सावा इतिहास

पुष्करणा सावे की रौनक परवान पर देखिये वीडियो

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पुष्करणा सावे की रौनक परवान पर चढ़ चुकी है जनेऊ, छींकि, मायरा और दिवाली धोकणा हर गली बटुक व बनडे नज़र आ रहे है.व महिलायें गीत गाती नज़र आ रही है. देखिये वीडियो

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यज्ञोपवीत व विवाह के पूजन व घर के सामान की तैयारी हेतु सामग्री

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यज्ञोपवीत व विवाह के पूजन व घर के सामान की तैयारी हेतु सामग्रीः-

हाथधान सामग्रीः-
कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली,लौग,ईलायची,नारीयल,जनेऊ जोड़ा,सफेद वस्त्र,दाल मोठ री पिस्योडी,आटे हल्दी रा फल,आटे री लडूंड़ी,आटे रो चुथो प्रशाद,लखदब,अटाल के लिये मेट,छाछ,लोहे की कड़ाई,कूँची यानि चाबी, गर्म पानी,सिक्का, बेलन,पुराना मावड़,छाजला 2,लौंकार,बन्ने का केशरिया कपड़ा,गेड़ियो,बटुओ,मूंग साबुत,सप्त धान,पालसिया,चांदी री अंगूठी, पाटा चौकी

मातृका स्थापनाः-
कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली,लौग,ईलायची,नारीयल,जनेऊ जोड़ा,लापसी,खाजा,मगद के लाडू, मूँझ,हांडी2,लाल लौकार,गोबर,लाल कपड़ा,लोहे के कील या खूंटी 2,रुई,घी,खिचड़ी सुखी,सकोरा 2, माचिस, अगरबत्ती,घण्टी,

गणेश परिक्रमा(छिंकी)ः

कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली 8 नग,लौग,ईलायची,नारीयल,जनेऊ जोड़ा,कच्चो दूध,झारी,हरी पत्ती की डाली,सिक्को,कुलड़ो,काजल डिब्बी,आटे हल्दी की चौमक,पुष्प माला 4,पुराना मावड़,कंसुबल कपड़े में लूण री पौटलि,लूणा पानी रो कुलड़ो,रुई,घी,माचिस

यज्ञोपवीतः-

कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली, पताशा,मिश्री,लौग,ईलायची,नारीयल,
जनेऊ जोड़ा 2 बड़ा,कच्चो दूध,दही,खांड-चीणी,पंच गव्य,घी,तैल,ईंट,सिन्दूर,मालिपाना,धूप दीप अगरबत्ती,इत्र,कपूर,आटे हल्दी के फल, शहद,सप्त धान,ऋतुफल,कुलडा,सकोरा,दीपक,पाटी,घोटो,खड़ाऊ,कमण्डल,गोथली,गंजी,गमछों,मृगछाल,मूँझ,लँगोट रो कपड़ो,ताँबाड़ी,समिधा,आसन,भस्मी,चन्दन,धोती,छिरपली,दशौषधी,सतावर,सरस्यो,पँचरत्नो,तिल,जव,लाल कपड़ो,सफेद कपड़ो,रेशमी कपड़ो,रुद्राक्ष कण्ठों,पीतल रो टोपियों,सोने री टुकड़ी, सोने री सलाख, चांदी री तिकड़ी,कांसी रो कटोरों,ताम्बे रो लोटो,पीतल रो लोटो,कोरा पान,कांसी री थाली,गायत्री मूर्ति या चित्र,तांबड़ो परात,खाजा,पुष्प माला, पाटो-चौकी,घण्टी, काशी गमन की दौड़,गेड़ियो व लौकार, लूणा पाणी रो कुलड़ो,

मायराः-
कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली,लौग,ईलायची,नारीयल,जनेऊ जोड़ा,आटे के फल,मिश्री,झारी, दूध,बटुक के नवीन वस्त्र,रीत परम्परा अनुसार सिक्के व बटुक के परिवार वालो के कपड़े

विवाह पूजन व घर की तैयारी हेतुः-(विवाह कार्यक्रम से पूर्व ही सुआ(जन्म) सूतक शौच(मरण) न लगे इसलिये वरणी बंधवा लेनी चाहिये )

लग्न पूजाः-
कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली,लौग,ईलायची,नारीयल2,जनेऊ जोड़ा,आटे के फल,मिश्री,काजल डिब्बी,खोले रो रुपयों,माला, लग्न पत्रिका व पानी का कलश
लगन से पहले कन्या के घर से भुवा व बहन -इंदौरी टिकी की रस्म अदा करे ।

