जन्मदिन अक्षय तृतीया पर विशेष बीकानेर शहर में लाल पत्थरों की हवेलियां और उनकी नक्काशी, ऊँठ की खाल पर उस्ता कला, काष्ठ पर मथेरण कला,शहर के दरवाजे,गेट,बारियां, गुवाड़, घाटी,चौक और चौक में रखे हुवे बड़े -बड़े पाटे इस शहर को खाश बनाते है। खाशकर शहर परकोटे की खाश जानकारी लगभग हर चौक की जो मौखिक सूत्रों से संजय श्रीमाली ने लिखी है। आप भी जानकर पढ़कर आनंदित होंगे। (रमक झमक) इतिहास व सस्कृति से समृद्ध शहर बीकानेर शहर ऐतिहासिक एवं सांस्कृति दृष्टि से बहुत समृद्ध रहा है। शहर की बनावट,…
Read MoreAuthor: ramakjhamak
अक्षय तृतीया नौकरी, शादी व सन्तान के लिये विशेष
अक्षय तृतीया पर नौकरी, शादी व सन्तान के लिये करें उपाय:- अक्षय तृतीया सर्वश्रेष्ठ, अबूझ व शुद्ध मुहूर्त है इस दिन किया कार्य अक्षय फल देने वाला देने वाला होता है। जीवन की आपाधापी और भगाम भाग के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वो कम समय मे ऐसा क्या करें जिससे उसकी कामना पूर्ण हो। साल में ऐसे बहुत कम योग बनते है जब कम समय ही कुछ उपाय करने से शीघ्र फल प्राप्त हो सकते है। जिसमें अक्षय तृतीया महत्वपूर्ण दिन है।यह दिन अक्षय फल देने…
Read Moreदेश और दुनिया से कैसे अलग है बीकानेर जानिये
बीकानेर देश और दुनिया से कैसे अलग है यहाँ ऐसा क्या होता है जो पूरी दुनिया में सिर्फ यही होता है और कहीं भी नहीं होता यहाँ ऐसा क्या है जो पूरी दुनिया या भारत में कहीं नहीं है जानिये इस वीडियो में। लाइक और शेयर करना ना भूले। यूट्यूब चैनल पर जाकर सब्सक्राइब करना ना भूले यूट्यूब चैनल पर जाकर सब्सक्राइब करना ना भूले
Read Moreमौसम और राशन पर ख्याल बनाने व रम्मत के लिये प्रसिद्ध शहर
बिस्सो का चौक बीकानेर शहर यात्रा(5) संजय श्रीमाली, उस्ताबारी, बीकानेर। बिस्सों के चौक में बिस्सा जाति के बाहुल्य के कारण इस चौक का नाम बिस्सों का चौक हुआ। बिस्सा जाति के लो बीकानेर की बसावट के समय से ही यहां आकर बसने प्रारम्भ हो गये। पोकरण के पास ‘बीला’ गांव से काम की तलाश में यहां आना प्रारम्भ हुए। बिस्सों के चौक में रहने वाले लोगों का मुख्य कार्य रसोई बनाना तथा खाता-बही का कार्य करना था। बिस्सों के चौक का क्षेत्रफल बहुत कम है। बिस्सों के चौक के पूर्व…
Read Moreपाटों पर रात को भविष्य देखने वाला शहर
बीकानेर शहर यात्रा(4) भट्ठड़ों का चौक -संजय श्रीमाली, उस्ता बारी, बीकानेर। बीकानेर शहर परकोटा ज्योतिषियों पंडितों के लिये भी जाना जाता है लेकिन रात को पाटे पर बैठकर कुण्डली देखने की बात आए तो समझ लीजिये भट्ठड़ों के चौक की बात हो रही है । भट्ठड़ों के चौक का पुराना नाम पिपलियों का चौक था। लगभग 100 वर्ष पहले चौक के बीचो-बीच बहुत बड़ा पीपल का पेड़ था जिसके कारण यह पीपलियों के चौक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस चौक में भट्ड जाति के लोगों के घर अधिक थे…
Read Moreपुरुष से भी अधिक महिला को सम्मान देने वाला शहर
मरुनायक चौक बीकानेर शहर यात्रा(3) -संजय श्रीमाली, उस्ता बारी, बीकानेर। नाटेश्वर महादेव जहाँ पार्वती महादेव से आगे। मरूनायक चौक को मंदिरों का चौक कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी हर शिव मन्दिर में शिवलिंग के पीछे पार्वती की मूर्ति होती है या कई जगह शिव मूर्ति के साथ बराबर में पार्वती की मूर्ति होती है,लेकिन बीकानेर शहर के मरुनायक चौक में ऐसा शिव मंदिर है जहां मन्दिर में शिव लिंग से पहले मां पार्वती की मूर्ती है, यानि आगे है। आज के युग में महिला सम्मान व समानता की बात…
Read Moreदानवीर व रंगबाजों का शहर- दम्माणी चौक बीकानेर
बीकानेर शहर यात्रा (2) दानवीर व मनमौजी सेठों की रंगबाजियों के किस्सों के लिए प्रसिद्ध रहा है दम्माणी चौक। छतरी वाला पाटा और चौक को फ़िल्म यादगार में दिखाया गया फ़िल्म का गाना इसी चौक में फिल्माया गया। शहर के सबसे चहल-पहल वाले चौकों में दम्माणी चौक छतरी के पाटे तथा घर की छत पर छतरी हेतु प्रसिद्ध है। शहर के पुराने चौको में से दम्माणी चौक भी है जो कि 300-400 वर्षों का इतिहास अपने में समेटे हुए है। दम्माणी चौक में ज्यादातर दम्माणी (माहेश्वरी) जाति के लोग तथा…
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