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विवाह हेतु उपयोगी सामग्री की सूची

लग्न का सामान : कुंकु चावल, सुपारी 5 नग, मोली 1 गिंडा, गुड़ 5 डली, नारियल 2 नग, यज्ञोपवीत 2 जोड़ा, लौंग, इलायची, काजल डब्बी 1, मिश्री 1, आटे-हल्दी फल 7 नग। हाथधान का सामान : कुंकु चावल, सुपारी 5, मोली 1 गिंडा, गुड़ 5, गेडियो, पंजियो, बटवो, नारियल 2 नग, यज्ञोपवित 2 जोड़ा, सफेद वस्त्र, दाल पीसी हुई, कुमार लड्डू, छाजला, 2 बेलन, सप्तधान, आटा, हल्दी, तेल (पीठी का सामान), मेट, छाछ, सकोरा 7, मूंग, गुड़, धाना, लाख का ...
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पुष्करणा नाम कैसे पड़ा

पुरात्व के आधार पुष्करणा समाज भारतवर्ष के अत्यंत प्राचीन समाजों में से एक है। एपीग्राकियां इंडिया और एक्सकवेसन पट राजघाट तथा विभिन्न शोध ग्रंथों के आधार पर इस समाज की प्राचीनता और मानव समाज को इसकी देन के प्रमाण उपलब्ध हैं पर कब से मंच गौड़ों की गुर्जर शाखा से अलग होकर देश देशान्तर में इन्होंने अपना अस्तित्व विस्तार किया यह अभी तक अनुसंन्धेय ही है। पौराणिक आख्यानों के आधार पर भृगु ऋषि के पुत्र गुर्जर के तृतीय पुत्र ऋचीक ...
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पुष्करणा ‘सावा’ ओलम्पिक परिचय

 सादगी,सरलता,एकता व समरूपता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध पुष्करणा समाज का सामुहिक शादियों का ओलम्पिक ‘सावा‘ एक परिचय - सावा का अर्थ सह़ विवाह, सामुहिक विवाह व सहयोग से है । बजुर्गो की माने तो सामुहिक विवाह परंपरा की शुरूआत जैसलमेर जिले से पुष्करणा समाज में 1300 वर्ष पहले हुई और बीकानेर में लगभग 150 वर्ष पहले शुरूआत हुई। एक ही दिन एक ही समय में, एक ही लगन में और एक ही गणवेष में शादी करने की इस ...
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