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धर्मनगरी बीकानेर के कोलायत में साधुओं का सबसे बड़ा मेला – विशेष

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बीकानेर में कई विश्व विख्यात मंदिर है यह शहर धर्मनगरी के साथ साथ मेलों का शहर भी कहलाता है। बीकानेर के कोलायत से प्रयागराज, हरिद्वार, पुष्कर की तुलना की जाती है। यहाँ का कोलायत मेला अद्भुत है कुम्भ की तरह ही यहाँ हज़ारों साधू संत कपिल सरोवर में स्नान करने आते है कोलायत की यह झील पश्चिमी राजस्थान की सबसे पवित्र झील कहलाती है।
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आज घर के बाहर दीप जलाए, चरण धुली से तिलक करें, गोपाष्टमी विशेष

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क्या होती है गोपाष्टमी:-
कार्तिक शुक्ल अष्टमी को ‘गोपाष्टमी’ कहते हैं | यह गौ-पूजन का विशेष पर्व हैं |इस दिन भगवान कृष्ण ने गौ को चराने का कार्य शुरू किया था।

क्या करना चाहिये:-
इस दिन प्रात:काल गायों को स्नान कराके गंध-पुष्पादि से उनका पूजन किया जाता है | इस दिन गायों को गोग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ जायें तो सब प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है | सायंकाल (गौधूलि वेला) में जब गायें चरकर वापस आयें, उस समय भी उनका आतिथ्य, अभिवादन और पूजन करके उन्हें हरी घास, भोजन आदि खिलाएं और उनकी चरणरज (खुर के नीचे की रज यानि धूल) ललाट पर लगायें उसका तिलक करें | इससे सौभाग्य की वृद्धी होती है |


कुछ खाश जो करने से लाभ होगा:-

(1) जहाँ समूह में गायें निर्भीक रूप से रह कर समूह में विचरण करें और बैठकर श्वास ले वो जगह बहुत पवित्र और आनन्द देने वाली हो जाती है । समर्थ व्यक्ति गायों के ऐसी व्यवस्था करें अथवा जहाँ ऐसा हो उनका सहयोग करे। उस जगह की चरण रज अपने घर के मुख्य द्वार पर लाल कपड़े में बांधकर लटकाए व गौ मूत्र घर में छिड़के तो घर का वास्तु दोष दूर हो जाता है व देव कृपा आने लगती है ।
(2) रोजाना खाशकर इधर उधर गली में बीमार, कमजोर या अपंग गाय व बछड़ों को गुड़ चारा देवे अत्यधिक सर्दी में गायों को रात में गुड़ अवश्य देवें।
(3)तुम्बड़ी वाले बाबा छोटुजी कहते थे कि गोपाष्टमी को गौधूलि वेलां में घर के बाहर सुरक्षित स्थान पर दीप जलाना चाहिये,भाव ये है कि संध्या के समय घर लौटती गायों को दूर से उजाला दिखाई दे और दूसरा अर्थ दीप से गाय की पूजा है तीसरा अर्थ सबको गाय का महत्व पता चले सब घरों के बाहर दीप जले। इसके पीछे भाव ये भी है कि गौ माता हमारे जीवन उजाला करें।

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कन्याएं क्यों रखती है 3 दिन तुलसी माता का कड़ा व्रत व तारीख तिथि व जानिए इसकी पूरी विधि

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समस्त पापो को नष्ट करके विष्णुलोक की प्राप्ति कराने वाला तुलसी त्रिरात्री व्रत का उल्लेख हमारे शास्त्रों में पाया गया है। जिस प्रकार अग्नि समस्त ईंधन को दग्ध कर देती है वैसे ही इस व्रत के प्रभाव से सर्वपाप नष्ट होकर मनुष्य आवागमन से मुक्त हो जाता है। राजा युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि सत्ययुग में मुनि वशिष्ठ के निर्देशानुसार सर्वप्रथम इस व्रत को अरूंधत्ति ने किया था। इसी प्रकार देवलोक में ब्रह्मा जी के कहने पर सावित्री ओर इंद्राणी ने इस व्रत को किया था।

