ज्योतिष / वास्तु

कुंडली मे चन्द्र ग्रहण योग, ग्रहण में क्या करें क्या नहीं

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कुंडली मे चन्द्र ग्रहण योग का उपाय, ग्रहण में क्या करें क्या नहीं ? गर्भवती क्या न करें

जिनकी कुंडली में ग्रहण योग होता है खाशकर चन्द्र ग्रहण, चन्द्र ग्रह कुण्डली में राहु या चन्द्र के साथ जब पीड़ित हो । ये सब योग जीवन में सन्तुष्टि नहीं देते,निर्णय क्षमता कमजोर या गलत हो सकती है।व्यक्ति कई बार तनाव /डिप्रेशन/एंजाइटी का शिकार हो जाता है। गुस्सा अधिक आ सकता है,चीड़चिड़ा हो जाता है,कही भी अधिक देर मन नहीं लगता है ।
बीपी,साइनस,साइनोसाइटिस,माइग्रेन,अस्थमा,ब्रोंकाइटिस,एलर्जिक जुकाम व टीबी आदि की समस्या हो सकती है । जीवन में उतार चढ़ाव अधिक होते है,मन व्याकुल हो जाता है ।
अगर इनमें से कोई प्रॉब्लम है तो चन्द्र ग्रह पीड़ित समझें। चन्द्र पीड़ित हो या कुंडली में चन्द्र ग्रहण हो तो उसका उपाय भी चन्द्र ग्रहण के समय ही करें तब लाभ प्रतिशत की मात्रा ज्यादा सम्भव है,ग्रहण किस भाव किस राशि में है उसके हिसाब से उपाय करें तो अधिकाधिक फल मिलता है लेकिन यहाँ कॉमन उपाय बताए जा रहें है जो भी परिणाम देने में सक्षम होंगे,इसलिए सरल,सात्त्विक,कम से कम समय व खर्च में व हर कोई कर सके ऐसा उपाय बता रहा हूँ जो मेरे पिताजी भैरव साधक टुंबडी वाले बाबा पण्डित ज्योतिषी छोटुलालजी ओझा बताया करते थे वो बता रहा हूँ।
(1) ग्रहण वाले जातक को ग्रहण से पूर्व व ग्रहण के पश्चात हरिद्वार,उज्जैन,नासिक या गयाजी में स्नान करें। बच्चें को घर में ही गंगाजल डालकर स्नान करवा सकते है या जिनके किसी भी करना संम्भव न हो पाए वो भी सिर्फ गंगाजल डाल कर स्नान कर सकते है ।
(2) ग्रहण के दौरान ईस्ट मन्त्र गुरु मंत्र के साथ सोमाय नमः तथा नमः शिवाय का निरंतर जाप करें(बच्चों के लिये अभिभावक करें या पंडितों से करावें)
(3) ग्रहण के समाप्ति से पूर्व व ग्रहण समाप्ति पश्चात स्नान कर छाया दान व सप्त धान डाकोत को दान करें।कम्बल दान करें ।
(4)ग्रहण के दौरान पहने कपड़े दान करदे या फेंक दे ।
(5) ग्रहण पश्चात चन्द्र देव को गंगाजल से अर्घ्य देवे।
(6)ग्रहण मोक्ष पश्चात स्नान के बाद गंगाजल का पान करें यानी थोड़ा सा पीए।
(7) ग्रहण पश्चात शिव मंदिर में चावल मिश्री दही गोमती चक्र चढाए।
ये सरल सात्विक सटीक बिना खर्चे का व लाभदायक उपाय है।चन्द्र ग्रहण,क्या करें और क्या न करें*
चन्द्र ग्रहण के समय क्या न करें:-
ग्रहण के समय भोजन न करें,पानी न पिएं।
ग्रहण के समय काटना,तोड़ना,सीलने का काम न करें।
ग्रहण के समय नींद न ले ।
ग्रहण के समय
ग्रहण के समय मूर्ति स्पर्श न करें।
ग्रहण के गर्भवती बाहर न निकले,कमरें में रहें,यथा सम्भव मौखिक या मानसिक जाप करें या संकीर्तन करें।

