शादी व सन्तान के लिये करें यहां बारहमासी गणगौर के दर्शन

शेयर करे

बारहमासा गणगौर चमत्कारिक शादी व सन्तान के लिये करें दर्शन ——————– गणगौर अनेक रूपों मे प्राचीन काल से ही पुजन की जाती रही है कुआँरी गणगौर,धींगा गणगौर, बारहमासा गणगौर । बारह मासा गणगौर चैत्र शुक्ल एकादशी व द्वादशी को दोपहर निकलती है और गढ़ पहुँचती है जहाँ भव्य मेला भरता है और सभी गणगौर इकत्रित होती है खोल भरी जाती है और महिलाए अपने साड़ी या ओढ़ना के पल्लू को गीला कर गवरजा को पानी पिलाती है। बारहमासा गणगौर का व्रत करने का विधान है, कहते है उसे नियमपूर्वक करने…

शेयर करे
Read More

म्हारौ तेल बलै घी घाल, घुडलो घुमे छै जी घुमै छै

शेयर करे

गणगौर के दिनों में शीतला अष्टमी से शुरू होकर तीज तक गली गुवाड़ मे अविवाहित कन्याओं को घुड़ला लेकर घुमते हुए देखा जा सकता हैं । घुड़ला एक मिट्टी से बना बर्तन एक गले की तरह होता हैं जिसके अंदर मिट्टी बिछाई हुई रहती है और घी या तेल का दिपक जलाया जाता है । गणगौर के 7 दिन बाद से ही ऐसा नजारा देखा जा सकता हैं कि गवर पूजने वाली कन्याऐं शाम के वक्त घुड़ला लेकर निकलती हैं और आस-पास पड़ोस के घरों के आगे जाकर यह गीत…

शेयर करे
Read More