तुलसी शालिग्राम विवाह

कब किया जाता है तुलसी माता व्रत व इसकी तिथि

कार्तिक शुक्ल नवमीं से एकादशी तक तीन दिवस तक निराहार रहकर द्वादशी को पारणा करना चाहिए। व्रत प्रारम्भ करते समय तिथियों की ह्रास वृद्धि न हो एवं सुवा-सूतक और गुरूशुक्राष्त न हो। यह तीन दिवसीय निराहार व्रत स्त्रियां अपने सुख सौभाग्य के लिये करती है। व्रतकर्त्ता स्त्री रजस्वला न हो ऐसे समय व्रत शुरू करना श्रेष्ठ होता है। इस व्रत को तीन साल तक या तीन वार करने का विधान है। कुँवारी लड़कियां अच्छे पति व सौभाग्य के लिये इस व्रत को प्रारम्भ कर सकती है परंतु उद्यापन विवाह उपरांत ही करना चाहिए।
इस बार तुलसी व्रत 6 से 8 नवंबर तथा पारणा 9 नवंबर को प्रातः होगा। (2019)

इस व्रत में निराहार रहते हुवे तीन दिनों तक तुलसी का पूजन भगवान दामोदर (शालिग्राम) के साथ करना चाहिए। नियमतंत्र के अनुसार इस व्रत के करने से भगवान की प्रसन्नता के साथ सुख व संतान की सिद्धि एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

तीन बाट का तुलसी माता अखंड दीप

लोकाचार के अनुसार नवमीं और दशमी का दिन ठीक से व्यतीत हो जाये तो दशमी के दिन सायंकाल को व्रतबंधन करके अखण्डदीप स्थापित करना चाहिए। घी और तेल के 2 पृथक-पृथक दीपक मौली और सुत मिलाकर तीन तार की बत्ती ( बाट ) बनाकर प्रज्वलित करना चाहिए। तीन तार की बत्ती ( बाट ) में एक तार स्वयं का दूसरा पति के निमित और तीसरी भगवान के लिए होती है। नीम की डंडी में बत्ती ( बाट ) लपेटी जाती है, नीम की डंडी पर लपेटने से निरोग्यता के साथ व्रत का सामर्थ्य बना रहता है। आजकल दीप में लोहे की मोटी कील डाली जाती है, कील डालने का रहस्य यह है कि कील के गर्म रहने से घी भी गर्म रहता है।

तुलसी चरणामृत से व्रत खोलना

प्रत्येक दिन तुलसी पूजन के साथ कथा श्रवण करना चाहिये। उपाहन ( जूता-चपल ) त्याग करना और रात्रि में भूमि पर कम्बल बिछाकर शयन करना। द्वादशी के दिन सर्वप्रथम अपने गुरु अथवा ब्राह्मण को प्रातःकाल घर बुलाकर पैर धोकर तथा भोजन कराकर वस्त्र दक्षिणा आदि से संतुष्ट करना। फिर तुलसी सहित भगवान के चरणामृत से व्रत खोलना चाहिए। अतः तीन दिनों तक व्रत के रहते जल पीते समय तुलसी भी ग्रहण नहीं करनी चाहिए इससे व्रत खण्डित होता है।

विवाह के पश्चात उद्यापन

व्रती के परिवार जन दशमी के दिन दीपदर्शन करके व्रती को दश्यों के रुपये देते है। दशमी के दिन ही गुड़ , गेहूँ और घी का दान संकल्प करके इन वस्तुओं को अखण्ड दीपक के पास रख देना चाहिए तथा व्रत पूर्ण होने पर दक्षिणा सहित दान करना चाहिए। विवाह उपरांत उद्यापन के समय तुलसी विवाह पूर्वक इस व्रत का विधि विधान से उद्यापन करना चाहिए।

