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षट्तिला एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा को समर्पित षटतिला एकादशी 20 जनवरी 2020 दिन सोमवार को है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने और भगवान की पूजा करने से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति तो होती है, व्यक्ति को नर्क से मुक्ति के साथ मोक्ष भी मिलता है। उस व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात वैकुण्ठ की प्राप्ति भी होती है। षटतिला एकादशी के पूजा, स्नान आदि के समय काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। षटतिला एकादशी के दिन व्रत ...
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Kan wale ganesh ji

भारत एकमात्र गणेश मंदिर जो राजस्थान के बीकानेर में है

भारतवर्ष में कई ऐसे प्राचीनतम मंदिर अनोखे मंदिर है जो अपनी एक अलग विशेषताओं के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखते है ऐसे ही एक मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में है जहां भक्त गणेश भगवान के निज मंदिर में प्रवेश कर उनके कानों में अपनी मनोकामना बोलते है और उनकी इच्छा पूरी भी होती है इस गणेश जी मंदिर का नाम है कान गणेश जी मंदिर कई लोग इसे कान वाले गणेश जी भी कहते है। यह मंदिर राजस्थान ...
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Bikaner dev kund sagar

बीकानेर के देवी कुंड सागर का चमत्कारी सती माता मंदिर जहां खंभों से आज भी बहता है दूध

बीकानेर का देवी कुंड सागर जो यहां से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर गडसीसर गांव के पास स्थित है बीकानेर राजवंश का श्मशान घाट कहा जाता है। बीकानेर के पूर्व राजाओं महाराजाओं रानियों का अंतिम संस्कार इसी जगह पर किया गया वह जिस जगह पर उनका दाह संस्कार किया गया उसी जगह पर एक छतरी बना दी गई। यहां महाराजा गंगा सिंह जी की पत्नी वल्लभ कुंवर देवी की भी छतरी है जिसे 'दूध झरने वाली छतरी' भी कहा ...
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सखी सखी में सूरज दिख्यो ? ज्योहीं टुठ्यो, सूरज रोटा कथा व्रत विधि

होली दहन के बाद प्रथम रविवार को सूरज रोटे का व्रत होता है। भगवान सूर्य के लिये गेहूं के आटा से करीब 1 इंच मोटाई की रोटी हाथ से थप थपा कर बनाई जाती है जिसके सेंटर में एक छेद रख दिया जाकर पकाई/सेकी जाती है। महिलाएं ये रोटा लेकर घर की छत या आंगन में जहां सूर्य अच्छे से दिखाई पड़ता है वहाँ से समूह के रूप में एकत्रित होकर अपना अपना रोटा लेकर उसमें से भगवान सूर्य के ...
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Shitla mata

शीतला अष्टमी ‘बास्योड़ा’ पूजन की पौराणिक कथा व पूरी जानकारी

शीतलाष्टमी का त्योहार होली के बाद मनाया जाता है। कई जगह इसे बासौड़ा भी कहते हैं। ये हमें ऋतु परिवर्तन का संकेत भी देते है। इस त्योहार में शीतला माता की पूजा की जाती है और माता को बासी खाने का भोग लगाया जाता है। इसके लिए एक दिन पहले है घरों में भोजन बना लिया जाता है और अष्टमी के दिन माता के भोग लगाया जाता है। शीतला माता वाले दिन गर्म खाना पीना निषेध है। इस दिन माता ...
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