ऐसी 20 वजह जिसके कारण बीकानेर शहर पूरी दुनिया में विख्यात है

bikaner top tourist places
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बीकानेर स्थापना दिवस पर विशेष रूप से आप सबके लिए ऐसी जानकारी लेकर आये है जो शायद आपको मालूम नहीं है बीकानेर में दुनिया की ऐसी जगह और शहर से जुड़े ऐसे तथ्य जो सिर्फ बीकानेर से जुड़े है ऐसे चीज़े जो सिर्फ बीकानेर में है और दुनिया में कहीं नहीं तो जरूर देखिये ये वीडियो जो आपको जरूर पसंद आएगा …  

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भुजिया के अविष्कार की पूरी कहानी जानिए

bikaneri bhujiya ka avishkar
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बीकानेर का भुजिया विश्व प्रसिद्ध है और इसको सबसे पहले बीकानेर में ही बनाया गया था आज बीकानेर के हल्दीराम बीकाजी और अन्य कई ऐसे ब्रांड है जो भुजिया नमकीन मिठाई विदेशो में भी एक्सपोर्ट करते है। तो आज आप जानिए कैसे सबसे पहले हुई थी शुरुआत..

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धींगा गवर और पंथवाडी माता की कथा व कहानियां

Dhinga gavar mata panthwadi mata
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धींगा गवरजा की कहानी ( मोम की गुडीया ) कैलाश पर्वत पर शिव – पार्वती बैठा था चैत्र माह शुरु होते ही ” गवरजा ” रा ” बालीकाओं कन्याओं ” द्वारा पूजण शुरु हो गया । पार्वती शिवजी सू बोली कि मैं भी म्हारे पिहर जावणो चाहू , आप हुकम करो तो । महादेव जी बोल्या , म्हारी भांग घोटण री व्यवस्था कूण करसी जने पार्वती व्यवस्था रे रूप में एक मोम री गुडिया बनाई और आपरी शक्ति सू उसमें जीव डाल दिया , बा चेतन हो गई पार्वती बे…

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देखें वे गीत जो गणगौर में दोपहर के समय गाए जाते है

Gangaur ke geet
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गणगौर में दोपहर में गाए जाने वाले गीत – नौरंगी गवर म्हारी चाँद गवरजा , भलो ए नादान गवरजा रत्नों रा खम्भा दीखे दूर सू , बम्बई हालो , लाखों पर लेखण पूरब देश में , कलकते हालो , गवरयो री मोज्यों बीकानेर में गढ़न कोटां सूं उतरी सरे , हाथ कमल केरो फूल शीश नारेळां सारियो सरे , बीणी बासक नाग रे | | बम्बई . . . बम्बइ . . . . . (1) चोतीणे रा चार चाकलिया , बड़ पीपल बड़ है भारी बड़ पीपल बड़ है…

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गणगौर में सुबह गाए जाने वाले गीत देखें

गणगौर के गीत
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गणगौर सुबह के गीत – उठी – उठी- उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल , सूरज तपे रे लिलाड़ एक पुजारी ऐ बाई म्हारी गवरजा , गवरजा , ज्यों रे घर रे टूठे म्होरी माय अन्न दे तो धन दे , बाई थरि सासरिये , पीवरिये , अन्न धन भया रे भण्डार ! डब्बा तो भरिया ए बाई थारे गैनों सु गोंठो सु, माणक मोती तपे रे लिलाड़, उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल.. खोल कीवाडी- गवर गवरादे माता खोल किवाड़ी , ऐ बाहर उभी थोने…

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होली के बाद जाम बीज को पापड़ उवारना भी जरूरी

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होली खेलने के बाद राम राम वाले दिन या उसके अगले दिन द्वितीया को जिसे जाम बीज या जमला बीज भी कहते है, इस दिन बहन भुआ या स्वास्नी अपने भाई भतीजे आदि को उनके ऊपर से एक उतारा करने की परम्परा है। पानी का लौटा, तला पापड़, कैर, काचरी व फली तली हुई लेकर उपर से उवारती है यानी क्लॉक वाइज घुमाती हैं फिर घर से बाहर जाकर पापड़ आदि सामग्री सड़क पर रख उसके चारों ओर एक वृत्ताकार घेरा यानि चक्रिया बनाती है । सामग्री को सड़क पर…

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होलिका दहन और माला घोलाई मुहूर्त

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वर्ष 2020 मार्च 9,फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा सोमवार । माला घोलाई मुहूर्त लगभग 1:11 दोपहर बाद। होलिका दहन मुहूर्त शाम 6:28 से 8:55 तथा सिंह लग्न भी । (जानकारी सोर्स पत्रिका) माला घोलाई भरभोलिये यानि गोबर की माला से करना उत्तम, पूरी जानकारी के लिए देखें वीडियो –

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