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कुंडली मे चन्द्र ग्रहण योग, ग्रहण में क्या करें क्या नहीं

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कुंडली मे चन्द्र ग्रहण योग का उपाय, ग्रहण में क्या करें क्या नहीं ? गर्भवती क्या न करें

जिनकी कुंडली में ग्रहण योग होता है खाशकर चन्द्र ग्रहण, चन्द्र ग्रह कुण्डली में राहु या चन्द्र के साथ जब पीड़ित हो । ये सब योग जीवन में सन्तुष्टि नहीं देते,निर्णय क्षमता कमजोर या गलत हो सकती है।व्यक्ति कई बार तनाव /डिप्रेशन/एंजाइटी का शिकार हो जाता है। गुस्सा अधिक आ सकता है,चीड़चिड़ा हो जाता है,कही भी अधिक देर मन नहीं लगता है ।
बीपी,साइनस,साइनोसाइटिस,माइग्रेन,अस्थमा,ब्रोंकाइटिस,एलर्जिक जुकाम व टीबी आदि की समस्या हो सकती है । जीवन में उतार चढ़ाव अधिक होते है,मन व्याकुल हो जाता है ।
अगर इनमें से कोई प्रॉब्लम है तो चन्द्र ग्रह पीड़ित समझें। चन्द्र पीड़ित हो या कुंडली में चन्द्र ग्रहण हो तो उसका उपाय भी चन्द्र ग्रहण के समय ही करें तब लाभ प्रतिशत की मात्रा ज्यादा सम्भव है,ग्रहण किस भाव किस राशि में है उसके हिसाब से उपाय करें तो अधिकाधिक फल मिलता है लेकिन यहाँ कॉमन उपाय बताए जा रहें है जो भी परिणाम देने में सक्षम होंगे,इसलिए सरल,सात्त्विक,कम से कम समय व खर्च में व हर कोई कर सके ऐसा उपाय बता रहा हूँ जो मेरे पिताजी भैरव साधक टुंबडी वाले बाबा पण्डित ज्योतिषी छोटुलालजी ओझा बताया करते थे वो बता रहा हूँ।
(1) ग्रहण वाले जातक को ग्रहण से पूर्व व ग्रहण के पश्चात हरिद्वार,उज्जैन,नासिक या गयाजी में स्नान करें। बच्चें को घर में ही गंगाजल डालकर स्नान करवा सकते है या जिनके किसी भी करना संम्भव न हो पाए वो भी सिर्फ गंगाजल डाल कर स्नान कर सकते है ।
(2) ग्रहण के दौरान ईस्ट मन्त्र गुरु मंत्र के साथ सोमाय नमः तथा नमः शिवाय का निरंतर जाप करें(बच्चों के लिये अभिभावक करें या पंडितों से करावें)
(3) ग्रहण के समाप्ति से पूर्व व ग्रहण समाप्ति पश्चात स्नान कर छाया दान व सप्त धान डाकोत को दान करें।कम्बल दान करें ।
(4)ग्रहण के दौरान पहने कपड़े दान करदे या फेंक दे ।
(5) ग्रहण पश्चात चन्द्र देव को गंगाजल से अर्घ्य देवे।
(6)ग्रहण मोक्ष पश्चात स्नान के बाद गंगाजल का पान करें यानी थोड़ा सा पीए।
(7) ग्रहण पश्चात शिव मंदिर में चावल मिश्री दही गोमती चक्र चढाए।
ये सरल सात्विक सटीक बिना खर्चे का व लाभदायक उपाय है।चन्द्र ग्रहण,क्या करें और क्या न करें*
चन्द्र ग्रहण के समय क्या न करें:-
ग्रहण के समय भोजन न करें,पानी न पिएं।
ग्रहण के समय काटना,तोड़ना,सीलने का काम न करें।
ग्रहण के समय नींद न ले ।
ग्रहण के समय
ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श न करें।
ग्रहण के गर्भवती बाहर न निकले,कमरें में रहें,यथा सम्भव मौखिक या मानसिक जाप करें या संकीर्तन करें।

