तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

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तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट।।
क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

जेठ यानि जेष्ठ माह में जहाँ जहाँ गर्मी पड़ती है वहाँ बरसात भी अधिक होती है, इसलिये जिस शहरों में अभी गर्मी अधिक पड़ रही है उन्हें आगामी दिनों में पानी की किल्लत कम होगी। अभी अखबारों में नो तपा दस तपा हेडिंग आया लेकिन ये क्या होता है कब होता और इसका क्या प्रभाव है वो जानकारी संकलित कर बता रहा है रमक झमक।

तपा तप

जेष्ठ कृष्णपक्ष दशमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक गर्मी का प्रकोप अधिक रहता है। इसको कहते है– *तपा तप*।


दस तपा

यदि जेठ माह में दस तपा में पानी बरस जाता है तो बाकि सब नक्षत्र हल्के पड़ जाते है। (धनिष्ठा नक्षत्र से मृगशिर नक्षत्र तक) दस तपा कहते है।

तपे नखत मृगशिरा जोय, तब बरसा पूरन जग होय।।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मृगशिरा नक्षत्र में अगर गर्मी ज्यादा पड़े तो उस वर्ष पानी खूब बरसता है।

तपे मृगशिरा बिल्खें चार, बन बालक औ भैंस उखार।।

मृगशिरा नक्षत्र का तपना, कपास, बालक, भैंस और ईख के लिए अच्छा नहीं। कपास और ईख की फ़सल अच्छी नहीं होती। मां और भैंस का दूध कम हो जाता है।
जिन – जिन क्षेत्र में, शहरों में व प्रदेशों में दस तपा में गर्मी अधिक रही, वहां बारिस होने की पूर्ण संभावनाएं है।
(संकलन:रमक झमक)

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