कोलकाता में मारवाड़ी समाज की भव्य गणगौर

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कोलकत्ता में लोक सस्कृति का भव्य आयोजन ‘गणगौर महोत्सव’
महोत्सव में नजर आता है रंगीलो राजस्थान की झलक लोक उत्सव,लोक परम्परा और लोक सस्कृति का जीवंत दृश्य 


कोलकता के बड़ा बाजार में राजस्थानी गणगौर उत्सव की झलकियां देख कर हर किसी को लगता है कि वो अपने मूल शहर /राजस्थान में आ गया है । राजस्थान में जहाँ बालाएं / महिलाएं गवरजा पूजा करती है दातनीयां देती है,बासा देती हुई गीत गाती है ,तीज -चौथ को गवरे घुमाती हैं , घुलड़े का गीत गाती है,कुए का पानी पीलाती है और रात को पुरुष मण्डलिया गवरजा के परम्परागत गीत गाते है ठीक वैसे ही मिलता जुलता दृश्य आप कोलकता जैसे महानगर में देख सकते है । यहां राजस्थान के लोग भागम भाग जीवन और जीवन की आपाधापी के बीच भी ,चकाचोंध वाले इस महानगर में अपनी मूल परम्परा व सस्कृति को नहीं भूले है । कोलकता में गवरजा को गंगा का पानी पिलाने की रस्म,गवरजा के आगे गीत,नृत्य,डांडिया और पुरुषों के गीतों की स्वर लहरियां कोलकता में राजस्थानी सस्कृति का अहसास करवाती है । सनातन सस्कृति की विशेषता अनेकता में एकता और आपसी सद्भाव । ये सोच हमारे हर उत्सव हर परम्परा व सस्कृति में दिखती है । बंगाल ने बंगाली उत्सव व अपनी परम्परा का एक साथ निर्वहन व सामंजस्य,ये यहाँ की खुबसूरती है । (Www.ramakjhamak.com)

गणगौर महोत्सव में सामूहिक वंदना गीतों की प्रस्तुतियां बटौरती है तालियां:-

पुरुष जब गाते है गीत,-सुनने उमड़ती है भीड़ !
रंग बिरंगे परिधानों में सजे धजे लोग, लोक उत्सव में मौज मस्ती का माहौल !
हर मण्डली जब गाती है गीत,प्रसन्न हो जाता है मन का मीत !!
सभी मारवाड़ी होते यहां साथ,दिखता है दृश्य यहाँ रंगीलो -राजस्थान !

श्री श्री निम्बूतल्ला पंचायत गवरजा माता मंडली की मेजबानी में लगभग सौ वर्षों से कोलकाता महानगरी में होने वाले गणगौर महोत्सव में पंचमी तिथि पर सभी ९ गवरजा मंडलियों द्वारा क्रमवार अपने वंदना गीत की प्रस्तुति निम्बूतल्ला चौक में प्रस्तुत की जाती है।इस वर्ष वंदना गीतों की प्रस्तुति कार्यक्रम में सम्मिलित वंदना समारोह गायन प्रस्तुति (2019)का निर्धारित क्रम इस प्रकार :-

(1) श्री श्री गवरजा माता श्री नींबूतल्ला पंचायत
(2) श्री श्री मनसापुरण गवरजा माता सेवा ट्रस्ट
(3) श्री श्री गवरजा माता हंसपुकुर मण्डली
(4) श्री श्री गवरजा माता कलाकार स्ट्रीट
(5) श्री श्री गवरजा माता गांगुली लेन सेवा ट्रस्ट
(6) श्री श्री बाँसतल्ला गवरजामाता कमेटी
(7) श्री श्री गवरजा माता पारख कोठी
(8) श्री श्री गोवर्धननाथजी टेम्पलस् श्री गौरी माता
(9) श्री बलदेवजी गवरजा सेवा ट्रस्ट

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गणगौर महोत्सव में ‘ सम्मिलित ‘ अहम भूमिका !
कोलकता जैसे महानगर में बंगाली भाषा वाषियो के बीच मारवाड़ी लोगों ने अपने काम और व्यवहार से सामंजस्य अछे से बैठा रखा है । इतने बड़े नगर में उत्सव करना,प्रशासनिक व्यवस्था करवाना,मण्डलियों के बीच कोर्डिनेशन करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी का व मुश्किल काम है और ये सब व्यवस्था का जिम्मा उठाती है ‘सम्मलित’। इसलिये गणगौर उत्सव सफलता में ‘सम्मलित का योगदान उल्लेखनीय है।