ग्रहण के समय क्या करें?
ग्रहण के समय ईस्टमन्त्र/गुरु मंत्र का जाप करें ।
ग्रहण के समय सत्संग,कीर्तन करें।
ग्रहण के समय गीता पाठ,
/गजेंद्र मोक्ष पाठ करें ।

ग्रहण से पूर्व स्नान,ग्रहण में जाप,ग्रहण मोक्ष पर स्नान व स्नान पश्चात जनेऊ नई धारण करें, दान करें व चन्द्र देव को गंगाजल से अर्घ्य देवें।
ग्रहण मध्य व बाद छाया दान भी श्रेष्ठ है।
(ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें ये बुजुर्गों ने जो बताया वो आज विज्ञान भी मान रहा है,धर्म आस्था विश्वास से करने पर तन मन आगामी जन्म सुधरता है, विज्ञान भी तन मन के प्रभाव को जरूर मान रहा है, हम बुजुर्गों के बताए ऐस्ट्रो टिप्स या सलाह मानकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। – प्रहलाद ओझा ‘ भैरू ‘ (रमक झमक)

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बीकानेर में यहाँ आकर होता है हर समस्या का समाधान

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जानिये जंगल के बीच बने आश्रम में बीकानेर के संत के बारे में
संत भावनाथ जी रामदेव बाबा के अनन्य भक्त है और वे आमतौर पर मौन व्रत में रहते है यहाँ दर्शन करने आने वाले भक्त अपनी हर समस्या का समाधान होने की बात कहते है देखिये वीडियो

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तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

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तपे जेठ, तो बरखा हो भर पेट।।
क्या है ‘तपा तप’ और ‘दस तपा’ ?

जेठ यानि जेष्ठ माह में जहाँ जहाँ गर्मी पड़ती है वहाँ बरसात भी अधिक होती है, इसलिये जिस शहरों में अभी गर्मी अधिक पड़ रही है उन्हें आगामी दिनों में पानी की किल्लत कम होगी। अभी अखबारों में नो तपा दस तपा हेडिंग आया लेकिन ये क्या होता है कब होता और इसका क्या प्रभाव है वो जानकारी संकलित कर बता रहा है रमक झमक।

तपा तप

जेष्ठ कृष्णपक्ष दशमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक गर्मी का प्रकोप अधिक रहता है। इसको कहते है– *तपा तप*।


दस तपा

यदि जेठ माह में दस तपा में पानी बरस जाता है तो बाकि सब नक्षत्र हल्के पड़ जाते है। (धनिष्ठा नक्षत्र से मृगशिर नक्षत्र तक) दस तपा कहते है।

तपे नखत मृगशिरा जोय, तब बरसा पूरन जग होय।।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मृगशिरा नक्षत्र में अगर गर्मी ज्यादा पड़े तो उस वर्ष पानी खूब बरसता है।

तपे मृगशिरा बिल्खें चार, बन बालक औ भैंस उखार।।

मृगशिरा नक्षत्र का तपना, कपास, बालक, भैंस और ईख के लिए अच्छा नहीं। कपास और ईख की फ़सल अच्छी नहीं होती। मां और भैंस का दूध कम हो जाता है।
जिन – जिन क्षेत्र में, शहरों में व प्रदेशों में दस तपा में गर्मी अधिक रही, वहां बारिस होने की पूर्ण संभावनाएं है।
(संकलन:रमक झमक)

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आधुनिक ज्योतिष के उपायों को छोड़ किसी भी काम के लिए ये करें

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पिता, नाना व बहन के सम्मान से खराब ग्रह चाल भी हो जाएगी ठीक

आधुनिक युग और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के चलते लोगों को शार्ट कट की चाहत बढ़ी है। जीवन की भागम भाग में रिश्ते पीछे छूट रहे है और लोग ज्योतिषियों तांत्रिकों से शॉर्टकट उपाय पूछ रहे है। नोकरी, पद, प्रतिष्ठा, शादी व संतान पाने के लिए लोग क्या क्या नहीं कर रहे है।