ग्रहण के समय क्या करें?
ग्रहण के समय ईस्टमन्त्र/गुरु मंत्र का जाप करें ।
ग्रहण के समय सत्संग,कीर्तन करें।
ग्रहण के समय गीता पाठ,
/गजेंद्र मोक्ष पाठ करें ।

ग्रहण से पूर्व स्नान,ग्रहण में जाप,ग्रहण मोक्ष पर स्नान व स्नान पश्चात जनेऊ नई धारण करें, दान करें व चन्द्र देव को गंगाजल से अर्घ्य देवें।
ग्रहण मध्य व बाद छाया दान भी श्रेष्ठ है।
(ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें ये बुजुर्गों ने जो बताया वो आज विज्ञान भी मान रहा है,धर्म आस्था विश्वास से करने पर तन मन आगामी जन्म सुधरता है, विज्ञान भी तन मन के प्रभाव को जरूर मान रहा है, हम बुजुर्गों के बताए ऐस्ट्रो टिप्स या सलाह मानकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। – प्रहलाद ओझा ‘ भैरू ‘ (रमक झमक)

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जैन यूथ क्लब की युवा टीम गरीब बच्चो को खिलाती है खाना

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जैन यूथ क्लब के युवाओं की टीम पिछले 2 वर्षों से गरीब बच्चो को खिला रही है खाना।

हर रविवार करीब 200 बच्चो को जैन यूथ क्लब युवाओं की मंडली गरीब बच्चो को खाना खिलाने निकलती है सुचारू रूप से हर सप्ताह ये कार्य चलने लगा तो दोस्तो ने मिलकर एक समिति बना दी जिसका कार्य प्रभार पंकज सिंघी संभालते है व इस संस्था के अध्यक्ष है सत्येन्द्र बैध।

ये युवाओं की मंडली हर रविवार 200 बच्चो के लिए झुग्गी झोपडी इलाकों में जाती है और उन्हें खाना खिलाती है। संस्था के विपुल कोठारी ‘ जैन ‘ ने बताया कि इसमें लगने वाला खर्चा समाज व सदस्यों द्वारा लगता है और यह संस्था पिछले 2 वर्षों से लगातार हर रविवार के दिन बच्चो को भोजन करवाती है। इसके अलावा ये संस्था जैन समाज में विभिन्न तरह के सामाजिक कार्य में अपना योगदान देती है।

युवाओं का भलाई और सेवा का यह कार्य सराहनीय है सेवा के लिए अधिक से अधिक युवाओं का आगे आना जरूरी है। समाज के हर तबके में युवा आगे आकर अगर अपने स्तर पर सेवा कार्य में सहयोग करने लगे तो यह सेवा और सुविधा सभी तक और व्यापक स्तर पर पहुंच पाएगी। रमक झमक ऐसे युवाओं का साधुवाद करती है।

जैन यूथ क्लब, सीने मैजिक रोड, बीकानेर।
– पंकज सिंघी
जानकारी – विपुल कोठारी ‘ जैन ‘

आप भी किसी सेवा कार्य में लगातार जुड़े है तो हमें जानकारी जरूर देवे।

देखिए हमारे यूट्यूब चैनल पर सेवा और संस्कृति के बारे में
– पांच रूपये में खाना खिलाने वाली संस्था

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बीकानेर में यहाँ आकर होता है हर समस्या का समाधान

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जानिये जंगल के बीच बने आश्रम में बीकानेर के संत के बारे में
संत भावनाथ जी रामदेव बाबा के अनन्य भक्त है और वे आमतौर पर मौन व्रत में रहते है यहाँ दर्शन करने आने वाले भक्त अपनी हर समस्या का समाधान होने की बात कहते है देखिये वीडियो

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तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

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तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट।।
क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

जेठ यानि जेष्ठ माह में जहाँ जहाँ गर्मी पड़ती है वहाँ बरसात भी अधिक होती है, इसलिये जिस शहरों में अभी गर्मी अधिक पड़ रही है उन्हें आगामी दिनों में पानी की किल्लत कम होगी। अभी अखबारों में नो तपा दस तपा हेडिंग आया लेकिन ये क्या होता है कब होता और इसका क्या प्रभाव है वो जानकारी संकलित कर बता रहा है रमक झमक।

