धर्म

देव उठनी एकादशी, जानिए कब होगा तुलसी विवाह और व्रत

देवउठनी एकादशी तिथि सभी एकादशी तिथियों में महत्वपूर्ण है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकदशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहते हैं। देव उठनी एकादशी को देवउठनी एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और उत्थान एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह बाद योगनिंद्रा से जागते हैं और पृथ्वी के समस्त कार्यों को एक बार फिर अपने हाथों में ले लेते हैं। चार महीनो के बाद देव उठनी एकादशी से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत ...
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dhanteras festival kyo manaya jata hai

क्या है धनतेरस का अर्थ क्यों मनाते है क्या है इसका महत्व

धनतेरस का अर्थ क्या है ? इस त्यौहार को क्यों मनाते है ? क्या धनतेरस को धन से जोड़कर देखना सही है ? और इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है धनतेरस का क्या महत्त्व है ? धनतेरस के दिन क्या खरीददारी करना शुभ माना जाता है ? अगर ये जानने की जिज्ञासा आप रखते है तो हम आपको ये सभी जानकारी देने जा रहे है। क्या है धनतेरस का अर्थ और क्यों मनाया जाता है पांच दिन के दीपावली ...
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karwa chauth 2022

‘करवो ले करवो ले व्रत भोंगनी करवो ले ‘ जानिये करवा चौथ की कथा और चंद्रोदय का समय

सुहागिन महिलाओं में जिस व्रत का उत्साह कई दिन पहले शुरू हो जाता है वह करवा चौथ का व्रत आ रहा है। किसी भी व्रत का आधार आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक होता है। जब आप व्रत रखते हैं, तब आपका पूरा शरीर शुद्ध हो जाता है। जब शरीर में से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, तब मन तीक्ष्ण होता है। ऐसी अवस्था में आप जो भी इच्छा करते हैं या जिस भी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, वह पूरा ...
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मेले मगरिये, कौनसा मेला कब कहां और क्या खास, देखे कैलेंडर

पूरे साल में जिस त्योहार और मेलो का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है वो अब शुरू हो चुके है। इसके बारे में कहावत भी प्रचलित है - ‘तीज त्योहारा बावड़ी, ले डूबी गणगौर’ इसका अर्थ है तीज से त्योहारों की शुरुआत हो जाती है और गणगौर आते ही समापन हो जाता है। अब तीज से त्योहारों और पर्व की शुरुआत हो चुकी है और इसके लिए रमक झमक आपको ' मेला मगरिया व त्योहार ' का कैलेंडर तिथि उपलब्ध करवा ...
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लौंदा बाबा

बीकानेर व्यास जाति के झूझार ( लौंदा बाबा) गर्दन कटने पर भी लड़ते रहे, अखातीज पर होती है पूजा

बीकानेर का शहर परकोटा वीरों और योद्धाओं का क्षेत्र है, ऐसे बहुत से उदाहरण मिलते है जब यहाँ के लोगों ने अपनी आन बान शान और समाज के लिये अपनी जान न्यौछावर कर दी। कई तो ऐसे भी हुवे है जिनकी गर्दन धड़ से अलग हो गई, फिर भी वे शांत नहीं हुवे और तलवार घुमाते हुवे लड़ते रहे। व्यास जाति के एक वीर ने वर्षो पहले किसी लड़ाई में गर्दन धड़ से अलग होने पर भी अपने दुश्मनों से ...
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बारहमासा गणगौर कथा व व्रत की सम्पूर्ण विधि तथा नियम

यह व्रत चैत्र सुदी रामनवमी के दिन शुरू होता है। यह सुहागन औरतें ही करती है। अखंड सुहाग, मंगल कामना, वंश वृद्धि, सद्बुद्धि व मोक्ष के लिए व्रत किया जाता है। एक कहानी के अनुसार इस व्रत को सर्वप्रथम राजा युधिष्ठिर व द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से आज्ञा प्राप्त करके किया। जिससे मोक्ष प्राप्त हुआ। यह व्रत रामनवमी से एकादशी तक यह किया जाता है। वैधव्य से छुटकारा दिलाता है ये व्रत - बारहमासा गवर की पूजा विधवा स्त्री भी ...
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होली पर हुड़दंग और पौरुष शक्ति के देवता इलोजी

होली पर हुड़दंग और पौरुष शक्ति के देवता इलोजी इलोजी की होली के हुड़दंग देवता, फागण के देवता, पौरुष शक्ति के देवता के रूप में पूजा की जाती है। पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही इनकी पूजा करते हैं। पुरुष अपना पौरुष और यौन शक्ति बढ़ाने के लिए तथा महिलाएं पुत्र की चाह में इनकी पूजा करते हैं। होली के अवसर पर राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रो में इलोजी की प्रतिमाएं किसी बड़े चौक चौराहों पर बनी हुई है। कुछ जगहों पर ...
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बीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली

बीकानेर की होली का एक रंग ये भी देखिए होलिका दहन के बाद ब्राह्मणों की मंत्र जाप होली आपने बीकानेर की होली के विभिन्न रंग देखे होंगे। यहां गीत, संगीत, हुलड़, मौज, मस्ती, गेवर और रंग गुलाल के साथ बीकानेर की होली का बहुत अनूठा व सकारात्मक शक्ति देने वाला एक आयोजन और भी है जिसको बहुत कम लोगों ने सुना है और उससे भी कम लोगों ने देखा है। हम बात कर रहे है होलिका दहन के पश्चात पास ...
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‘नारसिंह का कड़ा, ज्यो सिंवरे ज्यूँ हाजिर खड़ा’ जानिए होली से पहले भगवान नारसिंह की पूजा के बारे में

'नारसिंह का कड़ा, ज्यो सिंवरे ज्यूँ हाजिर खड़ा' होली और दीपावली से पहले भगवान नारसिंह भगवान की पूजा की जाती है। होली से एक दिन पहले फाल्गुन शुक्ला चतुर्दशी को अनेक घरों में भगवान नारसिंह की पूजा होती है। नारसिंहो महावीर: यह भगवान महावीर या हनुमानजी का ही स्वरूप है। घरों में आमतौर से रसोई घर में रसोई को साफ सफाई के बाद शुद्ध करके सिंदूर कुकुंम रोली से त्रिशूल की आकृति बनाई जाती है। त्रिशूल शक्ति या बल का ...
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बजरंग धोरा मंदिर का 62वां स्थापना दिवस पर जानिए मंदिर के बारे में

बीकानेर। बजरंग धोरा धाम स्थापना के 62 वर्ष पूर्ण होने जा रहे है। इस अवसर पर मंदिर में शुक्रवार 4 फरवरी से 5 फरवरी शनिवार तक अखण्ड रामचरित मानस पाठ चलेगा। 62 वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना बजरंग बली के भक्त स्व रामचंद्र जी दाधीच द्वारा बसंत पंचमी के दिन की गई थी। बीकानेर के रेतीले टीलों के बीच बजरंग बली का मंदिर हनुमान भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय स्थान है। वर्षो पहले हनुमान जी के भक्त श्री रामचंद्र जी ...
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