खाने, खिलाने व स्वाद के दीवानों का अपनत्व वाला शहर है बीकानेर

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अलमस्त शहर बीकानेर के लोग खाने में जॉयका पसन्द करते है, जायका और स्वाद लेना यानि उसके टेस्ट को समझना तो कोई इस शहर से सीखे। यहां के लोग खाने के बहुत शौकीन है भुजिया पापड़,कचोड़ी,रबड़ी और मलाई रोज ताजा बनते है और रोज रात 10 बजे तक करीब करीब खत्म हो जाते है। खीचिए और भुजिया देर रात 3 बजे तक उपलब्ध हो जाते है लेकिन यहां शहर परकोटे में लोगों को जितना खाने का शौक़ है उससे कहीं अधिक उन्हें खिलाने का शौक है, पैसे लगाकर खिलाना और खिलाकर प्रसन्न होने वाला शहर है ये अपनत्व वाला शहर है,बीकानेर।

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बीकानेर के अंदरूनी इलाके में अगर आप का कोई रिश्तेदार,मित्र या पहचान का कोई व्यक्ति है तथा कभी किसी अवसर पर एक दो बार परिवार के साथ किसी तीज,त्योहार,उत्सव या किसी सामान्य ओकेजन पर भी आप गए हो तो आपने इसका ऐहसास जरूर किया होगा ।मान मनुहार तो ऐसी जो शायद पूरे देश में कहीं न मिल पाए। यहाँ अभिवाद भी अल्पाहार या भोजन से होता है। चाय के साथ सिर्फ बिस्किट दे देना,ये यहां के चलन में नहीं है। चाय के साथ नमकीन,पापड़,कचोड़ी या समोसा ये जरूर होता है और थोड़ा भी विशेष है तो रबड़ी,रसगुल्ला या अन्य कोई मिठाई भी जरूर प्रस्तुत होगी। नमकीन भुजिया मिठाई के लिये सामान्यतः कही बाज़ार जाना नहीँ पड़ता। ये सब घर मे ही मिल जाती है या फिर घर के पास किसी छोटी सी दुकान में।

शहर में गली -गली में बनी छोटी छोटी दुकानों में हर रोज ताजा भुजिया आदि बनते रहते है और वो किसी बड़े ब्रांड से स्वाद व जायकी में कम नहीं होते। कुछ ब्रांड को भी स्वाद के मामले में वे पीछे छोड़ते है। भाव भी बड़े ब्रांडों से कम होते है। यहां के लोग शहर की सेकड़ो दुकानों का भुजिया व नमकीन का जायका लेकर उनका एक सेकंड में माल व स्वाद की क्वॉलिटी बता सकते है। रसगुल्ला, बालूशाही तथा चायपट्टीकचोड़ी व पकोड़ी के अलावा मोहता चौक की परम्परागत तरीके से बनी स्वादिस्ट ‘रबड़ी’ हांडा महाराज,मनका महाराज व लाला महाराज की प्योर दूध की लछो वाली बिना मावा की रबड़ी है। परम्परागत तरीके से बनी रबड़ी। शाम का समय हो तो मिट्टी के सकोरे व कुल्हड़ में गर्मी में इसपर बर्फ कूटकर डालते है तो जायका और भी मजेदार होता है।शहर के कई चौक में ‘मलाई’ रोल बनता जो शिलाजीत व बादाम से ज्यादा शरीर को पुष्ट व ताकत देने वाली है। उत्सव,त्योहार या किसी खेल की जीत पर ‘गोठ’ में यही मंगवाया जाता है। किसी की शादी से पूर्व घर के बड़े बुजुर्ग लोग या घनिष्ठ मित्र 15 20 दिन पहले से सुहाग रात तक दूल्हे/दुल्हन को नियमित मलाई खिलाते है।

जायक़ी के इस शहर में सगे सम्बन्धी को विशेष अवसर पर भोजन करवाने के बाद उनके हाथ धोने से पहले ‘कवा’ देकर मनुहार का तो क्या कहना। घनिष्ठ मित्र सगे सम्बन्धी है तो पहले मिठाई फिर नमकीन, फिर मिठाई के कवे वो भी परिवार के सब लोग आग्रह विनय करते हुवे ‘ओ तो म्हारे हाथ रो कवो लेणों पड़सी,म्हेसू कोई नाराजगी है क्या ‘
अब इतना मान सम्मान मनुहार आग्रह हो तो कोई कैसे मना कर सकता है। अगर पेट भर गया है तो कोई बात नहीं पहले अनार दाने खालो,पापड़ खालो फिर 10 मिंट बाद कवा ले लेना ,वैसे भी हास्य विनोद के साथ सम्नांन आग्रह हो और स्वाद इतना बढ़िया हो तो ‘कवा’ एक नहीं सब लोग जो कवा देते है तो आप मना नही कर सकते। पेट भर गया तो पान चाय की व्यवस्था भी हो जाती है। बीकानेर शहर स्वाद के दीवानों का शहर है,जायक़ी की शहर है। यहां बनने वाली खाने की चीजें दूसरों से अलग होती है। बीकानेरी भुजिया-पापड़ और रसगुल्लों की देश में ही नहीं विदेशों में भी खास पहचान है।
‘अठे रा लोग खावे चित्त मन सुं अर खिलावे दूणे चित्त मन सुं’
‘अठे रा लोग मिश्री जिसा मीठा अर पापड़ जिसा नमकीन’ ‘अठे रो जमीन माय पाणी गहरो है बियाई अठे रा लोग गहरा है’ जिमावण,मनुहार और स्वाद पारखी इस शहर व शहर के लोगों की बीकानेर जन्म दिन की बधाई ।बीकानेर शहर में जन्म दिन पर कोरी मटकी छानना उसकी पूजा करना,लोटड़ी से पानी पीना, अक्षय द्वितिया को बाजरे मूंग तथा अक्षय तृतीया को गेहूं मूंग का खीचड़ा पकाकर उसमें खूब घी डालकर खाने की परम्परा है, शाम को पतंग उड़ाने के बाद इमली,चण्दलिये की सब्जी और पुड़द वाले फुलके खाये जाते है, पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करता है,बड़े व छोटे सब एक दूसरे को एक एक ‘कवा’ मुँह में देते है। बड़े बुजुर्ग अपने बहु पौत्र आदि को चांदी के सिक्के या नोट के साथ उन्हें कवा देते है।रमक झमक की ओर से मैं आपको आमंत्रित करता हु:- ‘स्वाद और जायक़ी के इस शहर में आप भी पधारें’
प्रहलाद ओझा ‘भैरु’
9460502573

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