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Bikaner junagarh fort

हवेलियों, पाटों, चौक व गुवाड़ वाला शहर बीकानेर

जन्मदिन अक्षय तृतीया पर विशेष बीकानेर शहर में लाल पत्थरों की हवेलियां और उनकी नक्काशी, ऊँठ की खाल पर उस्ता कला, काष्ठ पर मथेरण कला,शहर के दरवाजे,गेट,बारियां, गुवाड़, घाटी,चौक और चौक में रखे हुवे बड़े -बड़े पाटे इस शहर को खाश बनाते है। खाशकर शहर परकोटे की खाश जानकारी लगभग हर चौक की जो मौखिक सूत्रों से संजय श्रीमाली ने लिखी है। आप भी जानकर पढ़कर आनंदित होंगे। (रमक झमक) इतिहास व सस्कृति से समृद्ध शहर बीकानेर शहर ऐतिहासिक एवं ...
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Gangaur mata aarti

गणगौर माता की आरती

गवरजा माता की आरती ( तर्ज - सांवरसा गिरधारी ) आंगणियों हरखाओ , बधावो रामा , आंगणियों हरखायो , माँ गवरजा पधारी , माता गिरिजा पधारी . देखो शैलजा पधारी , हरख मनावो ढम - ढम ढोल नगाड़ा बाजे , आभो गरजे बिजळी नाचे , ओ कुण शंख बजावे , बधावो रामा , ओकण शंख बजावे । माँ गवरजा । । 1 । । रुण - झुण , रुण - झुण पायल बाजे , सात सुरों में मनड़ो गावे , ...
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Dhinga gavar mata panthwadi mata

धींगा गवर और पंथवाडी माता की कथा व कहानियां

धींगा गवरजा की कहानी ( मोम की गुडीया ) कैलाश पर्वत पर शिव - पार्वती बैठा था चैत्र माह शुरु होते ही " गवरजा " रा " बालीकाओं कन्याओं " द्वारा पूजण शुरु हो गया । पार्वती शिवजी सू बोली कि मैं भी म्हारे पिहर जावणो चाहू , आप हुकम करो तो । महादेव जी बोल्या , म्हारी भांग घोटण री व्यवस्था कूण करसी जने पार्वती व्यवस्था रे रूप में एक मोम री गुडिया बनाई और आपरी शक्ति सू उसमें ...
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विषम स्थितियों में कैसे करे माता की पूजा

कैसे करें की माता प्रसन्न भी हो पूरा विश्व कोराना की महामारी से त्रस्त है और भारत भी इस संकट के दौर से गुजर रहा है । चारों और लॉकडाउन है घरों में लोग सिमिट रहे है,बाज़ार जाना सम्भव नहीं या दुकानों माता की पूजन उपलब्ध नहीं ऐसे में सनातनी लोग नवरात्रा में देवी की पूजा कैसे करें यह सबके मन में चल रहा होगा। इसके लिये आप चिंता न करें शास्त्रों में स्पस्ट भी उल्लेख है देश,काल,समय और परिस्थिति ...
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Gangaur ke geet

देखें वे गीत जो गणगौर में दोपहर के समय गाए जाते है

गणगौर में दोपहर में गाए जाने वाले गीत - नौरंगी गवर म्हारी चाँद गवरजा , भलो ए नादान गवरजा रत्नों रा खम्भा दीखे दूर सू , बम्बई हालो , लाखों पर लेखण पूरब देश में , कलकते हालो , गवरयो री मोज्यों बीकानेर में गढ़न कोटां सूं उतरी सरे , हाथ कमल केरो फूल शीश नारेळां सारियो सरे , बीणी बासक नाग रे | | बम्बई . . . बम्बइ . . . . . (1) चोतीणे रा चार चाकलिया ...
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