डिप्रेशन से निकलने का रास्ता भी डॉक्टर से लेकर ज्योतिषियों तक को पूछा जा रहा है। कौनसा ग्रह खराब है किस ग्रह की दशा चल रही है, उसका क्या उपाय है,क्या पाठ पूजा है, सब करने को तैयार है और कर भी रहे है फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। घर में तनाव अलग से बढ़ रहा है।
ये सब क्यों हो रहा है? इसका मुख्य कारण क्या है? समाधान क्या है? ये सब आप जानना चाहते है समाधान चाहते है तो ईमानदारी से रमक झमक एस्ट्रो टिप्स अपनाइये और प्रभाव खुद महसूस कीजिये।

पिता के चरण स्पर्श करने से सूर्य की दशा खराब हो तो राहत मिलती है। अच्छी हो तो और अच्छी हो जाती है। सरकारी काम, सम्मान, ऊर्जा, पेट, सिर का कारक है। ज्योतिषीय दृष्टि से सब उपाय करके भी अगर आप पिता का सम्मान नहीं करते उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, आपकी किसी वजह से उनको कष्ट होता है, तो मानकर चलिए सब उपाय के बावजूद सूर्य सम्बन्धी पीड़ा ठीक नहीं होगी। इसलिये सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को जल दे, पिता का आशीर्वाद ले, हर रोज उनका मन जितने का प्रयास करें। अगर पिता आपसे खुश है, आप आशीर्वाद लेते है, काम में हाथ बंटाते है, पिता का नाम व सम्मान कैसे बढ़े ये प्रयास करते है तो सूर्य ग्रह कितना ही आपके लिये क्रूर हो, दशा खराब क्यों न हो, वो सब ठीक होकर आपको लाभ जरूर होगा ।

चंद्रमा खराब हो, उसके लिए माता के चरण स्पर्श करके आप अपने मन को बहुत अच्छा कर सकते हैं।

मंगल के लिए भाई से मित्रवत संबंध रखे।

बुध ग्रह के लिए बहन बुआ मौसी का सम्मान करे।

गुरु यानि बृहस्पति के लिए स्कूल शिक्षक, कुलगुरू, ब्राह्मण आध्यात्मिक गुरु से आशिर्वाद प्राप्त करते रहे।

शुक्र के लिए पत्नी को सदेव प्रसन्न रखने का प्रयास करें उत्सव त्योंहार पटरेडीमेड कपड़े दिलाने का प्रयास करें।
शनि के लिए सेवक, नोकरो से प्रेम का व्यवहार रखे तीज त्योंहार को उनको मिठाई खिलाए व गिफ्ट देवे।

राहु के लिए दादाजी और केतु के लिए नानाजी का सम्मान करना उनको अनकंडीशनल प्रेम करना उनकी आज्ञाओं का पालन करना उनको सुनना उनके साथ बैठना व उनके पैर दबाने से लाभ मिलता है। इस प्रकार रिश्तों को अच्छे ढंग से निभाने से नवग्रह शांत होते हैं और अनुकूल होते हैं बिगड़े हुए काम बनने शुरू हो जाते है।

– प्रहलाद ओझा’भैरु’
लेखक:-‘शीघ्र फलदायक भैरव साधना व गृहस्थी सुख के सुगम उपाय’

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अक्षय तृतीया नौकरी, शादी व सन्तान के लिये विशेष

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अक्षय तृतीया पर नौकरी, शादी व सन्तान के लिये करें उपाय:-

अक्षय तृतीया सर्वश्रेष्ठ, अबूझ व शुद्ध मुहूर्त है इस दिन किया कार्य अक्षय फल देने वाला देने वाला होता है। जीवन की आपाधापी और भगाम भाग के इस दौर में हर कोई चाहता है कि वो कम समय मे ऐसा क्या करें जिससे उसकी कामना पूर्ण हो। साल में ऐसे बहुत कम योग बनते है जब कम समय ही कुछ उपाय करने से शीघ्र फल प्राप्त हो सकते है। जिसमें अक्षय तृतीया महत्वपूर्ण दिन है।यह दिन अक्षय फल देने वाला होता है इसलिये ऐसा क्या करें व क्या न करें कि सात्विक कामना पूर्ण हो।


