गणगौर में सुबह गाए जाने वाले गीत देखें

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गणगौर सुबह के गीत –

उठी – उठी-

उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल , सूरज तपे रे लिलाड़ एक पुजारी ऐ बाई म्हारी गवरजा , गवरजा , ज्यों रे घर रे टूठे म्होरी माय अन्न दे तो धन दे , बाई थरि सासरिये , पीवरिये , अन्न धन भया रे भण्डार ! डब्बा तो भरिया ए बाई थारे गैनों सु गोंठो सु, माणक मोती तपे रे लिलाड़, उठी – उठी गवर निन्दाड़ो खोल निन्दाड़ो खोल..

खोल कीवाडी-

गवर गवरादे माता खोल किवाड़ी , ऐ बाहर उभी थोने पूजन वाळी , ऐ पूजो ऐ पुजारियों बायों , आसण – कासण मोंगो , ऐ मोंगो ए म्हे , अन्न धन लाज लिछमी , ऐ कान कँवरसो बीरो मोंगों , राई सी भौजाई , ऐ राते घुड़ले बेनड़ मोंगो , सोंवळियों बेन्दोई , ऐ हाथ दे हथाली दे , ननोणे फिर आयो , ऐ जूती रे मचालके , चोवटे फिर आयो , ऐ ढोल रे ढमाके , बीरो लाडी लेबे घर आयो , ऐ जठे बाई गवरजा , देवे हे आसीस्यों , ऐ बीरा म्हारा वधजो , बैल जोताईजो , ऐ भावज म्हारी जणजो , पूत सपूता , ऐ सातों ने सुपारी देसों , आठों ने पतासा , ऐ साल केरी सुई अम्मा , डालके रा बागा , ऐ झटपट सीऊ म्हारे भाई – भीतजो रा बागा , ऐ आवो रे भतीजों , थोरी भुवा लाई बागा , ऐ भुवा रे भरोसे , भतीजा रेयग्या नागा , ऐ नागा – नागा क्या करो , म्हे और सिवासों भागा ।

गणगौर के गीत

गणगौर उत्सव में गाए जाने वाले गीत


चुंदड़ी-

इये चून्दडली रो म्हारी गवरजा बाई ने कोड , ले दोनी ओ ब्रम्हादत्तजी रा छावा चून्दड़ी , म्हेतो फिरि आया घिरी आया , राजा – राणी देस – परदेस कंटोड़े ने लाधी सवागण चून्दड़ी आ तो लाधी रे लाधी हेमाचलजी री प्रोळ ( हाट ) , ओढोनी ओ भरमलजी री बेनड़ , चून्दड़ी । इये चून्दडली . . . . .

(महिलाएं इसमें ब्रह्मा दत्त जी के नाम पर अपने ससुर जी का नाम और हिमाचल जी की जगह अपने पिताजी का नाम लेती है।)

दोपहर में गाए जाने वाले गीत और धींगा गवर माता की कहानी के लिए वेबसाइट देखें.. अधिक जानकारी के लिए रमक झमक के फेसबुक पेज से जुड़े

गुड़ला क्यों घुमाया जाता है इसके पीछे क्या कहानी है वह दातनिया देना क्या होता है जानिए नीचे दिए गए वीडियो में-

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