सम्मिलित में 9 गवरजा के प्रतिनिधि
श्री प्रमोद डागा,श्री बल्लभ दुजारी,श्री सुरेश बागड़ी,जयंत डागा(सयोंजक),नथमल पुगलिया,राजेश मोहता,नारायण दास सादानी,राजकुमार चांडक,किशन कुमार मिमानी,गिराज दम्माणी,नरेंद्र कुमार बागड़ी,नवरतन बिन्नानी,महावीर जोशी,बंशीलाल लखोटिया,स्वंयप्रकाश पुरोहित,नरेंद्र किराडू,नारायण दास मूंधड़ा व मनोज कोठारी । सम्मिलित में प्रशासनिक सम्पूर्ण जिम्मा राजकुमार तिवाड़ी,गणेश मिमानी,महेश मिमानी,शुशील ओझा व सपन बर्मन की भूमिका रहती है ।

कोलकत्ता की सभी 9 गणगौर मंडलियों के २ प्रतिनिधि को मिलाकर कुल १८ व्यक्ति एवं समाज के कुछ प्रबुद्ध गणमान्य व्यक्तियों को लेकर एक सम्मिलित कमेटी का गठन गणगौर मेले को सुचारू रूप से चलाने हेतु किया जाता है । जिसके निर्देशन में सभी मंडलियों को प्रशासनिक व्यवस्था, एवं शोभायात्रा हेतु मार्ग निर्देशन किया जाता है। इस बार 2019 की सम्मिलित कमेटी के सयोजक श्री जयंत डागा व पूरी सम्मलित टीम सक्रिय । सम्मिलित को बधाई ।(Www.ramakjhamak.com)

9 के अतिरिक्त
प्रमुख 9 मण्डलियों के अतिरिक् कोलकत्ता बड़ा बाजार से दूर जाकर बसे लोगों ने वहाँ गवर बैठाना व आस पास अपने क्षेत्र में ही आयोजन शुरू कर दिया ।श्री श्री वी आई पी अंचल, विद्याधर नगर,हिन्द मोटर, काकुड़गाछी,साल्टलेक, हावड़ा व लिलवा में भी गणगौर उत्सव मनाया जाता है ।

गवरजा मण्डलियां व उनके वर्तमान प्रमुख पदाधिकारी:-
श्री श्री मनसा पूरण गवरजामाता सेवा ट्रस्ट

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सभापति : श्री सुशील जी पुरोहित

मंत्री : श्री उमेश कुमार जी व्यास

*श्री बलदेवजी गवरजा सेवा ट्रस्ट*

सभापति – *श्री मनीष जी दम्मानी*
मंत्री – *श्री हरिदास जी चांडक*।

श्री श्री गवर्धननाथजी

सभापति- श्री बल्लभ दास पुगलिया
मंत्री- श्री श्री मोहन मूंधड़ा

नींबूतल्ला

न कोई सभापति
न कोई मंत्री

बाँसतल्ला
सभापति : श्याम सुंदर राठी
मंत्री : जितेन्द्र कोठारी

गांगुली लेन

सभापति घनश्याम भैया
मंत्री : अशोक कोठारी

पारख कोठी

सब सभापति
सब मंत्री

कलाकार स्ट्रीट
सभापति:श्री रामकिशन कोठारी(मुन्ना)
मन्त्री:श्री बलदेव बाहेती

हँसपुकुर
सभापति : गोपाल दास दम्माणी
मंत्री : देव किशन कोठारी

लीलवा में भी गणगौर मेले की छटां निराली !!

गीत,डांडिया,नृत्य,घूमर और सयोंजन कोलकत्ता के नजदीक लीलवा जहाँ भी मारवाड़ी खाशकर बीकानेर से जुड़े लोग अच्छी संख्या में है ।यहाँ गणगौर उत्सव की छटां देखते ही बनती है । महिलाओं व लड़कियों का बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना,राजस्थानी वेषभूषा और पौराणिक गीत और गोठ महोत्सव को खाश बनाते है ।

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लिलुया आशापुरण गवरजामाता मडंली
संस्थापक :बसन्त कुमार पुरोहित गंगा देवी पुरोहित
ट्रस्ट बोर्ड- अध्यक्ष-सुशील जी पुरोहित उपाध्यक्ष-शिव किशन जी किराडु सचिव बसन्त कुमार पुरोहित कोषाध्यक्ष-नर्सिहं हर्ष

