ये भारतीय बुजुर्ग भी न ! हर बात पर-ऐसा करो वैसा करो और ऐसा मत करो

hamare bujurg hamari sanskriti
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ये भारतीय बुजुर्ग भी न ! हर बात पर-ऐसा करो वैसा करो और ऐसा मत करो । अरे, दुनियां कहां से कहां पहुँच गई और ये… (दुनियां कही पहुंचे लेकिन अन्तोगत्वा हमारे भारतीय बुजुर्गो व संस्कृति को तो मानना ही पड़ता है हमें गर्व है और आज दुनियां भी मानने लगी है) – घर में घुसते ही ड्योढी पर पहले हाथ- मुहं पैर धोवो । -अस्पताल जाकर आए हो तो पहले नहाओ -शवयात्रा में गए हो तो घर से बाहर नहाओ। -जन्म और मरण हो तो सुआ और सूतक के…

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भुजिया के अविष्कार की पूरी कहानी जानिए

bikaneri bhujiya ka avishkar
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बीकानेर का भुजिया विश्व प्रसिद्ध है और इसको सबसे पहले बीकानेर में ही बनाया गया था आज बीकानेर के हल्दीराम बीकाजी और अन्य कई ऐसे ब्रांड है जो भुजिया नमकीन मिठाई विदेशो में भी एक्सपोर्ट करते है। तो आज आप जानिए कैसे सबसे पहले हुई थी शुरुआत..

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होली के बाद जाम बीज को पापड़ उवारना भी जरूरी

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होली खेलने के बाद राम राम वाले दिन या उसके अगले दिन द्वितीया को जिसे जाम बीज या जमला बीज भी कहते है, इस दिन बहन भुआ या स्वास्नी अपने भाई भतीजे आदि को उनके ऊपर से एक उतारा करने की परम्परा है। पानी का लौटा, तला पापड़, कैर, काचरी व फली तली हुई लेकर उपर से उवारती है यानी क्लॉक वाइज घुमाती हैं फिर घर से बाहर जाकर पापड़ आदि सामग्री सड़क पर रख उसके चारों ओर एक वृत्ताकार घेरा यानि चक्रिया बनाती है । सामग्री को सड़क पर…

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बीकानेर में होली खेलने से पहले लेते है मां नागणेची से स्वीकृति

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पहले माँ भगवती खेलती है होली, फिर बीकानेर शहरवासी इस शहर में होली पूरे 8 दिन खेली जाती है। शहर के लोग एकत्रित होकर फाल्गुन शुक्ला सप्तमी (खेल सप्तमी) को माँ भगवती नागणेची के दरबार पहुचते है और सबसे पहले भगवती को होली खेलाकर उन्हें रिझाते है और प्रार्थना करते है कि आज 8 दिन लगातार उन्हें होली खेलने की इजाजत दे और इस दौरान शहर में शांति सद्भाव बना रहे और आनन्द की बयार बहती रहे। भक्त अपने भाव से माता द्वारा शहर में होली खेलने की स्वीकृति लेकर…

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बीकानेर के देवी कुंड सागर का चमत्कारी सती माता मंदिर जहां खंभों से आज भी बहता है दूध

Bikaner dev kund sagar
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बीकानेर का देवी कुंड सागर जो यहां से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर गडसीसर गांव के पास स्थित है बीकानेर राजवंश का श्मशान घाट कहा जाता है। बीकानेर के पूर्व राजाओं महाराजाओं रानियों का अंतिम संस्कार इसी जगह पर किया गया वह जिस जगह पर उनका दाह संस्कार किया गया उसी जगह पर एक छतरी बना दी गई। यहां महाराजा गंगा सिंह जी की पत्नी वल्लभ कुंवर देवी की भी छतरी है जिसे ‘दूध झरने वाली छतरी’ भी कहा जाता है। यहां आज भी दूध झरने की घटना होती…

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बीकानेर शहर के 100 वर्ष पुराने धूणे, संस्कृति बचाये रखे है हमारे धूणे

Bikaner Dhuna
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बीकानेर की धूणा संस्कृति बीकनेर शहर के अलग अलग चौक में स्थाई रूप से धूणे बनाये गए है जो सर्दी में ना सिर्फ चर्चा करने स्थान है बल्कि यही से जीव जंतुओं की सेवा का कार्य भी होता है। अलाव तपने के साथ साथ बीकानेर शहर के लोग यहाँ गाय, गोधो, कुतो की देख रेख करते है। जानिये पूरी डिटेल में हर चौक के धूणे के बारे में वीडियो में

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धर्मनगरी बीकानेर के कोलायत में साधुओं का सबसे बड़ा मेला – विशेष

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बीकानेर में कई विश्व विख्यात मंदिर है यह शहर धर्मनगरी के साथ साथ मेलों का शहर भी कहलाता है। बीकानेर के कोलायत से प्रयागराज, हरिद्वार, पुष्कर की तुलना की जाती है। यहाँ का कोलायत मेला अद्भुत है कुम्भ की तरह ही यहाँ हज़ारों साधू संत कपिल सरोवर में स्नान करने आते है कोलायत की यह झील पश्चिमी राजस्थान की सबसे पवित्र झील कहलाती है। देखिये इस वीडियो में। …. यूट्यूब चैनल पर जाकर हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूले

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