पं अशोक कुमार ओझा(राजा)
ज्योतिषाचार्य एवं पंचागकर्ता

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धनतेरस के दिन झाड़ू क्यों खरीदतें है क्या है महत्व

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धनतेरस के दिन लोग सोने चांदी के गहने और बर्तन खरीदते हैं, लेकिन इस दिन झाड़ू खरीदने की परंपरा भी काफी लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन झाडू की खरीददारी करने से घर में सुख, शांति और संपन्नता बनी रहती है। मत्स्य पुराण में, झाडू को मां लक्ष्मी का ही रूप माना गया है। ये भी माना जाता है कि झाडू खरीदने से घर से गरीबी जाती है और ऋण से भी मुक्ति मिलती है।

धनतेरस के दिन झाडू खरीदने का क्या है महत्व

धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदा जाता है। मान्यता है कि इस दिन झाड़ू खरीदने से गरीबी दूर होती है साथ ही नई झाड़ू से नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदकर अपने घर में लाना चाहिए। इससे पैसों की तंगी को दूर किया जा सकता है। शास्त्रों में इसे माता लक्ष्मी का प्रतिरूप माना जाता है। हालांकि धनतेरस पर झाड़ू खरीदने के कुछ नियमों का भी पालन करना चाहिए। इन नियमों के प्रति लापरवाही बरतने से देवी लक्ष्मी नाराज भी हो सकती है।

ताकि घर से न रूठें मां लक्ष्मी

धनतेरस पर अगर झाड़ू खरीदें तो झाड़ू को पकड़ने की जगह पर सफेद रंग का धागा बांध दें. ऐसा करने से देवी लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं. साथ ही ध्यान रहे कि झाड़ू पर पैर न मारा जाए. कहा जाता है कि झाड़ू पर पैर मारने से देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती है. वहीं झाडू मंगलवार, शनिवार और रविवार को खरीदने से बचना चाहिए. इन दिनों में झाड़ू खरीदने से घर में कलह का माहौल हो जाता है।

धनतेरस पर तीन झाड़ू खरीदें:

अगर हो सके तो धनतेरस पर तीन झाड़ू खरीदें. तीन झाड़ू साथ में खरीदना शुभ माना जाता है. दो या चार के जोड़े में झाड़ू की खरीद न करें. वहीं धनतेरस पर खरीदी गई झाड़ू को दिवाली के दिन सूर्योदय से पहले मंदिर में दान करने से घर में लक्ष्मी आती है। मंदिर में झाड़ू दान दिवाली के दिन मंदिर में झाड़ू दान करने से घर में लक्ष्मी का निवास होता है। ऐसा तभी होता है जब आप झाड़ू को मंदिर में सूर्योदय से पहले दान करते हैं। ध्यान रखें दान किया जाने वाला झाड़ू धनतेरस के दिन के पहले से खरीदना होगा।  

विज्ञान सम्मत और आज के जीवन में व्यावहारिक है हमारी धर्म संस्कृति मान्यताएं

ध्यान रहे कि हमारा धर्म संस्कृति विज्ञान सम्मत है साथ ही यह आज के जीवन में व्यावहारिक भी। इन दिनों साफ सफाई का विशेष महत्व है और झाड़ू से ही साफ सफाई की जाती है जिससे गंदगी को बाहर फेंका जाता है इससे घर की दरिद्रता नकारात्मकता माना गया है साफ सफाई के दौरान बीमारी फैलाने वाली गंदगी मच्छरों की भी सफाई हो जाती है इसलिए झाड़ू का सदुपयोग हमारे जीवन में विशेष महत्व रखता है और आम दिनों में भी यह उपयोगी रहता है साथ ही ऐसी चीज जो कि हमारे दैनिक जीवन में सहायक है उसका महत्व बढ़ जाता है इसलिए धनतेरस के दिन इसका महत्व बताया गया है।

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सवर्ण आरक्षण EWS सर्टिफिकेट कैंप निशुल्क, जल्द बनवाए

