भक्तिमय हिलोरे ले रहा श्री पार्श्‍व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम

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“केशर की खुशबू से वातावरण में छायी दिव्यता”

भक्तिमय हिलोरे ले रहा श्री पार्श्‍व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम

संजय जोशी

कृष्णगिरी। कृष्णगिरी जिला मुख्यालय से चेन्नई मार्ग पर 7 किलोमीटर बाहरी इलाके में स्थित ओरप्पम गांव में राष्ट्रसंत, मन्त्र शिरोमणि डॉ. वसंतविजयजी म.सा. द्वारा स्थापित किए गए श्री पार्श्‍व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम में आयोजित किए जा रहे सदी के सबसे विशालतम महायज्ञ, विश्व शांति एवं महालक्ष्मी कुबेर, अर्थ, धर्म, समृद्धि कलश अनुष्ठान में गुरुवार को केशर की खुशबू से वातावरण में दिव्यता छा गयी और धाम में मौजूद लोग भक्ति के हिलोरे ले रहे थे। विश्व शांति, देश के नागरिकों की समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा संकल्प और कोरोना जैसे संकट निवारण को लेकर आयोजित विश्व स्तरीय अनुष्ठान कर रहे डॉ. वसंतविजय जी म.सा. ने बताया कि विश्व इतिहास में पहली बार लगभग 10 हजार किलो सुपारी, खजूर मेवे, विभिन्न पदार्थ महायज्ञ में डाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान यज्ञ कुटीर में सूक्ष्म रुप से विराजने वाले देवी-देवताओं के शरीर में प्रकाश रुपी प्राण शक्ति होती है। शास्त्रों में बताया गया है यज्ञ आहूति में डाले जाने वस्तु घी के साथ प्राण शक्ति बनती है तो देवताओं में वह शक्ति पहुंचकर देवों को ऊर्जा देती है, प्राण शक्ति बढ़ाती है। जिससे देवता प्रसन्न होकर यज्ञकर्म में सहयोग करने वालों के विभिन्न मनोरथ पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोनारुपी से महामारी से आर्थिक या शारीरिक स्थिति से जो भी परेशान है इसीलिए मां लक्ष्मीजी का यज्ञ, धन्वंतरि यज्ञ देश और दुनिया की मंगल कामना के साथ किया जा रहा है। देश के इतिहास में 100 वर्षों इस महायज्ञ में 200 लारी से भी ज्यादा सामग्रियां एकत्रित की गयी है। बेल की लकड़ी 6 हजार किलो, शुद्ध चंदन, लाल चंदन (बोरे भरकर) जो कि महालक्ष्मीजी को अतिप्रिय है। अनेक प्रकार की औषधियां और विभिन्न प्रकार की सामग्रियां यज्ञ आहूति में डाली जा रही है। साथ ही साथ अनुष्ठान में सफेद चंदन का भी उपयोग हो रहा है। असली चंदन के बुरादे को भी यज्ञ में सम्मिलित किया जा रहा है।

विश्व स्तरीय महायज्ञ-अनुष्ठान में प्रतिदिन दी जा रही है 1 लाख हवन आहूतियां

राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. के पावन सानिध्य में सदी के सबसे बड़े महायज्ञ-विश्व शांति एवं महालक्ष्मी, कुबेर, अर्थ, धर्म समृद्धि कलश अनुष्ठान का आयोजन 23 जुलाई तक किया जा रहा है। इस विश्व स्तरीय महायज्ञ-अनुष्ठान में मंत्र और जाप के साथ लगभग 10 लाख हवन आहूतियां दी जा रही है। इसके लिए बाकायदा तीर्थधाम पर 40 हजार वर्गफुट के विशाल यज्ञमंडप में 108 प्रकाण्ड विद्वान पंडितों द्वारा इस महाअनुष्ठान का आयोजन कराया जा रहा है। महाअनुष्ठान सम्पन्न करने के बाद घर को स्वर्ग बनाने वाले 5 हजार दिव्य कलशों को महालक्ष्मी कुबेर मंत्रों से 1 करोड़ कुमकुम पूजन, 10 लाख हवन आहूतियों और 25 लाख धन्वंतरि कुबेर जाप के साथ सिद्ध किया जाएगा। कलश में अनेक दिव्य औषधियां व जड़ी बूटियां, नवरत्न, 32 उपरत्न, 32 हीलिंग जेमस्टोन्स, 3 दिव्य सिद्धयंत्र, 106 वैष्णव तीर्थों का दिव्य कुंकुम, 1 करोड़ लक्ष्मी मंत्रों से अभिमंत्रित कुंकुम, 10 लाख आहूतियों से सिद्ध दिव्य यज्ञ भस्म, मूल्यवान धातुएं डाली जाएगी।

दान देने वालों को 10 लाख आहूति से सिद्ध भस्म भेजेंगे

विश्व शांति दूत, राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजय जी म.सा. ने बताया कि इस विश्व स्तरीय अनुष्ठान में दान देने वालों को यज्ञ में सिद्ध 1 करोड़ जाप किया हुआ कुमकुम, 10 लाख आहूति से सिद्ध भस्म भेजा जाएगा।

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