लीलवा गणगौर मेला कमेटी: चैयरमेन-श्री चन्द्रशेखर पुरोहित,अध्यक्ष-श्री बद्रीदास ब्यास उपाध्यक्ष-श्री नन्दलाल ओझा ,घनश्याम दास ब्यास,संयोजक-किशन पुरोहित,सचिव-नर्सिहं हर्ष,कोषाध्यक्ष-श्री गणेश दाश ब्यास,संगीत मंत्री शिव कुमार ब्यास मनोज आचार्य सुधीर हर्ष ।  (Www.ramakjhamak.com)

हमारी सस्कृति हमारी परम्परा हमारी विरासत:
ये विरासत हमें हमारे पूर्वजों से मिली है ।लोक परम्परा और लोक उत्सव हमें हर स्थिति में, हर मोड़ पर कुछ नई सीख लेने,आगे बढ़ने व प्रसन्न रहने का उपाय बताती है । इन लोक उत्सव में गीत- संगीत की अहम भूमिका है । बहुत से लोगों का इसमें योगदान है,बीकानेर से कोलकता को कर्मभूमि बनाने वाले साहित्यकार -गीतकार श्री निर्भीकजी जोशी का योगदान को भी रमक झमक नमन करता है जिन्होंने गवरजा के गीत लिखे/संकलित किये जो आज जन जन की जुबां पर है जिसप्रकार श्री वेद जी व्यास (मित्र) द्वारा पुष्टि पुंज में संकलित पुष्टिकर विवाह गीत जो समाज की धरोहर बन गए वैसे हो निर्भीक जी ने हर बार कोलकत्ता गवरजा मण्डलियों के लिये खूब गीत लिखे,पुरानी पुस्तको में ज्यादातर उनके ही गीत मिलेंगे । ऐसे और भी लोग होंगे जिन्हें इस अवसर पर हमें सम्मान देना चाहिये,खाशकर लेखक,गायक,प्रचारक व संस्कृतिकर्मियों को। मरुस्टेण्डर्ड के महेंद्र जोशी ने गवरजा गीत पुस्तक कोलकत्ता में जारी की है ऐसे ही मारवाड़ी मेल अखबार ने कोलकत्ता गवरजा उत्सव को प्राथमिकता से विशेषांक के रूप में सजाया(मुझे ई पेपर गोयनका जी से प्राप्त हुवा) उसी पेपर में डॉ बाबूलाल शर्मा जी के बारे में जानकारी पढ़ी ,जिन्होंने गणगौर गवरजा पुस्तक में गवरजा व लोक परम्परा से जुड़ी काफी कुछ उपयोगी सामग्री संकलित व सम्पादित की है ।हमारी परम्परा,संस्कार व सस्कृति के लिये काम करने वाले लोगों को रमक झमक की ओर साधुवाद ! पुस्तक प्राप्त होने पढूंगा जिससे मेरा और ज्ञान बढ़ सकेगा ये मेरा मानना है । शोशल मीडिया एस एन जोशी जोशी,किशन देराश्री व एन डी व्यास जैसे लोग इस सस्कृति के प्रचार में लगे है ,उनका भी साधुवाद करना चाहिये ।रमक झमक को जानकारी देने में किसी न किसी रूप में सहयोगी का रमक झमक आभार:श्री जयंत डागा,राजकुमार तिवाड़ी,प्रमोद गोयनका,मारवाड़ी मेल,जगदीश हर्ष,पूनम रँगा,बसन्त पुरोहित,उमेश व्यास,शुसील पुरोहित,नरेश किराडू,राजकुमार व्यास,जेठमल रँगा,महेंद्र जोशी,एस एन जोशी,किशन देराश्री,एन डी व्यास व पुरु व्यास । – (Www.ramakjhamak.com)—————————————
मरुभूमि से दूर हम अप्रवासी राजस्थान समाज के लोग इस बंग की पावन धरा पर गणगौर उत्सव बडाबाजार में विगत 140 सालों से अनवरत हर्षोल्लास से मनाते आ रहे हैं। तीज और चौथ के दिन सभी मंडली रात्रि में शोभायात्रा निकालती है जिसकी छटा देखते ही बनती है, सभी तरफ माँ के वंदना के स्वर सुनाई पड़ते है। स्वांग झांकी देखने लोग लालायित रहते है । हर मंडली की एक विशिष्ट पहचान है पेचा, लोग पेचे के रंग से समझ जाते है ये किस मंडली का सदस्य है। माँ गौरी से यही प्रार्थना की अपनी कृपा भक्तों पर बनाएं रहे।-जयंत डागा

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