ज्योतिष / वास्तु

आधुनिक ज्योतिष के उपायों को छोड़ किसी भी काम के लिए ये करें

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पिता, नाना व बहन के सम्मान से खराब ग्रह चाल भी हो जाएगी ठीक

आधुनिक युग और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के चलते लोगों को शार्ट कट की चाहत बढ़ी है। जीवन की भागम भाग में रिश्ते पीछे छूट रहे है और लोग ज्योतिषियों तांत्रिकों से शॉर्टकट उपाय पूछ रहे है। नोकरी, पद, प्रतिष्ठा, शादी व संतान पाने के लिए लोग क्या क्या नहीं कर रहे है।

डिप्रेशन से निकलने का रास्ता भी डॉक्टर से लेकर ज्योतिषियों तक को पूछा जा रहा है। कौनसा ग्रह खराब है किस ग्रह की दशा चल रही है, उसका क्या उपाय है,क्या पाठ पूजा है, सब करने को तैयार है और कर भी रहे है फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। घर में तनाव अलग से बढ़ रहा है।
ये सब क्यों हो रहा है? इसका मुख्य कारण क्या है? समाधान क्या है? ये सब आप जानना चाहते है समाधान चाहते है तो ईमानदारी से रमक झमक एस्ट्रो टिप्स अपनाइये और प्रभाव खुद महसूस कीजिये।

पिता के चरण स्पर्श करने से सूर्य की दशा खराब हो तो राहत मिलती है। अच्छी हो तो और अच्छी हो जाती है। सरकारी काम, सम्मान, ऊर्जा, पेट, सिर का कारक है। ज्योतिषीय दृष्टि से सब उपाय करके भी अगर आप पिता का सम्मान नहीं करते उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, आपकी किसी वजह से उनको कष्ट होता है, तो मानकर चलिए सब उपाय के बावजूद सूर्य सम्बन्धी पीड़ा ठीक नहीं होगी। इसलिये सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल दे, पिता का आशीर्वाद ले, हर रोज उनका मन जितने का प्रयास करें। अगर पिता आपसे खुश है, आप आशीर्वाद लेते है, काम में हाथ बंटाते है, पिता का नाम व सम्मान कैसे बढ़े ये प्रयास करते है तो सूर्य ग्रह कितना ही आपके लिये क्रूर हो, दशा खराब क्यों न हो, वो सब ठीक होकर आपको लाभ जरूर होगा ।

चंद्रमा खराब हो, उसके लिए माता के चरण स्पर्श करके आप अपने मन को बहुत अच्छा कर सकते हैं।

मंगल के लिए भाई से मित्रवत संबंध रखे।

बुध ग्रह के लिए बहन बुआ मौसी का सम्मान करे।

गुरु यानि बृहस्पति के लिए स्कूल शिक्षक, कुलगुरू, ब्राह्मण आध्यात्मिक गुरु से आशिर्वाद प्राप्त करते रहे।

शुक्र के लिए पत्नी को सदेव प्रसन्न रखने का प्रयास करें उत्सव त्योंहार पटरेडीमेड कपड़े दिलाने का प्रयास करें।
शनि के लिए सेवक, नोकरो से प्रेम का व्यवहार रखे तीज त्योंहार को उनको मिठाई खिलाए व गिफ्ट देवे।

राहु के लिए दादाजी और केतु के लिए नानाजी का सम्मान करना उनको अनकंडीशनल प्रेम करना उनकी आज्ञाओं का पालन करना उनको सुनना उनके साथ बैठना व उनके पैर दबाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार रिश्तों को अच्छे ढंग से निभाने से नवग्रह शांत होते हैं और अनुकूल होते हैं बिगड़े हुए काम बनने शुरू हो जाते है।

– प्रहलाद ओझा’भैरु’
लेखक:-‘शीघ्र फलदायक भैरव साधना व गृहस्थी सुख के सुगम उपाय’

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अक्षय तृतीया नौकरी, शादी व सन्तान के लिये विशेष

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अक्षय तृतीया पर नौकरी, शादी व सन्तान के लिये करें उपाय:-