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Ews सर्टिफिकेट निःशुल्क बनाए:-
सरकार द्वारा सवर्णो के आर्थिक आरक्षण हेतु नोकरियो में EWS सर्टिफिकेट की आवश्यकता होगी,जब वैकेंसी निकलेगी तब सभी बेरोजगार सवर्ण भागा दौड़ी में लग जायँगे,इसलिये जरूरी है उनको पहले से ही ews सर्टिफिकेट बनवा लेना चाहिये।

आवश्यक डॉक्यूमेंट जानकारी

एडवोकेट सुखदेव व्यास बताते है कि इस सर्टिफिकेट के लिये मूल निवासी,राशन कार्ड,स्वयं का फोटो,पिता फोटो,आधार पिता का व स्वयं का,जाति का प्रूफ(किसी दस्तावेज में जाति लिखी हो)जिसका पिता सरकारी कर्मचारी हो उसका 16 नम्बर फार्म व पेन कार्ड,प्राइवेट नोक़री हो तो मालिक से सालाना आय का प्रमाण पत्र आदि की फोटो प्रति सलग्न करनी होती है।

बीकानेर शहर क्षेत्र में रत्तानि व्यासों की बगेची में ews केम्प निःशुल्क लगाया गया है,पंचायत ट्रस्ट के अध्यक्ष मखन लाल शास्त्री व कम्मू महाराज बताते है कि निःशुल्क केम्प 22 सितम्बर को लगाया गया और आगामी 28 व 29 (शनि रवि)को भी यह केम्प लगाया जाएगा।

केम्प में कम्यूटर,प्रिंटर,कागच,ऑपरेटर,सलाहकार अटेस्टेड करने के लिये सभी योग्य व्यक्ति निःशुल्क सेवाएं दे रहे है।
योगेश व्यास बताते है कि रविवार को डॉ पंकज जोशी,कमल आचार्य,शिवनाथ जोशी,विष्णु बिस्सा,मुकेश व्यास,चंद्रकांत व्यास,बालजी,आनन्द,रमेश,बृजुभा, रविकांत व्यास,चित्रा व गुंजन व्यास आदि ने सेवाएं दी।
वासुदेव व्यास बताते है कि बेरोजगार सवर्णो ऐसे कैंप का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिये।

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जानिए गणेश जी का विसर्जन क्यों किया जाता है

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गणेश चतुर्थी के दिन से शुरू हुए गणेश उत्सव का आज समापन होगा आज अनंत चतुर्दशी के दिन सभी जगह गणेश जी का विसर्जन नदी तालाब समुद्र में किया जाएगा। ऐसे में कई बार प्रश्न उठते हैं कि गणेश जी का विसर्जन क्यों किया जाता है तो आज इसी के बारे में हम आपको बता रहे हैं।

जब श्री वेद व्यास जी महाभारत को लिखवाने के लिए किसी कुशल लेखक को ढूंढ रहे थे तब श्री गणेश जी ने महाभारत को लिखने के लिए हामी भरी लेकिन उन्होंने भी एक शर्त रखी कि जब तक आप लगातार बोलते रहोगे तब तक मैं लिखता रहूंगा ऐसे में यह लगातार 10 दिन तक चलता रहा जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था। 
10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया है। तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडा किया था। इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है।

इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया। यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई। माटी झरने भी लगी। तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा। इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें पसंदीदा आहार चढ़ाने की भी प्रथा है।

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कैसे पड़ा कोडमदेसर भैरव नाम, जानिए भैरव के चमत्कार

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बीकानेर में स्थित कोडमदेसर भैरव के बारे में इस वीडियो में पूरी डिटेल में जानिए कि कोडमदेसर नाम कैसे पड़ा राव बीकाजी का इस गांव से क्या संबंध है इस मंदिर की स्थापना कैसे हुई और क्यों आज भी इस मंदिर पर छत का निर्माण नहीं किया जाता तथा मंदिर की स्थापना के बाद कौन-कौन से चमत्कार हुए हैं यह सभी जानकारी आपको इस वीडियो में पूरी डिटेल में मिलेगी।

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