‘नारसिंह का कड़ा, ज्यो सिंवरे ज्यूँ हाजिर खड़ा’ जानिए होली से पहले भगवान नारसिंह की पूजा के बारे में

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‘नारसिंह का कड़ा, ज्यो सिंवरे ज्यूँ हाजिर खड़ा’

होली और दीपावली से पहले भगवान नारसिंह भगवान की पूजा की जाती है। होली से एक दिन पहले फाल्गुन शुक्ला चतुर्दशी को अनेक घरों में भगवान नारसिंह की पूजा होती है। नारसिंहो महावीर: यह भगवान महावीर या हनुमानजी का ही स्वरूप है। घरों में आमतौर से रसोई घर में रसोई को साफ सफाई के बाद शुद्ध करके सिंदूर कुकुंम रोली से त्रिशूल की आकृति बनाई जाती है। त्रिशूल शक्ति या बल का प्रतीक होता है इसकी आकृति बनाकर पूजा की जाती है।

भगवान नारसिंह के कड़े की होती है पूजा

घरों में नारसिंह भगवान को बल शक्ति के रूप में मानते है इसलिये बल का प्रतीक भगवान के कड़ों की पूजा भी होती है। कुकू चावल पुष्प धूप दीप के अलावा प्रशाद में लापसी बड़ी की सब्जी भोग लगाया जाता है। इसलिये इस दिन सबके लिये गुड़ या शक्कर की लापसी बड़ी सब्जी व दाल चावल बनते है। सभी लोग इसे ही ग्रहण करते है।

इस दिन घर में नही चढ़ता है तवा

इस दिन तवा चढ़ाकर रोटी नहीं बनाई जाती है। भगवान नारसिंह जी का प्रसाद घर की चौखट से बाहर नहीं जाता । विवाह व वंश वृद्धि तथा बल शक्ति की कामना के लिये इनकी विशेष मान्यता है। पूजा के समय यह बोला जाता है ‘नाहरसिंह का कड़ा, ज्यो सिंवरे ज्यूँ हाजिर खड़ा’ भगवान को मनाने वालों के लिये ये सदैव तैयार रहते है।

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