बीकानेर एक्टिविटी

भारत एकमात्र गणेश मंदिर जो राजस्थान के बीकानेर में है

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भारतवर्ष में कई ऐसे प्राचीनतम मंदिर अनोखे मंदिर है जो अपनी एक अलग विशेषताओं के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखते है ऐसे ही एक मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में है जहां भक्त गणेश भगवान के निज मंदिर में प्रवेश कर उनके कानों में अपनी मनोकामना बोलते है और उनकी इच्छा पूरी भी होती है इस गणेश जी मंदिर का नाम है कान गणेश जी मंदिर कई लोग इसे कान वाले गणेश जी भी कहते है। यह मंदिर राजस्थान बीकानेर जिले के अन्त्योदय नगर में स्थित है। आप नीचे दिए गए वीडियो में मंदिर के बारे में बताई गई पूरी जानकारी को देखें..

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Kan wale ganesh ji

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हैरिटेज सिटी बीकानेर की गलियों से नाचते हुए निकले सैलानी

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बीकानेर में नज़र आयी पुरे राजस्थान की संस्कृति Camel Festival 2020

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बीकानेर में नज़र आयी पुरे राजस्थान की संस्कृति

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बीकानेर शहर के 100 वर्ष पुराने धूणे, संस्कृति बचाये रखे है हमारे धूणे

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बीकानेर की धूणा संस्कृति
बीकनेर शहर के अलग अलग चौक में स्थाई रूप से धूणे बनाये गए है जो सर्दी में ना सिर्फ चर्चा करने स्थान है बल्कि यही से जीव जंतुओं की सेवा का कार्य भी होता है। अलाव तपने के साथ साथ बीकानेर शहर के लोग यहाँ गाय, गोधो, कुतो की देख रेख करते है। जानिये पूरी डिटेल में हर चौक के धूणे के बारे में वीडियो में

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सूर्यग्रहण क्यों होता है पौराणिक कथा जानिए, सम्पूर्ण जानकारी

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ग्रहण का पौराणिक महत्‍व, सूर्यग्रहण सूतक काल, क्या करें क्या नहीं, क्या होता है सूर्यग्रहण

ग्रहण का पौराणिक महत्‍व

पौराणिक कथानुसार समुद्र मंथन के दौरान जब देवों और दानवों के साथ अमृत पान के लिए विवाद हुआ तो इसको सुलझाने के लिए मोहनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। जब भगवान विष्णु ने देवताओं और असुरों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान कर लिया। देवों की लाइन में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने राहू को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहू का सर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन राहू ने अमृत पान किया हुआ था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सर वाला भाग राहू और धड़ वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी कारण राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल

सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले 25 दिसंबर को शाम 5 बजकर 32 मिनट से लगेगा और ग्रहण खत्म होने पर समाप्त होगा। सूतक काल को किसी शुभ कार्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।  बताया जा रहा है कि आंशिक सूर्य ग्रहण सुबह 8.04 मिनट से शुरू होगा। सूर्य ग्रहण सुबह  9.24 से चंद्रमा सूर्य के किनारे को ढकना शुरू कर देगा। इसके बाद सुबह 9.26  तक पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। 11.05 तक यह सूर्य ग्रहण समाप्त हो जाएगा। कुल मिलाकर 3.12 मिनट का यह सूर्य ग्रहण होगा।

क्या होता है सूर्य ग्रहण?

हम इस बारे में अक्सर बात करते हैं कि अला दिन सूर्य ग्रहण होगा या फला दिन होगा। लेकिन क्या आप जानते है कि सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं? असल में सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आ जाने की खगोलिया स्थिति से जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंच पाता है, तो इस स्थिति को ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

क्या करें क्या नहीं

ग्रहण काल में खान-पान, शोर, शुभ कार्य, पूजा-पाठ आदि करना निषेध होता है. गुरु मंत्र  का जाप, किसी मंत्र की सिद्धी, रामायण, सूंदर कांड का पाठ, तंत्र सिद्धि ग्रहण काल में कर सकते हैं. ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान, शुद्धिकरण करके दान देना चाहिए. इस समय में गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नही निकलना चाहिए. ग्रहण काल में सूर्य से पराबैंगनी किरणे निकलती हैं, जो गर्भस्थ शिशु के लिए हानिकारक होती हैं।

