रमक झमक की ओर से पुष्करणा सावे से संबंधित वीडियो और आॅडियो गीत लांच

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रमक-झमक की ओर से पुष्करणा सावे से संबंधित वीडियो और आॅडियो गीत गुरुवार को लांच हुआ।

बारहगुवाड़ स्थित संस्था कार्यालय में पंडित जुगल किशोर ओझा ‘पुजारी बाबा’, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा, समाजसेवी पंडित सूरजकरण जोशी, सूर्य प्रकाशन मंदिर के डाॅ. प्रशांत बिस्सा, शेर महाराज, ईश्वर महाराज, पूर्व पार्षद दुर्गादास छंगाणी,पूर्व पार्षद दुर्गादास छंगाणी, किशन ओझा ने किया।

इस अवसर पर पुजारी बाबा ने कहा कि शादी विवाह के माहौल में वो गीत ज्यादा व जल्दी स्थान बनाते जिस पर नृत्य किया जा सकता हो, क्योंकि विवाह समारोह में जोश, उमंग व खुशी प्रदर्शित होते है । रमक झमक के ये वीडियो गीत वातावरण निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे ।तथा गीतों के माध्यम से दिया गया सन्देश भी प्रभावी ढंग से पहुँच पाएगा ।

साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा ने कहा कि शादी विवाह के अवसर पर गीत गाने व सुनना हमारे समाज की संस्कृति है, इन गीतों के अभाव में विवाह के अवसर को पूर्ण नहीं माना जाता ।

सूर्य प्रकाशन मन्दिर के डॉ प्रशांत बिस्सा ने कहा कि आज के युवा लेपटॉप, मोबाईल, यूट्यूब व इंटरनेट से जुड़ा है इसलिये डिजिटल प्लेटफार्म पर गीतों की लॉन्चिंग करने से ज्यादा लोगों तक व शीघ्रता से पहुँच सकता है , इनका असर भी प्रभावी होता है । रमक झमक के इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिये ।

रमक-झमक के राधेकृष्ण ओझा ने बताया कि संस्था द्वारा ‘ओम ना शुशी सा पुष्करणा सावे में टाबर ने परणाओ सा’ अपील का वीडियो गीत’ और ‘सगोजी हुग्या राजी’ मारवाड़ी धुन पर ऑडियो गीत रमक झमक यूट्यूब चैनल और वेबसाइट व के माध्यम से लांच किया । ओझा ने बताया कि 5 वर्षीय बच्चे साकेत देराश्री का गाया व बाचा गया ‘बड़ पापड़’ का वीडियो भी अपलोड किया गया है । साइट पर पौरणिक गीत भी लॉन्च किये गए है ।
रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ ने बताया कि वीडियो गीत में
आनंद मस्ताना, प्रेम भादाणी, रविन्द्र जोशी, शिव छंगाणी, ए.के. चूरा सहित अन्य कलाकारों ने अभिनय किया है। इसका मुख्य उद्देश्य पुष्करणा ब्राह्मण समाज के ओलम्पिक सावे की विशेषताओं से आमजन को रूबरू करवाते हुए कुरीतियों की समाप्ति की ओर कदम बढ़ाना है।
इस अवसर पर आनन्द मस्ताना ने गीत की लाइनों को गा कर सुनाया ।

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