छतो पर लौटे पक्षियों की रौनक, प्यासा ना रहे एक भी पक्षी

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कुछ संस्था तो कुछ व्यक्तिगत तौर पर कर रहे पक्षियों के लिए पालसीया लगाने का काम

छोटीकाशी बीकानेर नगरी में कुछ संस्थाएं तो कुछ व्यक्तिगत तौर पर पशु पक्षियों की सेवा कार्य में लगे हैं। इस भीषण गर्मी में लू के थपेड़ों के बीच पक्षियों के जीने का एकमात्र सहारा पानी ही होता है। पशु पक्षियों की सेवा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है हर घर की छत पर पक्षियों के लिए पालसिया (परिंडा) रखना उनके लिए पानी भरना नित्य कर्म का ही एक भाग है। पुराने घरो और हवेलियों में हम देखते है कि पक्षियों के रहने के लिए विशेष स्थान बनाए जाते थे जिसमे आंधी तूफान बारिश होने पर भी पक्षी सुरक्षित रहते थे लेकिन अब ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि लोग घरों में एक स्थान विशेष रूप से पक्षियों के लिए निर्धारित करें।

पालसिया (परिंडा) रखने की बात हो तो आज कई संस्थाएं और सेवादार पक्षियों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पालसिए रखने का काम कर रहे है। जिनमें रोटरी क्लब, वन्देमातरम मंच, उदय व्यास आदि कई संस्था और लोग है ये नाम उनके है जो मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से हमें जिन्होंने कम से कम 500 परिंडे यानी पालसियेे लगाने का संकल्प लिया है।

उदय व्यास ने बताया कि उनका इस गर्मी में 501 पालसिये लगाने का लक्ष्य है यही नहीं वे सिर्फ पालसिये लगाते ही नहीं बल्कि उनमें पानी भरा रहे यह भी निश्चित करते हैं। हर रोज वे उन मार्ग से निकलते हुए पानी भरते है जहां उन्होंने पालसिये लगाए है।

संस्थाओं ने खुले मैदानों में पालसियों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की है। ये संस्थाएं और सेवादार धन्यवाद् के पात्र है इनसे प्रेरित होकर अन्य भी इस सेवा करने के लिए आगे आएंगे और जिन्होंने छत पर अभी तक परिंडा नहीं रखा है वे अब रख कर उनमें हर दिन पानी डालना निश्चित करेंगे।
– Radhey Krishan Ojha

सेवा संस्थाओं की जानकारी हमें जरूर देवे मेल या व्हाट्सएप करें।

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