नए साल में कहा लगाए कैलंडर

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💥 विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 💥 अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) 💥 ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे,…

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ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र

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ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें | तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है | यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है : ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा

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लक्ष्मणजी का सीताजी को बन में छोड़ना

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अपने भ्राता रामचंद्रजी का आदेश मानकर लक्ष्मणजी सीताजी के महल में आये और उनसे बोले – देवि आपने श्रीराम से मुनियों के आश्रम देखने की इच्छा प्रकट की थी सो आप इस रथ पर सवार हो जायं। मैं आपको ले चलता हूँ। तब सीताजी रथ पर सवार लक्ष्मणजी के साथ गंगातट पर पहुँचीं और फिर नाव से उसपार पहुंचीं। गंगा पार करने के पश्चात लक्ष्मणजी रोने लगे और माता सीता से हाथ जोड़ कर बोले – माते नगर में आपके विषय में भयंकर अपवाद उत्पन्न हो गया है। आप मेरे…

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जाने बड़ी तीज का क्या है विधि विधान और तीज की कथा

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कजली तीज :- यह व्रत भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन जौ, गेहूँ, चने और चावल के सत्तू में घी, मीठा और मेवा डालकर उसके पदार्थ बनाते और चन्द्रोदय के बाद उसी का एक बार भोजन करते हैं। इस कारण यह व्रत ‘सातूडी तीज’ अथवा ‘सतवा तीज’ कहलाता है।कजली तीज को श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन स्त्रियाँ रात-भर कजली गाती और नाचती हैं।सावन के तीसरे दिन अर्थात श्रावण कृष्ण तृतीया विशेष फलदायी होती है क्योंकि यह तिथि माता पार्वती को समर्पित…

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‘पुष्करणा जगत’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

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पुष्करणा दिवस व त्योहारों के मोके पर ‘पुष्करणा जगत’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया । पुस्तक के संपादक संजय आचार्या वरुण ने बताया की इस पुस्तक मे पुष्करणा समाज के ना केवल बीकानेर शहर के बल्कि विश्व मे जहां भी पुष्करणा रह रहे है उनसे संबन्धित जानकारी रहेगी । वरुण ने बताया की इसमे समाज के वो लोग जिन्होने पूरे भारत मे नाम कमाया है व किसी ना किसी तरह से समाज का नाम रोशन कर रहे है उनके बारे मे भी बाते गया है । इसमे नियमित ज्योतिष आस्था से संबन्धित…

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जाने श्राद्ध में क्या करना है शुभ और क्या है अशुभ

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  श्राद्धमें पितरोंकी तृप्ति ब्राह्मणोंके द्वारा ही होती है। -स्कन्दपुराण श्राद्धकालमें आये हुए अतिथिका अवश्य सत्कार करे। उस समय अतिथि का सत्कार न करनेसे वह श्राद्ध कर्म के सम्पूर्ण फलको नष्ट कर देता है। – वराहपुराण जहाँ रजस्वला स्त्री, चाण्डाल और सुअर श्राद्धके अन्नपर दृष्टि डाल देते हैं, वह अन्न प्रेत ही ग्रहण करते हैं। -स्कन्दपुराण श्राद्धमें पहले अग्निको ही भाग अर्पित किया जाता है। अग्निमें हवन करनेके बाद जो पितरोंके निमित्त पिण्डदान किया जाता है, उसे ब्रह्मराक्षस दूषित नहीं करते। – महाभारत, अनु. ९२।११-१२ जो अज्ञानी मनुष्य अपने घर…

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पितरों को प्रसन्न कर प्राप्त करें यश, धन व कीर्ति

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पितृों को प्रसन्न कर आप यश धन व कीर्ति पा सकते हैं। इसके लिए आप श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों का करें श्राद्ध और हां अगर आप की कुण्डली में पितृ दोष है तो भी इस श्राद्ध पक्ष में आप इन दोष का निवारण कर सकते हैं। पितृ दोष के कारण अच्छे से अच्छे कुण्डली के ग्रह योग भी अपना रिजल्ट देने में असमर्थ होते है और जब पितृ प्रसन्न होते हैं तो सभी ग्रह अपना अच्छा रिजल्ट देने में समर्थ हो जाते है और वे अपनी पूर्ण कृपा हम…

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