*बीकानेर की होली एक -दो -साढ़ा तीन !* (रमक झमक)
खट्ट खट्ट खटा आ खट्ट ! होली !! डांडिया !! बीकानेर की होली का एक रंग हे मरुणायक चौक का एक दो ढाई और एक दो साढ़ा तीन ताल रिदम पर डांडिया । भले ही गुजरात का गरबा व् डाँडिया आपने देखा हो लेकिन बीकानेर पर होली के डाँडिया अगर नही देखा तो डाँडिया देखना अधूरा है । डाँडिया लड़ाना बड़ी बात नही लेकिन ढोल की स्वर ताल व् थाप पर डांडियों की आवाज व् रफ्तार बदलना और लड़ाने वाले का तरीका क्षण भर में बदल जाना ये बड़ी बात है । ढोल वादक जैसे जैसे ताल देता है कलाकार के भाव भंगिमा बदलती रहती है और दर्शकों में जोश व् उल्लास का संचार होता रहता है । खुले अखाड़े में डाँडिया कलाकार 1 2 1 1 2 ढाई व् 1 2 साढ़ा तीन पर गोलाई में जभी बैठ कर कभी खड़े होकर कभी चक्करी की तरह घूमकर कभी घुटनो पर कभी पैर के पंजो पर चलकर गेड़ में चलते व् डाँडिया डांस बजाते खनकाते चलते हे और सब के सब पुरुष ।आस पास व् छतों पर महिलाए पास पास भीड़ में पुरुष ,सब में उल्लास उमंग और जोश का संचार होता रहता है हर कोई खड़ा हो या बैठा उसके एक दो साढ़ा तीन की ताल सुनकर अपने शरीर को गतिमान बना देता है और हिलने डुलने थरकने लगता है । होलाष्टक से एक दिन मरुणायक मंदिर में श्री मरुणायक भगवान के सामने फिर 4 दिन मंदिर के वाहर अखाड़े में जन समुदाय के बीच वो भी देर रात्रि को ।पूरा शहर उमड़ पड़ता है ये एक दो साढ़ा तीन ताल का डाँडिया । उसमे चार चांद लगाते है खूब सूरत मॉर्डन महिलाओं के स्वाग धर पहुचने वाले पुरुष कलाकार । कुल 4 गेड़ कब शुरू हुवे कब 3 घण्टे बीत गए पता ही नही चलता ।रमक-झमक डॉट कॉम पुष्करणा सावा ओलम्पिक को आप तक पहुचाने के बाद अब बीकानेर अनूठी,निराली, कामुक,रसीली,रंगीली और मनमोहक के साथ संयमित होली इलोजी,होली रम्मत,ख्याल,चौमासा, लावणी,सवांद, प्रेम भरी टक्कर,स्त्री- पुरुष फुटबाल मैच, गेवर गेवरिये, होली फागुनी …. गीत,चंग,धमाल,भाग,भगड़ा,शहर में घूमती शार्ट लिबास में सुन्दरिया,जंजीरों में बंधे भूत, माइक व् डीजे पर होलियाना अंदाज में गीत,जूतों चपल्लो की तणी जैसे बीकानेरी होली के विभिन्न रूप और उसके पीछे तर्क पहुचाने का प्रयास कर रहा है । प्रहलाद ओझा’भैरु’ अध्यक्ष रमक-झमक9460502573 आप को ये केसा लगा । आप अपनी राय जरूर दीजियेगा ।(www.ramakjhamak.com)
*बीकानेर की होली एक -दो -साढ़ा तीन !*
Little strokes fell great oaks.