अक्षय तृतीया सर्वश्रेष्ठ, अबूझ व शुद्ध मुहूर्त है इस दिन किया कार्य अक्षय फल देने वाला देने वाला होता है। जीवन की आपाधापी और भगाम भाग के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वो कम समय मे ऐसा क्या करें जिससे उसकी कामना पूर्ण हो। साल में ऐसे बहुत कम योग बनते है जब कम समय ही कुछ उपाय करने से शीघ्र फल प्राप्त हो सकते है। जिसमें अक्षय तृतीया महत्वपूर्ण दिन है।यह दिन अक्षय फल देने वाला होता है इसलिये ऐसा क्या करें व क्या न करें कि सात्विक कामना पूर्ण हो।


घर में प्रेम व समृद्धि के लिये ये करें:-

अक्षय तृतीया के दिन सभी लोग साथ बैठकर व जमीन पर बैठकर भोजन करें इससे परिवार में प्रेम अक्षय होता है। परिवार के सभी छोटे बड़ो के चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद प्राप्त करें ये आशीर्वाद अखण्ड रहता है ।
नए आभूषण या बर्तन खरीदे व आज के दिन घर में मिष्ठान जरूर बनाए व किसी अतिथि,गरीब व बहन/भुआ को भी भोजन कराएं । ऐसा करने से घर मे धनधान्य अक्षय रहता है व प्रेम अखण्ड रहता है ।

नोकरी, प्रमोशन व स्थानांतरण:-

इसके लिये अक्षय तृतीया को शुभ लग्न, शुभ चौघड़िया या शुभ होरा देख कर भगवान भगवान विष्णु व लक्ष्मी के चित्र पर मोगरे की माला चढाए,दूध की मिठाई चढाए व इत्र लगाए तथा भगवान गणपति की एक माला जाप के बाद श्रीं श्रियै नमः की दिन भर में 5 माला जाप करें व आगामी माह जेष्ठ शुक्ल की तृतीया तक प्रतिदिन 5 बढ़ाते हुवे माला जाप करें। यानी आगामी 30 वे दिन बढ़ते बढ़ते उस दिन 30×5=150 या 31×5=155 माला करनी पड़ेगी । सिर्फ अगरबती कर ये माला दिन में कभी भी करलें । भगवान गणपति व विष्णु को नमन कर ही माला शुरू करें व अंत में प्रार्थना जरूर करें । जो ये एक माह करने में असमर्थ है वे अक्षय तृतीया को 31 माला जाप करलें व खीर का भोग लगाएं ।

सन्तान हेतु:- आज के दिन भगवान लड्डू गोपाल घर लाए स्नान पूजा अर्चना करें व मक्खन मिश्री व तुलसी चढाए। सन्तान गोपाल स्तोत्र व मन्त्र की 1 माला करें व प्रतिदिन एक बढ़ाए ऐसा एक माह करें । पति पत्नी अपना सँयुक्त व हँसमुख फोटो बेड रूम में लगाएं।

शादी हेतु:-
स्नान आदि कर भगवान विष्णु को केशर का तिलक करें व दूध केशर की मिठाई चढ़ाए। पीला धागा कलाई पर बांधे। ॐ गुरवे नमः की 3 माला एक माह तक करें। गुरुवार व अमावस्या को साबुन कटिंग सेविंग न करें।

प्रहलाद ओझा ‘भैरु’

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अटके और बिगड़े काम बनाए हनुमान जी को इस तरह मनाए

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हनुमानजी को क्या चढ़ाए
जिससे रुके काम बने।

अगर आपकी कुंडली मे मंगल या शनि अशुभ फल देने वाले है या उनकी दशा चल रही है जो अच्छी नहीं है,मंगल के कारण या भाइयो से अनबन है,कर्ज अधिक हो गया है या मंगल या शनि से मांगलिक दोष कुंडली मे बताया गया है,शनि या मंगल के कारण काम मे रुकावट आ रही है,आप मांगलिक है और विवाह में बाधा आ रही है या विवाह बाद भी मांगलिक की वजह से घर मे किच किच रहती है,झगड़ा होता है । बार-बार चोट दुर्घटना होती है । किसी के ऊपर प्रेत बाधा है । शरीर मे एनर्जी की कम आ रही है ।मकान जमीन को लेकर परेशानी है,जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा है ।ऐसा किसी भी ज्योतिषी या पण्डित ने कहा हो कि मंगल या शनि के कारण या शनि की साढ़े साती या ढैया के कारण प्रॉब्लम है,तो चिंता न करें। रमक झमक बता रहा है कि इस हनुमान जयंती को खाश क्या करें उपाय जिससे हो समस्या का तुरंत समाधान।
हनुमान बाबा एक मात्र देव है जिनको मनाने से शनि व मंगल दोनो प्रसन्न हो सकते है।
(1) जमीन,मकान,प्लाट व मुकुदमा सम्बन्धी समस्या निदान के लिये ये करें:
तुलसी पर राम लिख के कम से कम 21 पत्तो की माला पहनाए,लेकिन माला ह्रदय तक ही रहे नीचे न आए तथा गिरे नही। पंधारी लडू या चूरमा चढाए। तिली तेल का दीपक करें।
ये चौपाई 108 बार तथा हनुमान चालीसा 7 बार जन्मोत्सव से शुरू कर 108 दिन लगातार या कम से कम 21 दिन अवश्य करें ।
पवन तनय बल पवन समाना,
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना ।
कोवनसो काम कठिन जग माही,
जो नहीं होई तात तुम्ह पाई ।।

