बटुक दोड़े काशी को

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कल बटुको के काशी दोड़ने की परम्परा संपन्न हुई इससे एक दिन पूर्व बटुको का ‘हाथकाम’, छींकी हुई बटुको को जनेउ डालने के पूर्व गुरु द्वारा गुरु मंत्र दिया जाता है, जिसका पालन बटुक को आजीवन करना पड़ता है । इसके कुछ नियम भी होती है इसके बाद बटुक द्वारा काशी की और दोड़ने की परम्परा निभाई जाती है जिसमे बटुक के हाथ में पाटी, गोटा, गेडिया व पंजिया लेकर दोड़ते है और उनके पीछे-पीछे बच्चे व बड़े उनके पीछे दोड़ते है और उसको रोकने की कोशिस करते है । अंत…

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पुरे शहर में में हो गई है रमक झमक, देखे कुछ सावा २०१३ की झलकिया

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३१ जनवरी को होने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज सावे की रमक झमक अब पुरे शहर में देखी जा सकती है । शहर में हर जगह कही औरतें गीत गाती हुई निकलती दिखती है तो कहीं लोग खोला परम्परा से मुह रंग करवाकर आते हुए बटुको का तो जैसे शहर में जमावड़ा सा हो गया है कहीं तो एक एक  घर में चार पांच बटुको की जनेउ डाली जा रही है । पान की दुकानों पर रोज से ज्यादा भीड़ दिखनी लगी है और जगह-जगह ब्याह के गीत बझ रहे है…

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