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Ent hospital bikaner जरूरतमंदो के लिए चल रहा निशुल्क लंगर

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श्री गुरु हरकृष्ण जी वेलफ़ेयर सुसाईटी गांव कोरेयाना जिला बठिंडा की टीम के द्वारा बीकानेर में पिछले 6 साल से लगातार PBM हॉस्पिटल के मरीजों के लिए निशुल्क लंगर की व्यवस्था की जा रही है। इस साल भी पूरी टीम के द्वारा यह लंगर ENT हॉस्पिटल के पीछे वीरां सेवा सदन के पास में लगाया गया है। जहाँ पर किसी भी धर्म समाज के लोगो को लंगर निशुल्क में खिलाया जा रहा है। जैसा कि पूरा संसार जानता है कि सिख एक ऐसी कॉम है जिनके पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने बाल अवस्था में अपने घर से मिले 20 रुपये जो कि बाजार से सामान लाने को उनके घरवालो द्वारा दिये गए थे का उन्होंने लंगर लगाकर भूखे सादु संतो को भोजन करवाया था। गुरु नानक देव जी के द्वारा लगाए गए वो 20 रुपये का लंगर आज तक उसी तरह से चल रहा है। संसार में जब भी कही पर कोई आपदा आती है। तो सबसे पहले सिख ही आगे आकर वहाँ जरूरतमंदों के लिए निशुल्क लंगर की व्यवस्था करते आये है और कर रहे है। यह एक ऐसी कोम है जो कि निसवार्थ समाज के हर वर्ग की सेवा करने को हर समय तैयार रहती है।
इस सुसाईटी का मुख्य उद्देश्य है कि जो भी जरूरतमंद हो जो बीकानेर में सरकारी हस्पताल में इलाज करवाने के लिए आया हो उसके लिए खाने का इंतजाम करना है। जिस से मरीज अथवा उसके साथ आये सगे संबंधियों को कोई भी परेशानी न उठानी पड़ी। साथ ही इस सुसाईटी के कार्यकर्ताओं द्वारा अगर जरूरत पड़े तो खूनदान करके भी आये हुए मरीजो की मदद की जाती है।
प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक तथा शाम को 6 से 8 बजे तक भोजन की व्यवस्था तथा दिनभर चाय की व्यवस्था मरीजो तथा उनके साथ आये हुए संबंधियों के लिए की जाती है।

(जानकारी – मनदीप सिंह जी द्वारा उपलब्ध करवाई गई)

इनके कार्य की पूरी जानकारी रमक झमक के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। वीडियो में इनके कॉन्टैक्ट नंबर भी उपलब्ध करवाएं गए है जिस पर आप संपर्क कर किसी तरह का सहयोग करना चाहे तो कर सकते है।
हमारे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आप बीकानेर में चल रहे सेवा कार्यों के बारे में उनकी संस्था के बारे में जान सकते है साथ ही संस्कृति से जुड़े वीडियो भी देख सकते है। चैनल को सब्सक्राइब कर आप हमसे जुड़े रह सकते है व आपको भी ऐसी संस्था या कार्यों की जानकारी है तो हमसे संपर्क कर सकते है। धन्यवाद्

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धर्मनगरी बीकानेर के कोलायत में साधुओं का सबसे बड़ा मेला – विशेष

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बीकानेर में कई विश्व विख्यात मंदिर है यह शहर धर्मनगरी के साथ साथ मेलों का शहर भी कहलाता है। बीकानेर के कोलायत से प्रयागराज, हरिद्वार, पुष्कर की तुलना की जाती है। यहाँ का कोलायत मेला अद्भुत है कुम्भ की तरह ही यहाँ हज़ारों साधू संत कपिल सरोवर में स्नान करने आते है कोलायत की यह झील पश्चिमी राजस्थान की सबसे पवित्र झील कहलाती है।
देखिये इस वीडियो में। …. यूट्यूब चैनल पर जाकर हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूले

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