(2) शनि साढ़े साती,ढैया या कुंडली मे शनि जनित समस्या हो, घुटनो सम्बन्धी परेशानी हो तो ये करें:-
तेल सिंदूर लगाकर चोला चढाए,शाम को दीप माला करें,इमरती व लडडू चढाए ।
श्रीराम की 1 माला जाप करें,1 माल हनुमते नमः व 1 माला
संकट कटे मिटे सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमतबल बीरा ।

चौपाई का जाप करें ।

(3) व्याधि-रोग होने पर उसके नाश के लिये निरन्तर हनुमानजी के समक्ष ये चौपाई बोले प्रार्थना करें। पास में रखा जल बाद में रोगी को पिलाए । दवाई भी ये चौपाई बोलकर लेवे। गायों को गुड़ रोटी देवे।

नाशे रोग हरे सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत वीरा ।।

(4) आकस्मिक घटनाक्रम या दुर्घटनाओं की रोक के लिये ये चौपाई बोलकर फिर घर के सभी लोग मिलकर 108 हनुमान चालीसा पढ़े। रोजाना हनुमानजी को माला प्रशाद चढाए। हनुमानजी को पान चढाए।

दैहिक दैविक भौतिक तापा
राम राज नहीं काहुहि ब्यापा ।

पाठ/माला पूर्ण होने पर बड़ो को प्रणाम व गौ सेवा करें । कार्य सिद्ध होने पर हनुमानजी का विशेष पूजन श्रंगार कर प्रशाद चढाए तथा गायों को गुड़/हरा चारा जरूर डाले ।प्रहलाद ओझा ‘भैरु’

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हनुमान जी के चरित्र से सीखे सफल भविष्य और हर समस्या का समाधान

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हनुमानजी से सीखे सफल कैरियर के गुण
(हनुमान जयन्ति विशेष)
(रमक झमक)
हनुमान जी का किरदार लोगों को बहुत कुछ सीखाता है, हर रूप में लोगों के लिए प्रेरणादायक है। हनुमान जी के बारे में तुलसीदास लिखते हैं, ‘संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बल बीरा’। यानी हनुमान जी में हर तरह के कष्ट (समस्या)को दूर करने की क्षमता है। आज हम आपको बता रहे हैं हनुमान जी के कुछ खास गुण, इन्हें अपनाकर अपनी परेशानियां दूर कर सकते हैं। आपके प्रोफेशनल जीवन में भी ये गुण काफी काम आएंगे:-

संवाद कौशलता

सीता जी से हनुमान पहली बार रावण की ‘अशोक वाटिका’ में मिले, इस कारण सीता उन्हें नहीं पहचानती थीं। एक वानर से श्रीराम का समाचार सुन वह आशंकित भी हुईं, परन्तु हनुमान जी ने अपने ‘संवाद कौशलता’ से उन्हें यह भरोसा दिला दिया की वह राम के ही दूत हैं। सुंदरकांड में इस प्रसंग को इस तरह व्यक्त किया गया हैः
‘कपि के वचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास।
जाना मन क्रम बचन यह, कृपासिंधु कर दास।।