तपा तप

जेष्ठ कृष्णपक्ष दशमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक गर्मी का प्रकोप अधिक रहता है। इसको कहते है– *तपा तप*।


दस तपा

यदि जेठ माह में दस तपा में पानी बरस जाता है तो बाकि सब नक्षत्र हल्के पड़ जाते है। (धनिष्ठा नक्षत्र से मृगशिर नक्षत्र तक) दस तपा कहते है।

तपे नखत मृगशिरा जोय, तब बरसा पूरन जग होय।।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मृगशिरा नक्षत्र में अगर गर्मी ज्यादा पड़े तो उस वर्ष पानी खूब बरसता है।

तपे मृगशिरा बिल्खें चार, बन बालक औ भैंस उखार।।

मृगशिरा नक्षत्र का तपना, कपास, बालक, भैंस और ईख के लिए अच्छा नहीं। कपास और ईख की फ़सल अच्छी नहीं होती। मां और भैंस का दूध कम हो जाता है।
जिन – जिन क्षेत्र में, शहरों में व प्रदेशों में दस तपा में गर्मी अधिक रही, वहां बारिस होने की पूर्ण संभावनाएं है।
(संकलन:रमक झमक)

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छतो पर लौटे पक्षियों की रौनक, प्यासा ना रहे एक भी पक्षी

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कुछ संस्था तो कुछ व्यक्तिगत तौर पर कर रहे पक्षियों के लिए पालसीया लगाने का काम

छोटीकाशी बीकानेर नगरी में कुछ संस्थाएं तो कुछ व्यक्तिगत तौर पर पशु पक्षियों की सेवा कार्य में लगे हैं। इस भीषण गर्मी में लू के थपेड़ों के बीच पक्षियों के जीने का एकमात्र सहारा पानी ही होता है। पशु पक्षियों की सेवा करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है हर घर की छत पर पक्षियों के लिए पालसिया (परिंडा) रखना उनके लिए पानी भरना नित्य कर्म का ही एक भाग है। पुराने घरो और हवेलियों में हम देखते है कि पक्षियों के रहने के लिए विशेष स्थान बनाए जाते थे जिसमे आंधी तूफान बारिश होने पर भी पक्षी सुरक्षित रहते थे लेकिन अब ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि लोग घरों में एक स्थान विशेष रूप से पक्षियों के लिए निर्धारित करें।

पालसिया (परिंडा) रखने की बात हो तो आज कई संस्थाएं और सेवादार पक्षियों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पालसिए रखने का काम कर रहे है। जिनमें रोटरी क्लब, वन्देमातरम मंच, उदय व्यास आदि कई संस्था और लोग है ये नाम उनके है जो मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से हमें जिन्होंने कम से कम 500 परिंडे यानी पालसियेे लगाने का संकल्प लिया है।

उदय व्यास ने बताया कि उनका इस गर्मी में 501 पालसिये लगाने का लक्ष्य है यही नहीं वे सिर्फ पालसिये लगाते ही नहीं बल्कि उनमें पानी भरा रहे यह भी निश्चित करते हैं। हर रोज वे उन मार्ग से निकलते हुए पानी भरते है जहां उन्होंने पालसिये लगाए है।

संस्थाओं ने खुले मैदानों में पालसियों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की है। ये संस्थाएं और सेवादार धन्यवाद् के पात्र है इनसे प्रेरित होकर अन्य भी इस सेवा करने के लिए आगे आएंगे और जिन्होंने छत पर अभी तक परिंडा नहीं रखा है वे अब रख कर उनमें हर दिन पानी डालना निश्चित करेंगे।
– Radhey Krishan Ojha

सेवा संस्थाओं की जानकारी हमें जरूर देवे मेल या व्हाट्सएप करें।

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देखिये नरसिंह अवतार और हिरण्यकश्यप का वध का वीडियो

