बीकानेर की ‘पौषवाळ’ और बीकानेर के ‘मारजा’

शेयर करे

बीकानेर शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिये उन दिनों पौषवाळ हुआ करती थी। जिसमें महाजनी पद्धति चलती थी। बाणिका पढ़ाया जाता और साथ साथ हिंदी भी पढ़ाते। (गंगाशाही पट्टो बहियो में लिखावट बाणिका में ही है) । मुख्य रूप से पहाड़ों पर ज्यादा जोर दिया जाता। छुट्टी से पहले पहाड़ों की मालनी बोलाई जाती थी। पहाड़ो में 1 से 40 तक पेली कक्षा तक सीख जाते, फिर सवाया, डोढ़ा, पूणा, ढुंचा और उण्ठा के पहाड़े होते। पौषवाळ में मारजा से पढ़े कुछ शिष्य आज भी है जो मौखिक हिसाब…

शेयर करे
Read More

बीकानेर शहर की ये 20 बातें जिसके कारण पहचाना जाता है पूरे विश्व में

शेयर करे

बीकानेर धर्म संस्कृति और कला के तौर पर विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान तो रखता ही है साथ ही ऐसी और भी वजह है जिसके कारण बीकानेर को दुनिया में पहचाना जाता है। इनमे बहुत सी ऐसी बाते है जो आपको सायद ही पता हो,  तो आइए जानते हैं 20 ऐसी वो जगह और ऐसे तथ्य जिसके कारण बीकानेर की दुनिया में एक अलग पहचान है जो आपको जरूर मालूम होना चाहिए और इसके लिए पुरे 20 तथ्य जरूर देखें – 20 – महाजन फाइल फायरिंग रेंज-  …

शेयर करे
Read More

बीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली

शेयर करे

बीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली आपने बीकानेर की होली के विभिन्न रंग देखे होंगे। यहां गीत, संगीत, हुलड़, मौज, मस्ती, गेवर और रंग गुलाल के साथ बीकानेर की होली का बहुत अनूठा व सकारात्मक शक्ति देने वाला एक आयोजन और भी है जिसको बहुत कम लोगों ने सुना है और उससे भी कम लोगों ने देखा है। हम बात कर रहे है होलिका दहन के पश्चात पास बैठकर मंत्र जाप करने वाले ब्राह्मणों की संस्कृति की। होलिका…

शेयर करे
Read More

कोलकत्ता में कवि गोपालकृष्ण तिवाड़ी’ ग्रंथ का लोकार्पण हुआ

शेयर करे

  कोलकत्ता/बीकानेर माहेश्वरी भवन सभागार कोलकत्ता में ‘लोकजीवन के कवि गोपालकृष्ण तिवाड़ी’ ग्रंथ का लोकार्पण हुआ । राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी, बीकानेर के निवासी होने के कारण, कोलकत्ता में बीकानेरी समाज में तो वे विशेष रूप से लोकप्रिय थे । लोकार्पण समारोह को प्रधानवक्ता, दाधीच परिषद् के अध्यक्ष सीए आर के व्यास ने ने कहा कि कवि तिवाड़ी एक उच्च स्तर के व्यक्तित्व के धनी रहे है।उन्होंने तिवाड़ी को दिव्यात्मा बताते हुए कहा कि ऐसे महामना धरती पर अपनी रचनाओं से लोकमंगल करते हैं। वे हमारे हृदय में निवास करते…

शेयर करे
Read More