देखें वे गीत जो गणगौर में दोपहर के समय गाए जाते है

Gangaur ke geet
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गणगौर में दोपहर में गाए जाने वाले गीत – नौरंगी गवर म्हारी चाँद गवरजा , भलो ए नादान गवरजा रत्नों रा खम्भा दीखे दूर सू , बम्बई हालो , लाखों पर लेखण पूरब देश में , कलकते हालो , गवरयो री मोज्यों बीकानेर में गढ़न कोटां सूं उतरी सरे , हाथ कमल केरो फूल शीश नारेळां सारियो सरे , बीणी बासक नाग रे | | बम्बई . . . बम्बइ . . . . . (1) चोतीणे रा चार चाकलिया , बड़ पीपल बड़ है भारी बड़ पीपल बड़ है…

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गणगौर में सुबह गाए जाने वाले गीत देखें

गणगौर के गीत
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गणगौर सुबह के गीत – उठी – उठी- उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल , सूरज तपे रे लिलाड़ एक पुजारी ऐ बाई म्हारी गवरजा , गवरजा , ज्यों रे घर रे टूठे म्होरी माय अन्न दे तो धन दे , बाई थरि सासरिये , पीवरिये , अन्न धन भया रे भण्डार ! डब्बा तो भरिया ए बाई थारे गैनों सु गोंठो सु, माणक मोती तपे रे लिलाड़, उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल.. खोल कीवाडी- गवर गवरादे माता खोल किवाड़ी , ऐ बाहर उभी थोने…

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