गौ की धूल, परिक्रमा व जुगाली देगी लाभ – गोपाष्टमी

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गाय और गोपाल:-

गोपाष्टमी के दिन बालकृष्ण ने गौओं को चराना शुरू किया, गौ का पालन करने से श्री कृष्ण का नाम गोपाल पड़ा और कार्तिक शुक्ला अष्टमी को गोपाष्टमी कहा जाने लगा और कृष्ण का नाम गोपाल भी पड़ा।

प्रत्यक्ष देवी गाय:-

गाय सर्वदेवमयी है, इसमें 33 कोटि देवता निवास करते है। इस धरा पर गाय और गंगा प्रत्यक्ष देवी है।

गोपाष्टमी पर क्या करें:-

गौधूलि बेला पर घर से बाहर पश्चिम की ओर मुख करके दीपक करें। गाय की पूंछ पर मोली बांधे, उसका श्रंगार करें।चारा गुड़ खिलाए।तिलक करें। आरती कर परिक्रमा करें। बछड़ा हो तो बछड़े की भी पूजा करें। गौ शाला को दीपमाला कर रोशनी करें। गौ महिमा का श्रवण करें और दूध दही घी का दर्शन करें।

क्या है गौधूलि बेला:-

सूर्यास्त से मिंट पूर्व व बाद का समय संध्या काल के समय जिस वक्त गाय चर कर अपने आशियाने/आश्रय स्थल को लौट रही होती है और गायों के खुर से जो धूल उड़ती है उसे गौधूलि और उस समय को बेला कहते है यानि ‘गौधूलि बेला’ विवाह आदि मुहूर्त में जब कोई मुहूर्त शुद्ध नहीं हो तो गौधूलिबेला ही सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।

गौ धूल से तिलक:-

गौ के पैर यानि खुर से उड़ती धूल में सकारात्मक ऊर्जा होती है, खुर के नीचे की रेत का तिलक सकारात्मक सोच व नई ऊर्जा देता है।

गोबर गणेश:-

वास्तव में सर्वपूज्य गणेश गाय के गोबर से निर्मित हो उसकी पूजा से कार्य निर्विघ्न सम्पन्न हो जाते है।

गौ परिक्रमा गौ तीर्थ:-

गौ परिक्रमा देने से 33 कोटि के देवताओं की परिक्रमा हो जाती है।सब तीर्थ हो जाते है।

गाय की जुगाली:-

गाय जब आराम सुख चैन से होती है तो मुहं में जुगाली करती है और उस समय फेन/झागनुमा जमीन पर गिरता है। कहते है गाय की जुगाली वह स्थान दोष रहित होकर पवित्र हो जाता है।

कृष्ण प्रसन्न होंगे गाय से:-

हनुमानजी को प्रसन्न करना हो तो जयश्रीराम बोलना व उन्हें मनाना जरूरी है। वैसे ही कृष्ण को प्रसन्न करने के इच्छुक सर्वप्रथम गाय की सेवा सत्कार करे।

पूंछ से नजर झाड़ा:-

किसी को नजर या टोक लग जाए तो गाय की पूंछ सिर पर से घुमाने से टोक नजर उतर जाती है। ऐसा कई जगह पढ़ने व सुनने में आया है।

गाय से शगुन:-

घर से किसी काम के लिये निकले और गाय हमारे दाहिने बछड़े को दूध पिलाती हो तो कार्य सफलता व प्रसन्नता देता है।

गौ मन्त्र पूजन:- ॐ सुरभै नमः

गौ ग्रास पहली रोटी गाय:-

भोजन की पहली रोटी गाय को देने से घर मे आया अन्न शुद्ध हो जाता है, बरकत करता है और पाचक व पौस्टिक हो जाता है।

घर मे दोष:-

घर मे वास्तु अथवा कोई दोष हो तो गौ मूत्र गंगाजल गोबर व गौ शाला की धूल पानी मे मिलाकर घर मे छिड़के।

प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ (संस्कृतिप्रेमी)

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