पुष्करणा शादी ओलंपिक ‘सावा’

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पुष्करणा समाज ने लगभग सैंकडां वर्ष पहले सामूहिक विवाह का प्रारम्भ एक राजनैतिक समझौते से उत्पन्न स्थिति के कारण किया। इस समझौते के पीछे छिपी सामाजिक बौद्धिक क्षमता जो सामूहिकता के अर्थ को व्यापक रुप से समझती थी इसे अंगीकार किया साथ ही भविष्य पर सही नजर रखने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज ने आर्थिक विषमता से फैलने वाली बुराईयों पर अंकुश लगाने की सोच व अन्य समाजों को भी नई दिशा देने की पहल की। एक जानकारी के मुताबिक इस सावे की शुरुआत जैसलमेर जिले में हुई जिसे व्यापक रुप…

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पुष्करणा नाम कैसे पड़ा

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पुरात्व के आधार पुष्करणा समाज भारतवर्ष के अत्यंत प्राचीन समाजों में से एक है। एपीग्राकियां इंडिया और एक्सकवेसन पट राजघाट तथा विभिन्न शोध ग्रंथों के आधार पर इस समाज की प्राचीनता और मानव समाज को इसकी देन के प्रमाण उपलब्ध हैं पर कब से मंच गौड़ों की गुर्जर शाखा से अलग होकर देश देशान्तर में इन्होंने अपना अस्तित्व विस्तार किया यह अभी तक अनुसंन्धेय ही है। पौराणिक आख्यानों के आधार पर भृगु ऋषि के पुत्र गुर्जर के तृतीय पुत्र ऋचीक के पुत्र पुष्कर के वंशज ही पुष्करणा कहलाए। एक अन्य…

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पुष्करणा ‘सावा’ ओलम्पिक परिचय

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 सादगी,सरलता,एकता व समरूपता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध पुष्करणा समाज का सामुहिक शादियों का ओलम्पिक ‘सावा‘ एक परिचय – सावा का अर्थ सह़ विवाह, सामुहिक विवाह व सहयोग से है । बजुर्गो की माने तो सामुहिक विवाह परंपरा की शुरूआत जैसलमेर जिले से पुष्करणा समाज में 1300 वर्ष पहले हुई और बीकानेर में लगभग 150 वर्ष पहले शुरूआत हुई। एक ही दिन एक ही समय में, एक ही लगन में और एक ही गणवेष में शादी करने की इस रस्म के पीछे मूल उद्देश्य यह रहा कि कोई भी व्यक्ति…

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