फगड़ा घुडळा अनोखा व अनूठा यहां पुरुष घुमाते है घुडळा राजस्थान में गणगौर पूजन के दौरान सामान्यतः महिलाए व लड़कियां घुडळा घुमाती हैं और पारंपरिक गीत गाती है ।लेकिन जोधपुर शहर में कुछ अनुठी परम्परा है । महिलाओं के प्रमुख लोकपर्व गणगौर पूजन के दौरान जोधपुर में फगड़ा घुड़ला का अनोखा मेला आयोजित किया जाता है ।इस आयोजन की खास बात ये है कि इसमें घुड़ला लेकर पुरुष निकलते हैं और वो भी महिलाओं का वेष धारण करके । जब पुरुष स्त्री का स्वांग धर सोलह सृंगार कर घुडळा लेकर…
Read MoreAuthor: ramakjhamak
देखिये जूनागढ़ के अंदर से कैसे निकलती है सजी धजी गणगौर माता
देखिये जूनागढ़ के अंदर से कैसे निकलती है सजी धजी गणगौर माता राज परिवार के साथ बैंड बाजे और सैनिक होते है और गवरजा माता गहनों से लदी होती है यहाँ दौड़ते हुए ले जाते है गणगौर को क्या है वास्तिव परम्परा पूरा जानिये इस वीडियो में
Read Moreआज की भादानियों की गवर को बचाते बचाते कटी थी 3 लोगों की गर्दन
बीकानेर में गवर को बचाने के लिए 3 लोग गर्दन कट जाने पर भी लड़ते रहे जो आज भी भादाणी जाती द्वारा पूजे जाते है और उनके यहाँ जात दी जाती है। शाही गणगौर कैसे निकलती है और बीकानेर का जोधपुर से गणगौर को लेकर क्या रिस्ता है क्यों आज भी सैनिको को देखकर गणगौर को दौड़ा कर ले जाते है। कैसे ओसवाल बछावत समाज राजा से बचा और भादानियो को अपना गुरु बनाया ? भादो जी कौन थे ? ये सभी आप इस वीडियो में देख कर जान सकते…
Read Moreमां का छठा रूप कात्यायनी की पूजा से दूर होती है विवाह संबंधी अड़चन
मां का छ्ठा रूप है कात्यायनी महिलाओं पर करती है विशेष कृपा अगर आप शादी के लिए अच्छा लड़का ढूढ़ रहे है लेकिन अबतक नहीं मिला या रिश्ते कई आते है किन्तु तय नहीं हो पाता…रिश्ता तय होते होते बीच में ही कोई नई समस्या आ जाती है या आप बहुत बड़ी हो चुकी है, मांगलिक दोष है.. शनि प्रभावित है .. या फिर किसी पडित जी ने कह दिया की आपकी कुंडली में ग्रहस्थ सुख की कमी है.. या आपकी शादी होकर टूट गई आप दुबारा शादी करना चाहते…
Read Moreकोलकाता में मारवाड़ी समाज की भव्य गणगौर
कोलकत्ता में लोक सस्कृति का भव्य आयोजन ‘गणगौर महोत्सव’ महोत्सव में नजर आता है रंगीलो राजस्थान की झलक लोक उत्सव,लोक परम्परा और लोक सस्कृति का जीवंत दृश्य कोलकता के बड़ा बाजार में राजस्थानी गणगौर उत्सव की झलकियां देख कर हर किसी को लगता है कि वो अपने मूल शहर /राजस्थान में आ गया है । राजस्थान में जहाँ बालाएं / महिलाएं गवरजा पूजा करती है दातनीयां देती है,बासा देती हुई गीत गाती है ,तीज -चौथ को गवरे घुमाती हैं , घुलड़े का गीत गाती है,कुए का पानी पीलाती है और…
Read Moreसोने से सजी गवरजा मां
बीकानेर लगभग सवा सौ वर्षों से निकल रही चांदमल ढढ्ढा की गणगौर के पीछे भी पुत्र की मनोकामना की चाह प्रमुख रही है। कहा जाता है की देशनोक से बीकानेर आकर बसे सेठ उदयमल ढढ्ढा के कोई पुत्र नहीं था। राजपरिवार में अच्छी प्रतिष्ठा के कारण उनको शाही गणगौर देखनें का निमंत्रण मिला। तब उदयमल की पत्नी ने प्रण लिया की पुत्र होने के बाद ही गणगौर दर्शन करूंगी। एक वर्ष गणगौर की विशवास एवं आस्था के साथ साधना करने से उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जिसका नाम चांदमल…
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