समझ व चतुराई से हराना

हनुमान जी ने समुद्र पार करते समय सुरसा से लड़ने में समय नहीं गंवाया। सुरसा हनुमान जी को खाना चाहती थी। उस समय हनुमान जी ने अपनी समझ व चतुराई से पहले अपने शरीर का आकार बढ़ाया और अचानक छोटा रूप कर लिया। छोटा रूप करने के बाद हनुमान जी सुरसा के मुंह में प्रवेश करके वापस बाहर आ गए। हनुमान जी की इस चतुराई से सुरसा प्रसन्न हो गई और रास्ता छोड़ दिया। चतुराई की यह कला हम हनुमान जी से सीख सकते है ।

आदर्शों से कोई समझौता नहीं

लंका में रावण में हनुमान जी और मेघनाथ के मध्य हुए युद्ध में मेघनाथ ने ‘ब्रह्मास्त्र’ का प्रयोग किया। हनुमान जी चाहते, तो वह इसका तोड़ निकाल सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वह ब्रह्मास्त्र का महत्व कम नहीं करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ब्रह्मास्त्र का तीव्र आघात सह लिया। हालांकि, यह प्राणघातक भी हो सकता था। तुलसीदास जी ने इस पर हनुमानजी की मानसिकता का सूक्ष्म चित्रण किया हैः-

ब्रह्मा अस्त्र तेंहि साधा, कपि मन कीन्ह विचार।
जौ न ब्रहासर मानऊं, महिमा मिटाई अपार।।

अनावश्यक शक्ति व ज्ञान का बखान न करना ।
हम अक्सर अपनी शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन करते रहते हैं, कई बार तो वहां भी जहां उसकी आवश्यकता भी नहीं होती। हनुमान चालीसा में लिखा है-

सूक्ष्म रूप धरी सियंहि दिखावा,
विकट रूप धरी लंक जरावा।’

सीता के सामने उन्होंने खुद को लघु रूप में रखा, क्योंकि यहां वह पुत्र की भूमिका में थे, परन्तु संहारक के रूप में वह राक्षसों के लिए काल बन गए। एक ही स्थान पर अपनी शक्ति का दो अलग-अलग तरीके से प्रयोग करना हनुमान जी से सीखा जा सकता है ।

समस्या नहीं समाधान कैसे हो ये सोचे

जिस समय लक्ष्मण रण भूमि में मूर्छित हो गए, उनके प्राणों की रक्षा के लिए हनुमान जी पूरा पहाड़ उठा लाए, क्योंकि वह संजीवनी बूटी नहीं पहचानते थे। हनुमान जी यहां हमें सिखाते हैं कि मनुष्य को शंका स्वरूप नहीं, वरन समाधान स्वरूप होना चाहिए।उन्होंने सिर्फ इतना सोचा कि इस पहाड़ में संजीवनी है बस,इससे समाधान हो जाएगा समस्या का चाहे पहाड़ जैसी हो समाधान उसमें ढूढने से मिल जाता है ।


बड़ो को श्रेय देना, अपनी बड़ाई खुद न करना ।

सीता जी का समाचार लेकर सकुशल वापस पहुंचे श्री हनुमान की हर तरफ प्रशंसा हुई, लेकिन उन्होंने अपने पराक्रम का कोई किस्सा प्रभु राम को नहीं सुनाया। यह हनुमान जी का बड़प्पन था,जिसमे वह अपने बल का सारा श्रेय प्रभु राम के आशीर्वाद को दे रहे थे। प्रभु श्रीराम के लंका यात्रा वृत्तांत पूछने पर हनुमान जी जो कहा उससे भगवान राम भी हनुमान जी के आत्ममुग्धताविहीन व्यक्तित्व के कायल हो गए।


नेतृत्व क्षमता

समुद्र में पुल बनाते वक़्त अपेक्षित कमजोर और उच्चश्रृंखल वानर सेना से भी कार्य निकलवाना उनकी विशिष्ठ संगठनात्मक योग्यता का परिचायक है। राम-रावण युद्ध के समय उन्होंने पूरी वानरसेना का नेतृत्व संचालन प्रखरता से किया।

संयमित जीवन

हनुमान जी एक आदर्श ब्रह्मचारी थे। उनके ब्रह्मचर्य के समक्ष कामदेव भी नतमस्तक थे। श्री हनुमान के व्यक्तित्व का यह आयाम हमें ज्ञान के प्रति संयमित जीवन व समर्पण’ की शिक्षा देता है। इसी के आधार पर हनुमान जी ने अष्ट सिद्धियों और सभी नौ निधियों की प्राप्ति की।