हाथधानः-
(उपरोक्त यज्ञोपवीत के हाथधान की तरह ही लगभग सामग्री होगी) वर पक्ष बन्ने के लिये लोहे का गेड़िया व वधु पक्ष वाले बन्नी के लिये पँजिया शामिल करें ।

मातृका स्थापनाः-
(उपरोक्त यज्ञोपवीत में
मातृका स्थापना के लगभग वही तैयारी होगी, साथ में हांडी 2 की जगह 4,खूंटी 2 की जगह 4,सकोरा भी 4, व 2 तोरण होगा ।

दाल देनाः-
– मोठो री दाल 7 किलो,मिर्च लाल पिसियोड़ी 7 किलो, धोणा साबुत 1किलो, हल्दी,गुड़ भेली,नारियल,काली मिर्च,लौंग,जायफल,जावित्री,खोल भराई रुपया ।
कन्या के घर से एक तोरण व जवार- पालसिया भी साथ में ही ले जाते है ।

गणेश परिक्रमा(छिंकी)ः-
(गणेश परिक्रमा भी लगभग उसी तरह होगी । शादी में परिक्रमा वर /वधु के घर के आगे जाती है )

मायराः- (लगभग उसी तरह ही होता है,इसमें वधु पक्ष के यहां आने वाले मायरा में होने नानियाल से वर के लिये भी उसमें कपड़े आते है, बाकी अपनी रीत रिवाज के अनुसार समझे )

आटी व दूध :- मोली व सूत की आटी का गेंडा,लहंगा(हास्य विनोद) खोल,मिश्री,काजल,दूध सकोरा,जवार पालसिया,

खिरोड़ाः-

कुंकु,सुपारी 21,चावल,मोली,गुड़ डली,लौग,ईलायची,नारीयल2,जनेऊ जोड़ा,आटे के फल,मिश्री,काजल डिब्बी,पुष्प माला, झारी,हरी पत्तियां डाली,बीटली,कोकोण डोरो,बीन रा कपड़ा,पेचों,कच्चो दूध रो कलश,कन्या दान री अंगूठी,रोकडी रुपया,बड़ो जनेऊ जोड़ो वर वास्ता,बड़ बेलो,मिश्री रो कुन्जो,गुड़ भेली,बड़ पापड़ रीत अनुसार 7 या 9 बड़ पापड़ के हिसाब से उतने ही खेलरा फोफलिया, दाल,मूंग, नारियल, चीणी ,बड़ी व पापड़ आदि ।

अमझर पूजाः-

कुंकु,केशर,कपूर,कस्तूरी,पेवड़ी,तैल शीशी,मेहंदी,कंसुबल छैल छबिलो,पठा बींटी,फल घुघरा,कांग्सी,दमेदा,खोपरा 8,

घोड़ी पूजाः-
घोड़ी के तिलक व चने की दाल भीगी हुई सवा किलो,

पौखनाः-
वर को पौखने के लिये बंधा हुवा दही,चांदी का सिक्का,बेलन,बिलौने री डोरी,पायजेब-पॉयल, मिश्री,काजल डिब्बी,कुंकु,चावल,मौली,सरस्यो,कमर रो पट्टो, वर को खड़ा करने या घोड़ी से उतारने के लिये पाटा-चौकी

माया-हथलेवा -चवँरीः-

कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली,सिक्को, पताशा,मिश्री,लौग,ईलायची,नारीयल,पेड़ा,कोरा पान, जनेऊ जोड़ा 2 1, इत्र,पुष्प मालाएं,आटो,हल्दी,सप्त धान,दशौषधी,सत्तावर,सरस्यो,पंच रत्नों, सफेद कपड़ो,लाल कपड़ो,खूंटी 4,डवलियो,खाजा,मगद,ताँबाड़ी,सोने री टिकड़ी,रुई,माचिस,तांबे रो लोटो,सफेद धोती,गंजी,गमछो,टोपियों,कुलड़ो2, सकोरा 11,झारी,मूँझ,बे चवरी बर्तन, 4,घी,बीटली, पन्वरी,पाठो,समिधा,पाटा चौकी,कपूर,काँच,झुंझुनियों,कासी कटोरों,सफेद कागच,बेकलु मिट्टी,हरी पत्तियां,हथलेवे रो कपड़ो,धूप,हथलेवा छोडाई रकम रीत अनुसार व मेहंदी

