बीकानेर स्थापना दिवस पर विशेष रूप से आप सबके लिए ऐसी जानकारी लेकर आये है जो शायद आपको मालूम नहीं है बीकानेर में दुनिया की ऐसी जगह और शहर से जुड़े ऐसे तथ्य जो सिर्फ बीकानेर से जुड़े है ऐसे चीज़े जो सिर्फ बीकानेर में है और दुनिया में कहीं नहीं तो जरूर देखिये ये वीडियो जो आपको जरूर पसंद आएगा …
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भुजिया के अविष्कार की पूरी कहानी जानिए
बीकानेर का भुजिया विश्व प्रसिद्ध है और इसको सबसे पहले बीकानेर में ही बनाया गया था आज बीकानेर के हल्दीराम बीकाजी और अन्य कई ऐसे ब्रांड है जो भुजिया नमकीन मिठाई विदेशो में भी एक्सपोर्ट करते है। तो आज आप जानिए कैसे सबसे पहले हुई थी शुरुआत..
Read Moreगणगौर माता की आरती
गवरजा माता की आरती ( तर्ज – सांवरसा गिरधारी ) आंगणियों हरखाओ , बधावो रामा , आंगणियों हरखायो , माँ गवरजा पधारी , माता गिरिजा पधारी . देखो शैलजा पधारी , हरख मनावो ढम – ढम ढोल नगाड़ा बाजे , आभो गरजे बिजळी नाचे , ओ कुण शंख बजावे , बधावो रामा , ओकण शंख बजावे । माँ गवरजा । । 1 । । रुण – झुण , रुण – झुण पायल बाजे , सात सुरों में मनड़ो गावे , सुण – सुण मन हरसायो , बधावो रामा , सुण…
Read Moreधींगा गवर और पंथवाडी माता की कथा व कहानियां
धींगा गवरजा की कहानी ( मोम की गुडीया ) कैलाश पर्वत पर शिव – पार्वती बैठा था चैत्र माह शुरु होते ही ” गवरजा ” रा ” बालीकाओं कन्याओं ” द्वारा पूजण शुरु हो गया । पार्वती शिवजी सू बोली कि मैं भी म्हारे पिहर जावणो चाहू , आप हुकम करो तो । महादेव जी बोल्या , म्हारी भांग घोटण री व्यवस्था कूण करसी जने पार्वती व्यवस्था रे रूप में एक मोम री गुडिया बनाई और आपरी शक्ति सू उसमें जीव डाल दिया , बा चेतन हो गई पार्वती बे…
Read Moreविषम स्थितियों में कैसे करे माता की पूजा
कैसे करें की माता प्रसन्न भी हो पूरा विश्व कोराना की महामारी से त्रस्त है और भारत भी इस संकट के दौर से गुजर रहा है । चारों और लॉकडाउन है घरों में लोग सिमिट रहे है,बाज़ार जाना सम्भव नहीं या दुकानों माता की पूजन उपलब्ध नहीं ऐसे में सनातनी लोग नवरात्रा में देवी की पूजा कैसे करें यह सबके मन में चल रहा होगा। इसके लिये आप चिंता न करें शास्त्रों में स्पस्ट भी उल्लेख है देश,काल,समय और परिस्थिति के अनुरुप ही हमें हर कार्य करना चाहिये। आप के…
Read Moreदेखें वे गीत जो गणगौर में दोपहर के समय गाए जाते है
गणगौर में दोपहर में गाए जाने वाले गीत – नौरंगी गवर म्हारी चाँद गवरजा , भलो ए नादान गवरजा रत्नों रा खम्भा दीखे दूर सू , बम्बई हालो , लाखों पर लेखण पूरब देश में , कलकते हालो , गवरयो री मोज्यों बीकानेर में गढ़न कोटां सूं उतरी सरे , हाथ कमल केरो फूल शीश नारेळां सारियो सरे , बीणी बासक नाग रे | | बम्बई . . . बम्बइ . . . . . (1) चोतीणे रा चार चाकलिया , बड़ पीपल बड़ है भारी बड़ पीपल बड़ है…
Read Moreगणगौर में सुबह गाए जाने वाले गीत देखें
गणगौर सुबह के गीत – उठी – उठी- उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल , सूरज तपे रे लिलाड़ एक पुजारी ऐ बाई म्हारी गवरजा , गवरजा , ज्यों रे घर रे टूठे म्होरी माय अन्न दे तो धन दे , बाई थरि सासरिये , पीवरिये , अन्न धन भया रे भण्डार ! डब्बा तो भरिया ए बाई थारे गैनों सु गोंठो सु, माणक मोती तपे रे लिलाड़, उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल.. खोल कीवाडी- गवर गवरादे माता खोल किवाड़ी , ऐ बाहर उभी थोने…
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