ईश्वर आदर्श में विश्वास

हनुमानजी ने पूरे रामचरितमानस मानस एक संदेश दिया अपने आदर्श के प्रति हर स्थिति में वफादार बने, भगवान राम के प्रति हर स्थिति में उनका समर्पण व वफादारी देखने को मिली है।
(रमक झमक)

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बारहमास गणगौर व्रत की सम्पूर्ण विधि व इसके फल

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बारहमास गणगौर व्रत व सम्पूर्ण विधि, क्या फल मिलता है इसको करने से जानिए

बारहमासी गणगौर के संबंध में :-
यह व्रत चैत्र सुदी रामनवमी के दिन शुरू होता है। यह सुहागन औरतें ही करती है। अखंड सुहाग,मंगल कामना,वंश वृद्धि, सद्बुद्धि व मोक्ष के लिए व्रत किया जाता है। एक कहानी के अनुसार इस व्रत को सर्वप्रथम राजा युधिष्ठिर व द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से आज्ञा प्राप्त करके किया। जिससे मोक्ष प्राप्त हुआ। रामनवमी से एकादशी तक यह किया जाता है। बारहमासा गवर की पूजा विधवा स्त्री भी कर सकती है विधवाओं को भी इस व्रत उपवास के दिन दंत धावन स्नानादि करके शुद्ध वस्त्र पहन कर केवल केशर आदि की बिंदी लगाकर गौरी व्रत नियम पूर्वक करना चाहिए। संकल्प करना चाहिए। इसे करने से उन्हें आगे जन्म जन्मांतर तक वैधव्य नहीं होता।

व्रत का नियम,क्या खाएं,क्या चढ़ाए किसकी पूजा करें :-

चैत्र रामनवमीं से शुरू करें । चेत्र में पद देना चाहिये।
वैशाख में पीपल पूजन करना चाहिये व चप्पल दान देना चाहिये।

जेष्ठ माह में बड़ की पूजा करना व मांग कर पानी पीना,मटकी गिलास,लोटा गलना व टंकी भर पानी देना चाहिए।
आषाढ़ में जमीन पर सोना,सेज,चटाई, तकिया चद्दर पंखी, चप्पल,थाली व मिठाई देना चाहिए ।
श्रावण में हरी सब्जी ना खाना, हरी सब्जी दान देना ।भाद्रपद में दही न खाना, दही दान देना ।
अश्विन माह में खीर नहीं खाना बल्कि खीर दान करना चाहिए।
कार्तिक में तुलसी की पूजा करना, घी नहीं खाना । दीपक, रुई व माचिस दान देना चाहिए।
मार्गशीर्ष में मुंग नहीं खाना, मूंग दान देना ।
पोष माह में नमक नहीं खाना, नमक व खाण्ड दान देना । माघ माह में कोरे घड़े के पानी से स्नान करना, सूर्य दर्शन कर बाहर निकलना चाहिए तथा दो वस्त्र पहनना, वस्त्र दान करना, सीधा दान देना चाहिए।
फाल्गुन माह में ठाकुर जी को गुलाब खेलाना, मंदिर में गुलाब दान देने का महत्व है।
चैत्र महीने में गवर पूजना। अमावस्या के दिन दीवार पर गवर मांड कर पूजा करनी । चैत्र सुदी बारस के दिन वस्त्र आभूषण सहित गवर किसी को पूजाना । जयंती व्रत हमेशा निकोट या फलाहार से करना उचित । सुआ, सूतक,नखत, प्रतिष्ठा व तुलादान का भोजन नहीं खाना। चैत्र माह में 16 सुहागिनों को भोजन करवाकर वस्त्र भेट करना चाहिये ।

एकम से लगातार 16 तिथियों को क्रमशः निम्न चीजें व्रत के समय वर्जित बताई गई है:-कुम्डा,कटेरिका फल,लवण,तिल,खटाई,तेल,आंवला,नारीयल,काशीफल,परवल,निष्पाव,मसूर,बैंगन,शहद,जुआ व स्त्री प्रसंग ।

पद दान की वस्तु:- आसन,गौमुखी,रुद्राक्ष या तुलसी की माला,स्वर्ण की अंगूठी,कमंडल या लोटा,मिठाई,थाली,कटोरी,वस्त्र उपवस्त्र,यज्ञोपवीत,सुपारी दक्षिणा,छत्र/छाता व पगरखी
कुल 13