बरीः-
कुंकु,सुपारी,चावल,मोली,गुड़ डली, पताशा,मिश्री,लौग,ईलायची,नारीयल,कोरा पान, जनेऊ जोड़ा,आटे का फल,गुड़ भेली,बरी रा कपड़ा,बरी रा आभूषण,फल घुघरा,पठा बीटी,फुलका 21,मूंग बाकला,मेहंदी सुखी,दमेदा,खोपरा,पंसारी पुडा,मोली गेंडा,तेल शीशी,कांच,कागसियो,काजल,मिढी हाथ रुपया नेक

गुड्डी जानः-
माता गवरजा, तम्बोलन,आल थाळ, स्याऊ, हींग बगार धुपियो.

 

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चित्रकारों ने सावे को उकेरा कैनवास पर, रोचक चित्रों द्वारा दिया आदर्शों को अपनाने का संदेश

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चित्रकारों ने सावे को उकेरा कैनवास पर
रोचक चित्रों द्वारा दिया आदर्शों को अपनाने का संदेश
बीकानेर। रमक झमक संस्थान की ओर से पुष्करणा ओलंपिक सावा 2019 की गतिविधियों में एक और नवाचार करते हुए सोमवार को बारह गुवाड़ चौक स्थित संस्थान​ कार्यालय में विवाह के​ आदर्शों का संदेश देने वाले बैनर का लोकार्पण समाज के गणमान्य जनों द्वारा किया गया। इस बैनर में विवाह समारोह में धन के अपव्यय को रोकने, बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने , स्वच्छता का ध्यान रखने और मूल रीति रिवाज को यथारूप में निभाने का संदेश काव्यात्मक पंक्तियों और रोचक चित्रों के द्वारा दिया गया है। रमक झमक संस्थान के प्रहलाद ओझा भैरूं की परिकल्पना को चित्रकार धर्मा ने बैनर पर आकर्षक रूप में उकेरा  है । उनके साथ ही कवि संजय आचार्य वरुण की  काव्य पंक्तियां सरल शब्दों में उपरोक्त आदर्शों को अपनाने का संदेश देती हैं। बैनर का लोकार्पण करते हुए उप शासन सचिव महेश व्यास ने कहा कि रमक झमक का यह नवाचार बेहद प्रभावी होने के साथ ही अत्यंत रुचिकर भी है । उन्होंने कहा कि समाज के लोग सामूहिक सावे में इन आदर्शों को अपनाते हुए विवाह संपन्न करें। बीकानेर की आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक पुजारी बाबा ने कहा कि यह ओलंपिक  सावा आदर्शों के साथ सादगी पूर्वक विवाह संपन्न कराने के लिए ही आरंभ किया गया था, रमक झमक उन सामाजिक मूल्यों के संरक्षण के लिए प्रयास करते हुए उत्कृष्ट कार्य कर रही है। उद्योगपति एवं समाजसेवी राजेश चूरा ने कहा कि कैनवास पर उकेरे गए चित्र मन मस्तिष्क पर गहरा असर डालते हैं । रमक झमक का यह प्रयास अपने आप में सार्थक है । नया शहर थाने के सीआई ईश्वर सिंह ने रमक झमक संस्थान के प्रयासों की सराहना की । समाजसेवी  रतना महाराज ने कहा कि सावा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, इसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखना हमारा दायित्व है। इस अवसर पर पार्षद नरेश जोशी, सुशील किराडू, अविनाश आचार्य, बीआर पुरोहित राधे ओझा, चित्रकार धर्मा, चित्रकार कैलाश और समाज के अनेक विशिष्ट जन उपस्थित  थे । लोकार्पित  बैनर में वैदिक रीति को अपनाने और दिखावे का त्याग करने का संदेश दिया गया है। गौरतलब है कि इस बैनर को मुख्य सावे के दिन सार्वजनिक स्थान पर लगाया जाएगा।
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रमक झमक ने खोला पुरस्कार का पिटारा

