होली खेलने के बाद राम राम वाले दिन या उसके अगले दिन द्वितीया को जिसे जाम बीज या जमला बीज भी कहते है, इस दिन बहन भुआ या स्वास्नी अपने भाई भतीजे आदि को उनके ऊपर से एक उतारा करने की परम्परा है। पानी का लौटा, तला पापड़, कैर, काचरी व फली तली हुई लेकर उपर से उवारती है यानी क्लॉक वाइज घुमाती हैं फिर घर से बाहर जाकर पापड़ आदि सामग्री सड़क पर रख उसके चारों ओर एक वृत्ताकार घेरा यानि चक्रिया बनाती है । सामग्री को सड़क पर…
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बीकानेर में होली खेलने से पहले लेते है मां नागणेची से स्वीकृति
पहले माँ भगवती खेलती है होली, फिर बीकानेर शहरवासी इस शहर में होली पूरे 8 दिन खेली जाती है। शहर के लोग एकत्रित होकर फाल्गुन शुक्ला सप्तमी (खेल सप्तमी) को माँ भगवती नागणेची के दरबार पहुचते है और सबसे पहले भगवती को होली खेलाकर उन्हें रिझाते है और प्रार्थना करते है कि आज 8 दिन लगातार उन्हें होली खेलने की इजाजत दे और इस दौरान शहर में शांति सद्भाव बना रहे और आनन्द की बयार बहती रहे। भक्त अपने भाव से माता द्वारा शहर में होली खेलने की स्वीकृति लेकर…
Read Moreबीकानेर के देवी कुंड सागर का चमत्कारी सती माता मंदिर जहां खंभों से आज भी बहता है दूध
बीकानेर का देवी कुंड सागर जो यहां से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर गडसीसर गांव के पास स्थित है बीकानेर राजवंश का श्मशान घाट कहा जाता है। बीकानेर के पूर्व राजाओं महाराजाओं रानियों का अंतिम संस्कार इसी जगह पर किया गया वह जिस जगह पर उनका दाह संस्कार किया गया उसी जगह पर एक छतरी बना दी गई। यहां महाराजा गंगा सिंह जी की पत्नी वल्लभ कुंवर देवी की भी छतरी है जिसे ‘दूध झरने वाली छतरी’ भी कहा जाता है। यहां आज भी दूध झरने की घटना होती…
Read Moreबीकानेर शहर के 100 वर्ष पुराने धूणे, संस्कृति बचाये रखे है हमारे धूणे
बीकानेर की धूणा संस्कृति बीकनेर शहर के अलग अलग चौक में स्थाई रूप से धूणे बनाये गए है जो सर्दी में ना सिर्फ चर्चा करने स्थान है बल्कि यही से जीव जंतुओं की सेवा का कार्य भी होता है। अलाव तपने के साथ साथ बीकानेर शहर के लोग यहाँ गाय, गोधो, कुतो की देख रेख करते है। जानिये पूरी डिटेल में हर चौक के धूणे के बारे में वीडियो में
Read Moreधर्मनगरी बीकानेर के कोलायत में साधुओं का सबसे बड़ा मेला – विशेष
बीकानेर में कई विश्व विख्यात मंदिर है यह शहर धर्मनगरी के साथ साथ मेलों का शहर भी कहलाता है। बीकानेर के कोलायत से प्रयागराज, हरिद्वार, पुष्कर की तुलना की जाती है। यहाँ का कोलायत मेला अद्भुत है कुम्भ की तरह ही यहाँ हज़ारों साधू संत कपिल सरोवर में स्नान करने आते है कोलायत की यह झील पश्चिमी राजस्थान की सबसे पवित्र झील कहलाती है। देखिये इस वीडियो में। …. यूट्यूब चैनल पर जाकर हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूले
Read Moreसवर्ण आरक्षण EWS सर्टिफिकेट कैंप निशुल्क, जल्द बनवाए
Ews सर्टिफिकेट निःशुल्क बनाए:- सरकार द्वारा सवर्णो के आर्थिक आरक्षण हेतु नोकरियो में EWS सर्टिफिकेट की आवश्यकता होगी,जब वैकेंसी निकलेगी तब सभी बेरोजगार सवर्ण भागा दौड़ी में लग जायँगे,इसलिये जरूरी है उनको पहले से ही ews सर्टिफिकेट बनवा लेना चाहिये। आवश्यक डॉक्यूमेंट जानकारी एडवोकेट सुखदेव व्यास बताते है कि इस सर्टिफिकेट के लिये मूल निवासी,राशन कार्ड,स्वयं का फोटो,पिता फोटो,आधार पिता का व स्वयं का,जाति का प्रूफ(किसी दस्तावेज में जाति लिखी हो)जिसका पिता सरकारी कर्मचारी हो उसका 16 नम्बर फार्म व पेन कार्ड,प्राइवेट नोक़री हो तो मालिक से सालाना आय का…
Read Moreकैसे पड़ा कोडमदेसर भैरव नाम, जानिए भैरव के चमत्कार
बीकानेर में स्थित कोडमदेसर भैरव के बारे में इस वीडियो में पूरी डिटेल में जानिए कि कोडमदेसर नाम कैसे पड़ा राव बीकाजी का इस गांव से क्या संबंध है इस मंदिर की स्थापना कैसे हुई और क्यों आज भी इस मंदिर पर छत का निर्माण नहीं किया जाता तथा मंदिर की स्थापना के बाद कौन-कौन से चमत्कार हुए हैं यह सभी जानकारी आपको इस वीडियो में पूरी डिटेल में मिलेगी।
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