गोबर की माला (भरभोलिए) से करें माला घाेलाई की रस्म

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होली वाले दिन भाई के माला घोलाई की परम्परा है। आजकल होली के दिन माला घोलाई रस्म भाई को पुष्प माला पहनाकर की जा रही है, जो गलत है। इन्ही पुष्प माला को होली में डाला जा रहा है जो पूर्णतया निषेद्ध है । तो आइये जानते क्या करना चाहिये जिससे भाई की रक्षा दैहिक रक्षा हो और पर्यावरण शुद्ध हो तथा स्वयं बहन के लिये भी मंगल हो ।

क्या होते है भरभोलिये:-
(रमक झमक)
देशी गाय के गोबर को हाथ से जमीन पर रखकर थेपडीनुमा गोल लगभग 3 इंच गोलाकार ऑपले जमीन पर बनाकर उसमें अंगुली आए उतना साइज का छेद कर इन्हें धूप में सुखाया जाता है। इन्हें होली के दिन माला बनाकर भाई के ऊपर से घुमाया जाता है।

कितने भरभोलिये और क्यों:-
(रमक झमक)
पांच भर भरभोलिये को मूँझ में पिरोकर गांठ लगाई जाती है यानि गोबर भरभोलिए की 5 मनकों की माला।
ये भौतिक शरीर पांच तत्वों से बना है:अग्नि,जल,पृथ्वी,जल और आकाश । ये पांच भरभोलिये पांच तत्वों का प्रतीक है।
क्या है फायदा:-
(रमक झमक)
गोबर से बने भरभोलियों को एक छोटी लकड़ी की डंडी में डालकर होली के दिन बहन द्वारा भाई के शरीर अंगूठे से सिर तक 7 बार घुमाकर शाम को होलिका की अग्नि में डाला जाता है,ऐसी मान्यता है कि भाई के शरीर के किसी भी पांचों तत्व में कोई प्रॉब्लम आ गई है तो वे इन भरभोलिये में आ जाती है जो होलिका के साथ ही जल जाती है ये भाव है।पांच तत्वों से शरीर की सुरक्षा हो जाती है। गोबर के ये ऑपले जलने से पर्यवरण शुद्ध होता है और इसकी अग्नि के चारों ओर परिक्रमा देने शरीर आरोग्य होता है इसलिये शहर में जलती होली की परिक्रमा औरत पुरुष सब करते है।
देखें वीडियो –

माला घोलाई में पुष्प क्यों नहीं:-
(रमक झमक)
जो पुष्प माला घुमाकर होलिका की अग्नि में डालते है निषेध है,पुष्प अग्नि में डालना वर्जित है,इससे दरिद्रता आती है।अगर जो लोग इसे नहीं जलाकर घर में ही रख लेते है वो घर में नेगेटिव एनर्जी देता है। कुछ घुमाकर भाई को पहना देते है वो विपरीत काम करता है। इसलिये ऐसा बिल्कुल न करें।

अपनी मौलिक परम्परा सस्कृति के पीछे बुजुर्गों की गहरी सोच रही है इसके फायदों व वैज्ञानिक आधार को हम समझे ,देखा देखी होड़ व दिखावे में न पड़े।
**प्रहलाद ओझा ‘भैरु’
(रमक झमक,बीकानेर)
9460502573

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