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वर वधु को यात्रा, समय पर शादी कर पहुँचने पर आदर्श दम्पती सम्मान व आदर्श बारात व बाराती को भी पुरस्कृत करेगा रमक झमक
पुष्करणा सावा में शादी करने वाले स्वजातीय पुष्करणा जो पौराणिक परम्परा का निर्वहन करते हुवे 21 फरवरी 2019 को शादी करने जाएंगे उनमें प्रथम रमक झमक की ओर से इस बार श्रीनाथजी की यात्रा पैकेज दिया जाएगा,तथा सम्नांन पत्र देकर समान्नित किया जाएगा । रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ ने बताया कि 21 फरवरी को गोधूलि मुहूर्त 5:47 से है अतः घर से रवाना होकर वधु के घर पहुँचने का समय को ध्यान में रखते हुवे इस बार शाम 4:30 के बाद जो विष्णु गणवेश में दूल्हा बारह गुवाड़ चौक स्थित रमक झमक के मंच के सामने सर्वप्रथम आएगा उसे श्रीनाथजी सपत्नीक यात्रा पैकेज दिया जाएगा ,जिसमें आने जाने सीट व 2 दिन 1 रात होटल बुक करवाना शामिल है । यात्रा शादी के 1 माह के बीच तक ही देय होगी,नगद राशि देय नहीं होगी । शादी के 5 दिन में सम्पर्क करने पर सीट बुक करवादी जाएगी । ओझा ने बताया कि अगर एक ही समय में व एक साथ दो दूल्हे पहुँचने पर दोनों को यात्रा दी जाएगी अन्यथा एक को ही देय होगी ।
 आदर्श दम्पती सम्मान होटल में डीनर
विष्णुरूप में व गोधूलि लग्न में विवाह करके  सबसे पहले   रमक झमक कार्यालय मंच के आगे से गुजरने वाले वर- वधु को आदर्श दम्पती सम्मान व  होटल अम्बरवाला में डीनर के रूप में 2 स्पेशियल थाली दी जाएगी ।
आदर्श बारात का व बाराती को गिफ्ट
सावा में जिस बारात में सादगी होगी,शंखनाद होगी या साफा पाग वाले बाराती अधिक होंगे उस बारात को ‘रमक झमक आदर्श बारात’ सम्मान नवाजा जाएगा,सम्मान उस बारात के मुखिया या बुजुर्ग को दिया जाएगा,इसके अलावा किसी बारात में सम्पूर्ण लोक सस्कृति का पालन करने वाला बाराती  (चाहे पुरुष हो या औरत ) दिखेगा उसका भी अभिनन्दन किया जायेगा ।
सभी का स्वागत
इसके अलावा भी रमक झमक कार्यालय के  आगे से गोधूलि लग्न तक निकलने वाले सभी दूल्हों का ओपरणा पहनाकर स्वागत किया जाएगा ।
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पुष्करणा सावा 1961 से लेकर 2019 तक की सभी तारीखे जानिये

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पुष्करणा सावा 1961 से लेकर 2019 तक की सभी तारीखे जानिये.

पुष्करणा सावा 1961 से लेकर 2019 तक की सभी तारीखे तिथि और संवत से पुष्करणा सावा।

 

 

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सावा पर हुई चर्चा, बैंक ने 245 परिवारों को 49 लाख की दी गड्डियां रमक झमक

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सावा पर हुई चर्चा, बैंक ने 245 परिवारों को 49 लाख की दी गड्डियां रमक झमक
रमक झमक कार्यालय में एसबीआई अम्बेडकर सर्किल ब्रांच की ओर विवाह व यगोपवित  के कुल 245 परिवारों को नए नोटों की गड्डियां उपलब्ध कराई गई  । बैंक द्वारा करीब 49 लाख रुपये के नए नोटों की गड्डियां उपलब्ध करवाई । बैंक की ओर से हेड केशियर अरुण आचार्य व ओम प्रकाश ने सेवाएं दी तथा बाहरी व्यवस्था में नया शहर थाना का सहयोग रहा ।
सावा को सफल बनाने को लेकर चर्चा
सावा की समस्त व्यवस्थाओं,सहयोगी संस्थाओ को लेकर रमक झमक सावा के मंच पर समाज के लोगों की खुली चर्चा हुई । चर्चा में हेमन्त किराडू,श्रीनारायण आचार्य,हुकमचन्द ओझा,पागा महाराज,दिलीप रँगा,गिराज देराश्री,ओंकारनाथ हर्ष, मुरली नारायण ओझा,गोपाल हर्ष,आर के सुरदासानी,रतना महाराज व प्रो.सोम नारायण पुरोहित ने विचार रखे शिवराज छंगाणी के सानिध्य में सावा और अधिक सुंदर कैसे हो इस पर विचार विमर्श हुवा । रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ने सबको एक जुट रहकर सावा सफल बनाने पर जोर दिया ।
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साफा खिड़किया पाग बाँधी जाती है इसका कारण क्या है

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