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मां का छठा रूप कात्यायनी की पूजा से दूर होती है विवाह संबंधी अड़चन

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मां का छ्ठा रूप है कात्यायनी
महिलाओं पर करती है विशेष कृपा

अगर आप शादी के लिए अच्छा लड़का ढूढ़ रहे है लेकिन अबतक नहीं मिला या रिश्ते कई आते है किन्तु तय नहीं हो पाता…रिश्ता तय होते होते बीच में ही कोई नई समस्या आ जाती है या आप बहुत बड़ी हो चुकी है, मांगलिक दोष है.. शनि प्रभावित है .. या फिर किसी पडित जी ने कह दिया की आपकी कुंडली में ग्रहस्थ सुख की कमी है.. या आपकी शादी होकर टूट गई आप दुबारा शादी करना चाहते है और ये चिंता है की दुबारा ऐसा न हो जाये ? अगर आप बहुत से उपाय खुद कर चुके है या फिर आपके माता-पिता करवा चुके फिर भी कोई फायदा नहीं हुवा, किसी ने कहा व्रत करो, किसी ने कहा दान करो, किसी ने कहा पाठ करो, किसी ने कहा अनुष्ठान कराओ, किसी ने कहा ये रत्न पहनो, किसी ने कहा ये जन्तर पहनो, किसी ने कहा ये करो किसी ने कहा वो करो और आप सब कुछ करके थक चुके है । ऐसा भी हो की आपने अबतक इन चक्करों में काफी पैसा धन देकर अपने आप को ठगा चुके है और अब आपका विश्वाश भी ख़त्म होता जा रहा है तो अब करे ये उपाय और रखे विश्वास । इस बार आपकी इच्छा होगी पूरी, न केवल जल्दी होगी शादी,मिलेगा अच्छा जीवन साथी भी ।

माता कात्यायनी की पूजा करे

नवरात्रा के प्रथम दिन से शादी के योग्य लड़कियां ये स्वयं करे या माता पिता अपनी बेटी से ये करावे । नहा धोकर शुद्ध होकर नए कपडे पहने जो अपनी कुंडली के सप्तम हॉउस यानि पति घर के मालिक ग्रह के अनुसार रंग वाला हो साथ में पिला कपडा जरुर हो सिर पे चुनरी होना जरुरी है । तत्पश्चात सामान्य पूजा की तयारी करे और माता कात्यायनी की पूजा करे जिसमे गुलाब फुल,केशर,गुलाब जल,गुलकंद, मिश्री, चुनरी, सुहाग की यथा सामर्थ्य सामग्री, धुप, दीप, श्रीफल जरुर हो । ये सामग्री लेकर माता का सर्वप्रथम ध्यान कर फिर पूजन करे ।

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

खासकर ये मन्त्र नवरात्रा में कम से कम १०८ बार प्रतिदिन करे —(श्रीमदभागवत पुराण में आया है की कृष्ण जैसा जिसको पति चाहिए वो ये करे ) और श्री कृष्ण प्यार और प्रेम के प्रतीक और १६ कलावो से परिपूर्ण है ।

ॐ कात्यायनी महामाये महा योगिन्य धिश्वरी
नन्द गोपसुतं देवी पतीमें कुरुते नम:

आप इस बार किसी चक्कर में न पड़कर ये विश्वाश के साथ करे और हा इसके साथ स्वयं केशर का तिलक भी प्रति दिन जरुर लगाये, हो सकता है माता की कृपा इस बार आप पे हो जाये और हा पूजा के बाद भैरू बाबा के लड्डू जरुर चढ़ाये ।

प्रहलाद ओझा भैरू (9460502573)

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जाने नवरात्रि का मुहूर्त, नौ देवियों का महत्व व पूजा विधि

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नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं – चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है।

यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ होती है और रामनवमी को इसका समापन होता है।

इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से प्रारंभ है और समापन 14अप्रैल को है। नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।

चैत्र नवरात्रि 2019की तिथि :-

6 अप्रैल (पहला दिन)
प्रतिपदा – इस दिन पर “घटत्पन”, “चंद्र दर्शन” और “शैलपुत्री पूजा” की जाती है।

