो अपनी एक अलग विशेषताओं के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखते है ऐसे ही एक मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में है जहां भक्त गणेश भगवान के निज मंदिर में प्रवेश कर उनके कानों में अपनी मनोकामना बोलते है और उनकी इच्छा पूरी भी होती है इस गणेश जी मंदिर का नाम है कान गणेश जी मंदिर कई लोग इसे कान वाले गणेश जी भी कहते है। यह मंदिर राजस्थान बीकानेर जिले के अन्त्योदय नगर में स्थित है। आप नीचे…

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