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नरसिंह जयंती पर हर चौक में भरा मेला
देखिये नथूसर गेट पर हुए मेले का आयोजन

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आधुनिक ज्योतिष के उपायों को छोड़ किसी भी काम के लिए ये करें

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पिता, नाना व बहन के सम्मान से खराब ग्रह चाल भी हो जाएगी ठीक

आधुनिक युग और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के चलते लोगों को शार्ट कट की चाहत बढ़ी है। जीवन की भागम भाग में रिश्ते पीछे छूट रहे है और लोग ज्योतिषियों तांत्रिकों से शॉर्टकट उपाय पूछ रहे है। नोकरी, पद, प्रतिष्ठा, शादी व संतान पाने के लिए लोग क्या क्या नहीं कर रहे है।

डिप्रेशन से निकलने का रास्ता भी डॉक्टर से लेकर ज्योतिषियों तक को पूछा जा रहा है। कौनसा ग्रह खराब है किस ग्रह की दशा चल रही है, उसका क्या उपाय है,क्या पाठ पूजा है, सब करने को तैयार है और कर भी रहे है फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। घर में तनाव अलग से बढ़ रहा है।
ये सब क्यों हो रहा है? इसका मुख्य कारण क्या है? समाधान क्या है? ये सब आप जानना चाहते है समाधान चाहते है तो ईमानदारी से रमक झमक एस्ट्रो टिप्स अपनाइये और प्रभाव खुद महसूस कीजिये।

पिता के चरण स्पर्श करने से सूर्य की दशा खराब हो तो राहत मिलती है। अच्छी हो तो और अच्छी हो जाती है। सरकारी काम, सम्मान, ऊर्जा, पेट, सिर का कारक है। ज्योतिषीय दृष्टि से सब उपाय करके भी अगर आप पिता का सम्मान नहीं करते उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, आपकी किसी वजह से उनको कष्ट होता है, तो मानकर चलिए सब उपाय के बावजूद सूर्य सम्बन्धी पीड़ा ठीक नहीं होगी। इसलिये सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल दे, पिता का आशीर्वाद ले, हर रोज उनका मन जितने का प्रयास करें। अगर पिता आपसे खुश है, आप आशीर्वाद लेते है, काम में हाथ बंटाते है, पिता का नाम व सम्मान कैसे बढ़े ये प्रयास करते है तो सूर्य ग्रह कितना ही आपके लिये क्रूर हो, दशा खराब क्यों न हो, वो सब ठीक होकर आपको लाभ जरूर होगा ।

चंद्रमा खराब हो, उसके लिए माता के चरण स्पर्श करके आप अपने मन को बहुत अच्छा कर सकते हैं।

मंगल के लिए भाई से मित्रवत संबंध रखे।

बुध ग्रह के लिए बहन बुआ मौसी का सम्मान करे।

गुरु यानि बृहस्पति के लिए स्कूल शिक्षक, कुलगुरू, ब्राह्मण आध्यात्मिक गुरु से आशिर्वाद प्राप्त करते रहे।

शुक्र के लिए पत्नी को सदेव प्रसन्न रखने का प्रयास करें उत्सव त्योंहार पटरेडीमेड कपड़े दिलाने का प्रयास करें।
शनि के लिए सेवक, नोकरो से प्रेम का व्यवहार रखे तीज त्योंहार को उनको मिठाई खिलाए व गिफ्ट देवे।

राहु के लिए दादाजी और केतु के लिए नानाजी का सम्मान करना उनको अनकंडीशनल प्रेम करना उनकी आज्ञाओं का पालन करना उनको सुनना उनके साथ बैठना व उनके पैर दबाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार रिश्तों को अच्छे ढंग से निभाने से नवग्रह शांत होते हैं और अनुकूल होते हैं बिगड़े हुए काम बनने शुरू हो जाते है।

– प्रहलाद ओझा’भैरु’
लेखक:-‘शीघ्र फलदायक भैरव साधना व गृहस्थी सुख के सुगम उपाय’

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