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गोबर की माला (भरभोलिए) से करें माला घाेलाई की रस्म

होली वाले दिन भाई के माला घोलाई की परम्परा है। आजकल होली के दिन माला घोलाई रस्म भाई को पुष्प माला पहनाकर की जा रही है, जो गलत है। इन्ही पुष्प माला को होली में डाला जा रहा है जो पूर्णतया निषेद्ध है । तो आइये जानते क्या करना चाहिये जिससे भाई की रक्षा दैहिक रक्षा हो और पर्यावरण शुद्ध हो तथा स्वयं बहन के लिये भी मंगल हो । क्या होते है भरभोलिये:- (रमक झमक) देशी गाय के गोबर ...
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शिव पुराण के अनुसार जानिए महाशिवरात्रि कथा और महत्व

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इस दिन क्या हुआ था इसके बारे अलग अलग मत माने जाते है । कई जगह भगवान शिव के विवाह और कई जगह शिव भगवान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। चेन नाथ जी धुणा शिव मंदिर के योगी विलासनाथ जी ( शिव सत्यनाथ जी महाराज के शिष्य ) ने बताया कि भगवान शिव के मुख्य पुराण ' शिव पुराण ' में कहीं भी इस दिन भगवान शिव के विवाह का उल्लेख ...
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षट्तिला एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा को समर्पित षटतिला एकादशी 20 जनवरी 2020 दिन सोमवार को है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने और भगवान की पूजा करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति तो होती है, व्यक्ति को नर्क से मुक्ति के साथ मोक्ष भी मिलता है। उस व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात वैकुण्ठ की प्राप्ति भी होती है। षटतिला एकादशी के पूजा, स्नान आदि के समय काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। षटतिला एकादशी के दिन व्रत ...
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सूर्यग्रहण क्यों होता है पौराणिक कथा जानिए, सम्पूर्ण जानकारी

ग्रहण का पौराणिक महत्‍व, सूर्यग्रहण सूतक काल, क्या करें क्या नहीं, क्या होता है सूर्यग्रहण ग्रहण का पौराणिक महत्‍व पौराणिक कथानुसार समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। जब भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान कर लिया। ...
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आज घर के बाहर दीप जलाए, चरण धुली से तिलक करें, गोपाष्टमी विशेष

क्या होती है गोपाष्टमी:- कार्तिक शुक्ल अष्टमी को ‘गोपाष्टमी’ कहते हैं | यह गौ-पूजन का विशेष पर्व हैं |इस दिन भगवान कृष्ण ने गौ को चराने का कार्य शुरू किया था। क्या करना चाहिये:- इस दिन प्रात:काल गायों को स्नान कराके गंध-पुष्पादि से उनका पूजन किया जाता है | इस दिन गायों को गोग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ जायें तो सब प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है | सायंकाल (गौधूलि वेला) में जब गायें ...
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