घर में प्रेम व समृद्धि के लिये ये करें:-

अक्षय तृतीया के दिन सभी लोग साथ बैठकर व जमीन पर बैठकर भोजन करें इससे परिवार में प्रेम अक्षय होता है। परिवार के सभी छोटे बड़ो के चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद प्राप्त करें ये आशीर्वाद अखण्ड रहता है ।
नए आभूषण या बर्तन खरीदे व आज के दिन घर में मिष्ठान जरूर बनाए व किसी अतिथि,गरीब व बहन/भुआ को भी भोजन कराएं । ऐसा करने से घर मे धनधान्य अक्षय रहता है व प्रेम अखण्ड रहता है ।

नोकरी, प्रमोशन व स्थानांतरण:-

इसके लिये अक्षय तृतीया को शुभ लग्न, शुभ चौघड़िया या शुभ होरा देख कर भगवान भगवान विष्णु व लक्ष्मी के चित्र पर मोगरे की माला चढाए,दूध की मिठाई चढाए व इत्र लगाए तथा भगवान गणपति की एक माला जाप के बाद श्रीं श्रियै नमः की दिन भर में 5 माला जाप करें व आगामी माह जेष्ठ शुक्ल की तृतीया तक प्रतिदिन 5 बढ़ाते हुवे माला जाप करें। यानी आगामी 30 वे दिन बढ़ते बढ़ते उस दिन 30×5=150 या 31×5=155 माला करनी पड़ेगी । सिर्फ अगरबती कर ये माला दिन में कभी भी करलें । भगवान गणपति व विष्णु को नमन कर ही माला शुरू करें व अंत में प्रार्थना जरूर करें । जो ये एक माह करने में असमर्थ है वे अक्षय तृतीया को 31 माला जाप करलें व खीर का भोग लगाएं ।

सन्तान हेतु:- आज के दिन भगवान लड्डू गोपाल घर लाए स्नान पूजा अर्चना करें व मक्खन मिश्री व तुलसी चढाए। सन्तान गोपाल स्तोत्र व मन्त्र की 1 माला करें व प्रतिदिन एक बढ़ाए ऐसा एक माह करें । पति पत्नी अपना सँयुक्त व हँसमुख फोटो बेड रूम में लगाएं।

शादी हेतु:-
स्नान आदि कर भगवान विष्णु को केशर का तिलक करें व दूध केशर की मिठाई चढ़ाए। पीला धागा कलाई पर बांधे। ॐ गुरवे नमः की 3 माला एक माह तक करें। गुरुवार व अमावस्या को साबुन कटिंग सेविंग न करें।

प्रहलाद ओझा ‘भैरु’

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अटके और बिगड़े काम बनाए हनुमान जी को इस तरह मनाए

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हनुमानजी को क्या चढ़ाए
जिससे रुके काम बने।

अगर आपकी कुंडली मे मंगल या शनि अशुभ फल देने वाले है या उनकी दशा चल रही है जो अच्छी नहीं है,मंगल के कारण या भाइयो से अनबन है,कर्ज अधिक हो गया है या मंगल या शनि से मांगलिक दोष कुंडली मे बताया गया है,शनि या मंगल के कारण काम मे रुकावट आ रही है,आप मांगलिक है और विवाह में बाधा आ रही है या विवाह बाद भी मांगलिक की वजह से घर मे किच किच रहती है,झगड़ा होता है । बार-बार चोट दुर्घटना होती है । किसी के ऊपर प्रेत बाधा है । शरीर मे एनर्जी की कम आ रही है ।मकान जमीन को लेकर परेशानी है,जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा है ।ऐसा किसी भी ज्योतिषी या पण्डित ने कहा हो कि मंगल या शनि के कारण या शनि की साढ़े साती या ढैया के कारण प्रॉब्लम है,तो चिंता न करें। रमक झमक बता रहा है कि इस हनुमान जयंती को खाश क्या करें उपाय जिससे हो समस्या का तुरंत समाधान।
हनुमान बाबा एक मात्र देव है जिनको मनाने से शनि व मंगल दोनो प्रसन्न हो सकते है।
(1) जमीन,मकान,प्लाट व मुकुदमा सम्बन्धी समस्या निदान के लिये ये करें:
तुलसी पर राम लिख के कम से कम 21 पत्तो की माला पहनाए,लेकिन माला ह्रदय तक ही रहे नीचे न आए तथा गिरे नही। पंधारी लडू या चूरमा चढाए। तिली तेल का दीपक करें।
ये चौपाई 108 बार तथा हनुमान चालीसा 7 बार जन्मोत्सव से शुरू कर 108 दिन लगातार या कम से कम 21 दिन अवश्य करें ।
पवन तनय बल पवन समाना,
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना ।
कोवनसो काम कठिन जग माही,
जो नहीं होई तात तुम्ह पाई ।।