7अप्रैल (दूसरा दिन)
दिन पर “सिंधारा दौज” और “माता ब्रह्राचारिणी पूजा” की जाती है।

8 अप्रैल (तीसरा दिन)
यह दिन “गौरी तेज” या “सौजन्य तीज” के रूप में मनाया जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान “चन्द्रघंटा की पूजा” है।

9 अप्रैल (चौथा दिन)
“वरद विनायक चौथ” के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन का मुख्य अनुष्ठान “कूष्मांडा की पूजा” है।

10 अप्रैल (पांचवा दिन)
इस दिन को “लक्ष्मी पंचमी” कहा जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान “नाग पूजा” और “स्कंदमाता की पूजा” जाती है।

11 अप्रैल (छटा दिन)
इसे “यमुना छत” या “स्कंद सस्थी” के रूप में जाना जाता है और इस दिन का मुख्य अनुष्ठान “कात्यायनी की पूजा” है।

12 अप्रैल (सातवां दिन)
सप्तमी को “महा सप्तमी” के रूप में मनाया जाता है और देवी का आशीर्वाद मांगने के लिए “कालरात्रि की पूजा” की जाती है।

13 अप्रैल (आठवां दिन)
अष्टमी को “दुर्गा अष्टमी” के रूप में भी मनाया जाता है और इसे “अन्नपूर्णा अष्टमी” भी कहा जाता है। इस दिन “महागौरी की पूजा” और “संधि पूजा” की जाती है।

14 अप्रैल (नौंवा दिन)
“नवमी” नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन “राम नवमी” के रूप में मनाया जाता है और इस दिन “सिद्धिंदात्री की पूजा महाशय” की जाती है।

चैत्र नवरात्रि के महत्वपूर्ण समय :
सूर्योदय 6 अप्रैल 2019 को 06:36 पूर्वाह्न
सूर्यास्त 6अप्रैल 2019 को 18:33 अपराह्न
प्रतिपदा तिथी आरंभ 6अप्रैल 2019 18:41 अपराह्न
प्रतिपाद तिथी समाप्त 6 अप्रैल 2019 18:31 अपराह्न
अभिजीत मुहूर्त 12:11 अपराह्न – 12:59 अपराह्न
घोस्टाप्पन मुहूर्ता 06:36 पूर्वाह्न – 10:35 पूर्वाह्न

चैत्र नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान –
बहुत भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं। भक्त अपना दिन देवी की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक के पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।

पूजा विधि –
घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।

1. अखण्ड ज्योति :
नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलतें हैं। यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।

२. जौ की बुवाई :
नवरात्रि में घर में जौ की बुवाई करते है। ऐसी मान्यता है की जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।

३. नव दिवस भोग (9 दिन के लिए प्रसाद) :
प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है। सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग निम्न अनुसार हैं:
• 1 दिन: केले
• 2 दिन: देसी घी (गाय के दूध से बने)
• 3 दिन: नमकीन मक्खन
• 4 दिन: मिश्री
• 5 दिन: खीर या दूध
• 6 दिन: माल पोआ
• 7 दिन: शहद
• 8 दिन: गुड़ या नारियल
• 9 दिन: धान का हलवा

4. दुर्गा सप्तशती :
दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।

5. नौ दिनों के लिए नौ रंग :
शुभकामना के लिए और प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं:
• 1 दिन: हरा
• 2 दिन: नीला
• 3 दिन: लाल
• 4 दिन: नारंगी
• 5 दिन: पीला
• 6 दिन: नीला
• 7 दिन: बैंगनी रंग
• 8 दिन: गुलाबी
• 9 दिन: सुनहरा रंग

6. कन्या पूजन :
कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।

अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम :
बहुत सारे भक्त निचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करते हैं:
1. प्रार्थना और उपवास चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
2. सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
3. उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
4. नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की
• अस्वास्थ्यकर खाना (Junk Food) नहीं खाते।
• सत्संग करते हैं।
• ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।
• ध्यान करते हैं।
• चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।
• क्रोध से बचे रहते हैं।
• कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।
• अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।

चैत्र नवरात्री का महत्व :
यह माना जाता है कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।।ॐ नमो नमः।।

*ॐ नमो नमः।।पं भैरुसूरा।।७०२३६३०२२७।।चैत्र नवरात्रि २०१९

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