विषम स्थितियों में कैसे करे माता की पूजा

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कैसे करें की माता प्रसन्न भी हो

पूरा विश्व कोराना की महामारी से त्रस्त है और भारत भी इस संकट के दौर से गुजर रहा है । चारों और लॉकडाउन है घरों में लोग सिमिट रहे है,बाज़ार जाना सम्भव नहीं या दुकानों माता की पूजन उपलब्ध नहीं ऐसे में सनातनी लोग नवरात्रा में देवी की पूजा कैसे करें यह सबके मन में चल रहा होगा। इसके लिये आप चिंता न करें शास्त्रों में स्पस्ट भी उल्लेख है देश,काल,समय और परिस्थिति के अनुरुप ही हमें हर कार्य करना चाहिये।
आप के घर माता की चुनरी नहीं है तो लाल ब्लाउज पीस या लाल केशरिया वस्त्र ओढ़ा सकते है अगर ये नहीं तो मोली ही काफी है अगर ये भी नहीं हो तो लाल रेशमी केशरिया कोई भी धागा हो तो वो भी चढ़ा सकते है।
प्रशाद मिठाई अभी नहीं मिल सकती और मिले तो भी अभी बाहर से लाना उचित भी नहीं तो क्यों न माता के गुड़ की लापसी , हलवा, खीर, गुलकंद या सिंघाड़े का सीरा खुद घर में बनाकर चढ़ाए तो इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता अगर इनमें से कोई नहीं है तो मिश्री और मिश्री नही तो गुड़ अथवा चीनी भी चढ़ा सकते है। फल उपलब्ध न हो तो लोंग/इलायची/सुपारी इन तीनों में जो उपलब्ध हो वो चढ़ा दे।

माता के पास पालसिये में ज्वारे बोए जाते है इन परिस्थितियों में पालसिये भी नहीं ला सकें होंगे तो वो भी चिंता न करे भूमि पर या किसी भी धातु के पात्र में मिट्टी डालकर बुआई करलें।
इस प्रकार 9 दिन भोग में दूध, चीनी, घर में बनाकर शक्कर का चूरमा आदि भोग चढ़ा देवे। वैसे भी पहले बाजारों की मिठाइयां नहीं बल्कि घर में बनाई ही मिठाई चढ़ाई जाती थी । फल भी आटे व हल्दी जो घर मे उपलब्ध रहते है उसके बना सकते है ये फल शादी विवाह में भी आज भी यूज किया जाता है ।

कोई चीज जो भी लगे चढ़ानी जरूरी है और आपका मन है या जहाँ भी आप है वहाँ ऊपर बताया वो भी सम्भव नहीं है तो आप सबसे पहले स्वयं गंगा का स्मरण कर अपने आपको पवित्र कर और माता की पूजा मानसिक रूप से करें आवाह्न स्नान भोग सब मानसिक रूप से निवेदन करें, वैसे भी पूजन में सामग्री की बजाय भाव महत्वपूर्ण है।

इस संकट की घड़ी में भी सकारात्मक सोच रखे कि माता ने आपको कुछ दिन घर में रहकर ध्यान स्मरण जाप व प्रार्थना करने का अवसर दिया है। आप नियमित माता का दुर्गाशप्तष्टि का पाठ करें, किताब उपलब्ध न हो तो इंटरनेट पर है या फिर सुने या माता का नवाहण मन्त्र की 11, 21, 108 जितनी सम्भव हो करें और पूजा माला के अंत में शांति मन्त्र अथवा ‘नमः शिवाय’ की एक माला जरूर करें और अपने व देश की रक्षा करने के लिये प्राथर्ना करें।
जिनको पाठ आता है वो रोग भय शांत के लिये कल्याण के लिये ‘रोगा न शेषा…’ मन्त्र सम्पुट लगाए अथवा दुर्गाशप्ती के पीछे अथवा नेंट में ‘सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमस्तुते व ‘रोगा न…’ की एक माला प्रतिदिन जाप करें। इससे आत्मबल बढ़ेगा, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

अपने अपने घर में रहकर प्रशासन के नियम की पालना के साथ उक्त विधि अपनाएँ पूजन आदि सामग्री के लिये बाहर निकलने की कोई आवश्यकता नही है, देवी माँ की कृपा जरूर होगी । अगर पहले दिन पूजा नहीं कर पाए तो भी कोई नहीं ये 9 दिन में कभी भी करलें । विश्व कल्याण और इस महामारी से मुक्ति के लिए माता से प्राथना जरूर करें..

– 25 मार्च घट स्थापना मुहूर्त

सुबह – 6:27 से 9:30 बजे तक व 11 से 12:30 तक

।।जय माता दी ।।

प्रहलाद ओझा ‘भैरु’

शैलपुत्री माता की कथा वीडियो

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