(2) शनि साढ़े साती,ढैया या कुंडली मे शनि जनित समस्या हो, घुटनो सम्बन्धी परेशानी हो तो ये करें:-
तेल सिंदूर लगाकर चोला चढाए,शाम को दीप माला करें,इमरती व लडडू चढाए ।
श्रीराम की 1 माला जाप करें,1 माल हनुमते नमः व 1 माला
संकट कटे मिटे सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमतबल बीरा ।

चौपाई का जाप करें ।

(3) व्याधि-रोग होने पर उसके नाश के लिये निरन्तर हनुमानजी के समक्ष ये चौपाई बोले प्रार्थना करें। पास में रखा जल बाद में रोगी को पिलाए । दवाई भी ये चौपाई बोलकर लेवे। गायों को गुड़ रोटी देवे।

नाशे रोग हरे सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत वीरा ।।

(4) आकस्मिक घटनाक्रम या दुर्घटनाओं की रोक के लिये ये चौपाई बोलकर फिर घर के सभी लोग मिलकर 108 हनुमान चालीसा पढ़े। रोजाना हनुमानजी को माला प्रशाद चढाए। हनुमानजी को पान चढाए।

दैहिक दैविक भौतिक तापा
राम राज नहीं काहुहि ब्यापा ।

पाठ/माला पूर्ण होने पर बड़ो को प्रणाम व गौ सेवा करें । कार्य सिद्ध होने पर हनुमानजी का विशेष पूजन श्रंगार कर प्रशाद चढाए तथा गायों को गुड़/हरा चारा जरूर डाले ।प्रहलाद ओझा ‘भैरु’

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हनुमान जी के चरित्र से सीखे सफल भविष्य और हर समस्या का समाधान

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हनुमानजी से सीखे सफल कैरियर के गुण
(हनुमान जयन्ति विशेष)
(रमक झमक)
हनुमान जी का किरदार लोगों को बहुत कुछ सीखाता है, हर रूप में लोगों के लिए प्रेरणादायक है। हनुमान जी के बारे में तुलसीदास लिखते हैं, ‘संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बल बीरा’। यानी हनुमान जी में हर तरह के कष्ट (समस्या)को दूर करने की क्षमता है। आज हम आपको बता रहे हैं हनुमान जी के कुछ खास गुण, इन्हें अपनाकर अपनी परेशानियां दूर कर सकते हैं। आपके प्रोफेशनल जीवन में भी ये गुण काफी काम आएंगे:-

संवाद कौशलता

सीता जी से हनुमान पहली बार रावण की ‘अशोक वाटिका’ में मिले, इस कारण सीता उन्हें नहीं पहचानती थीं। एक वानर से श्रीराम का समाचार सुन वह आशंकित भी हुईं, परन्तु हनुमान जी ने अपने ‘संवाद कौशलता’ से उन्हें यह भरोसा दिला दिया की वह राम के ही दूत हैं। सुंदरकांड में इस प्रसंग को इस तरह व्यक्त किया गया हैः
‘कपि के वचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास।
जाना मन क्रम बचन यह, कृपासिंधु कर दास।।

समझ व चतुराई से हराना

हनुमान जी ने समुद्र पार करते समय सुरसा से लड़ने में समय नहीं गंवाया। सुरसा हनुमान जी को खाना चाहती थी। उस समय हनुमान जी ने अपनी समझ व चतुराई से पहले अपने शरीर का आकार बढ़ाया और अचानक छोटा रूप कर लिया। छोटा रूप करने के बाद हनुमान जी सुरसा के मुंह में प्रवेश करके वापस बाहर आ गए। हनुमान जी की इस चतुराई से सुरसा प्रसन्न हो गई और रास्ता छोड़ दिया। चतुराई की यह कला हम हनुमान जी से सीख सकते है ।

