नाहरसिंह का कड़ा, जो सिंवरे हाजिर खड़ा।।
लक्ष्मी पूजन से पहले होती है नारसिंह पुजा।।

दीपावली से एक दिन पहले बीकानेर शहर में या बीकानेर के लोग जहां भी रहते है, वो नरक चतुर्दशी को भगवान नाहरसिंह की पूजा करते है। शाम को भोजन पकाने वाले स्थान रसोई को धो पूछ कर दीवार पर मिट्टी गोबर का लेपन का अथवा रसोई की दीवार को सिर्फ धो पूछ गंगाजल से शुद्ध कर घृत सिंदूर व कुंम कुंम से त्रिशूल की आकृति उकेर कर सपरिवार पञ्चोपचार पूजन करते है तथा प्रार्थना व आरती करते है। नाहरसिंह जी भगवान के कड़े की पूजा भी पूजा की जाती है। कड़े को पुष्प चढाकर छू कर प्रार्थना कर बोलते है “नाहरसिंह का कड़ा, जो सिंवरे हाजिर खड़ा”, ‘आयो जके सुं सवायो आए बाबा’ भगवान के भोग में गुड़ की लापसी व बड़ी की सब्जी का भोग लगाया जाता है। यह भोग प्रशाद घर से बाहर नहीं जाता ।