आदर्शों से कोई समझौता नहीं

लंका में रावण में हनुमान जी और मेघनाथ के मध्य हुए युद्ध में मेघनाथ ने ‘ब्रह्मास्त्र’ का प्रयोग किया। हनुमान जी चाहते, तो वह इसका तोड़ निकाल सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वह ब्रह्मास्त्र का महत्व कम नहीं करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने ब्रह्मास्त्र का तीव्र आघात सह लिया। हालांकि, यह प्राणघातक भी हो सकता था। तुलसीदास जी ने इस पर हनुमानजी की मानसिकता का सूक्ष्म चित्रण किया हैः-

ब्रह्मा अस्त्र तेंहि साधा, कपि मन कीन्ह विचार।
जौ न ब्रहासर मानऊं, महिमा मिटाई अपार।।

अनावश्यक शक्ति व ज्ञान का बखान न करना ।
हम अक्सर अपनी शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन करते रहते हैं, कई बार तो वहां भी जहां उसकी आवश्यकता भी नहीं होती। हनुमान चालीसा में लिखा है-

सूक्ष्म रूप धरी सियंहि दिखावा,
विकट रूप धरी लंक जरावा।’

सीता के सामने उन्होंने खुद को लघु रूप में रखा, क्योंकि यहां वह पुत्र की भूमिका में थे, परन्तु संहारक के रूप में वह राक्षसों के लिए काल बन गए। एक ही स्थान पर अपनी शक्ति का दो अलग-अलग तरीके से प्रयोग करना हनुमान जी से सीखा जा सकता है ।

समस्या नहीं समाधान कैसे हो ये सोचे

जिस समय लक्ष्मण रण भूमि में मूर्छित हो गए, उनके प्राणों की रक्षा के लिए हनुमान जी पूरा पहाड़ उठा लाए, क्योंकि वह संजीवनी बूटी नहीं पहचानते थे। हनुमान जी यहां हमें सिखाते हैं कि मनुष्य को शंका स्वरूप नहीं, वरन समाधान स्वरूप होना चाहिए।उन्होंने सिर्फ इतना सोचा कि इस पहाड़ में संजीवनी है बस,इससे समाधान हो जाएगा समस्या का चाहे पहाड़ जैसी हो समाधान उसमें ढूढने से मिल जाता है ।


बड़ो को श्रेय देना, अपनी बड़ाई खुद न करना ।

सीता जी का समाचार लेकर सकुशल वापस पहुंचे श्री हनुमान की हर तरफ प्रशंसा हुई, लेकिन उन्होंने अपने पराक्रम का कोई किस्सा प्रभु राम को नहीं सुनाया। यह हनुमान जी का बड़प्पन था,जिसमे वह अपने बल का सारा श्रेय प्रभु राम के आशीर्वाद को दे रहे थे। प्रभु श्रीराम के लंका यात्रा वृत्तांत पूछने पर हनुमान जी जो कहा उससे भगवान राम भी हनुमान जी के आत्ममुग्धताविहीन व्यक्तित्व के कायल हो गए।


नेतृत्व क्षमता

समुद्र में पुल बनाते वक़्त अपेक्षित कमजोर और उच्चश्रृंखल वानर सेना से भी कार्य निकलवाना उनकी विशिष्ठ संगठनात्मक योग्यता का परिचायक है। राम-रावण युद्ध के समय उन्होंने पूरी वानरसेना का नेतृत्व संचालन प्रखरता से किया।

संयमित जीवन

हनुमान जी एक आदर्श ब्रह्मचारी थे। उनके ब्रह्मचर्य के समक्ष कामदेव भी नतमस्तक थे। श्री हनुमान के व्यक्तित्व का यह आयाम हमें ज्ञान के प्रति संयमित जीवन व समर्पण’ की शिक्षा देता है। इसी के आधार पर हनुमान जी ने अष्ट सिद्धियों और सभी नौ निधियों की प्राप्ति की।

ईश्वर आदर्श में विश्वास

हनुमानजी ने पूरे रामचरितमानस मानस एक संदेश दिया अपने आदर्श के प्रति हर स्थिति में वफादार बने, भगवान राम के प्रति हर स्थिति में उनका समर्पण व वफादारी देखने को मिली है।
(रमक झमक)

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