सबसे अनोखी बीकानेर होली की सभी विशेषताएं जानिए

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देश की सबसे अनूठी व निराली होली !बीकानेर की !! (प्रहलाद ओझा ‘भैरु’, संस्कृतिकर्मी)
होली का त्योंहार पूरे देश मे मनाया जाता है और क्षेत्र की होली अपने आप मे विशेष है । लेकिन बीकानेर की होली बड़ी खाश,अनूठी व निराली है । मौज, मस्ती, अल्हड़पन, केशर होली,स्वांग होली, राख,धूल,पानी,रंग,चंग,धमाल,गीत,गैर,तणी,एक दो साढ़े तीन डांडिया,दूल्हे की बारात,पानी मार डोलची खेल, मूर्ख सम्मेलन,भांग सम्मेलन,दादा से पौता तक एक ही मंच पर गाते है अश्लील गाने व ढूढना,गेवरियो की टोलियां के साथ देर रात तक चलने वाली रम्मत और स्त्री पुरुषों के बीच फुटबॉल मैच के अलावा होली फैशन शो यहाँ की होली को बहुत खाश बनाता है । यहाँ जो भी एक बार होली देखने आया वो कभी भूल नहीं पाया ।और उसके मुंह से एक ही बात निकलती है होली,तो बस!!बीकानेर की !!
देवी से होली खेलने की इज्जाजत !(रमक झमक)
होली से 8 सप्तमी को बीकानेर नागणेची माँ के मंदिर में फागोत्सव मनाकर मॉ से शहर में होली खेलने की परमिशन लेकर शहर में आते है ।माना जाता है पहले मा के मंदिर में देवी माँ की इज्जाजत के बाद होली खेलने से शहर में होली पर पूर्ण शांति सद्भाव बना रहता है कोई झगड़ा फसाद नहीं होता ।

रात को रम्मती हे रम्मत !(रमक झमक)
बीकानेर शहर में होलाष्टक के प्रथम दिन फक्कड़दाता की रम्मत होती है फिर हर रोज होली तक लगातार अलग अलग रम्मते होती है । रम्मत का अर्थ रमणे से ये नुक्कड़ नाटक जैसी होती है इसमें मंच की बजाय चौक गुवाड़ का खुला चौगान जिसे अखाड़ा कहते है कलाकार यहीं इसका मंचन करते है दर्शक व कलाकार सीधे आपने सामने होते है ।स्वाग-मेहरी,हेड़ाऊ मेहरी,शहजादी,अमरसिंह राठौड़ वभक्त पूर्णमल आदि रम्मते होती है । रम्मत में सर्वप्रथम भगवान गणपति या देवी लटियाल माता का आगमन होता है । हजारों दर्शक होते है वे इनको मस्तक झुकार आशीर्वाद लेते है फिर संवाद,हास्य विनोद व व्यंग बाण चलते । रम्मत गीतमय होती है हर रम्मत में वर्तमान सामाजिक या राजनैतिक व्यवस्था को लेकर ख्याल गाया जाता है जिसमे कटाक्ष,व्यंग और सीख या दिशानिर्देश दिए जाते है । स्वयं नेता भी जनता के बीच आकर ये ख़्याल सुनते हैं और बुरा न मॉनकर सीख सलाह पर अमल का आश्वासन देते है ।वहीं रम्मत में ‘चौमासा’ भी गाया जाता है जो मूल रूप से सौंदर्य, सृंगार,प्रेम व विरह को लेकर नव विवाहितों के मन मे उमड़ रहे विचार प्रकट करता है । रम्मत को देखने या सुनने जो बीकानेर नहीं आ पाते वे किसी तरह उस रम्मत का ख्याल व चौमासा लिखवाकर मंगवाते है और पढ़ते है ।देर रात से अल सुबह तक चलने वाली रम्मत में कई पात्र होते है । रम्मत जब खत्म होती है देश,समाज व परिवार के कल्याण की कामना का गीत ‘माता म्हारे टाबरियो ने अमी भर छांटो घाले’ गाते है ।लोग अखाड़े की रेत सिर पर लगाते है ।मानना है कि इस अखाड़े की रेत लगाने से नजर उतर जाती है और शरीर निरोग रहता है ।

स्त्री पुरुषों के बीच फुटबॉल मैच !
गांधी व मोदी भी आते है ! (रमक झमक)

होली से पूर्व स्त्री पुरुषों के बीच फुटबाल मैच होता है,वास्तव में पुरुष ही दोनों ओर होते है लेकिन एक पाले में सभी स्त्रियों का स्वांग धरे होते है । रेफरी की वेशभूसा में हाथ में हण्टर व लँगोट बांधे व होटो से सिटी लगाए होता है । कोई पुरुष जब स्त्री स्वांग की मोहिनी मुस्कान देखकर कोई हरकत में आता है तो रेफरी का हण्टर यलो व रेड कार्ड का काम करता है ।दर्शक भी खूब हूटिंग करते है ,प्रायः स्त्री टीम जीत जाती है ।आज कल इसका मिलता जुलता रूप फागनिया फुटबॉल के रूप में धरणीधर मैदान में देखने को मिलता है । सोनिया गांधी,नरेंद्र मोदी सहित कई फ़िल्म एक्टर व एक्ट्रेस के स्वांग वहाँ नजर आते है ।

डोलची मार होली !(रमक झमक)
मुख्य होली से 2 दिन पूर्व हर्ष- व्यास व ओझा -छंगाणी जाती के बीच अपने अपने चौक में पानी मार डोलची मार होली खेली जाती है । चमड़े की कुपिनुमा आकृति की बनी डोलची जिसमे करीब 1 लीटर पानी आता है उसको भर कर सगे सम्बन्धी एक दूसरे की पीठ पर मारते है तो सटाक 2 आवाज आती है ,एक नॉर्मल आदमी की पीठ पर ये डोलची पड़ जाए तो महीनों कमर का दर्द व उसका निशान ठीक नहीं होता है । प्रेम भरी टक्कर का ये दर्द व पीठ पर पानी की मार का निशान लेकर भी लोग खुश व प्रसन्न नजर आते है ।इस खेल को देखने व टीवी कवरेज करने भारी संख्या में लोग आते है ।

बिना दुल्हन के दुल्हेराजा की बारात !(रमक झमक)

धुलण्डी के दिन छंगाणी जाति के परिवार से पौराणिक विष्णु गणवेश में दूल्हा जिसे मलन्दा/मलंगा कहते है को लेकर बारात निकालने की परम्परा रही है जिसे सुरदासानी जाति के घर पौखने व स्वागत की परम्परा रही है ,जैसे किस बारात का स्वागत होता है ठीक वैसे ही ,बस इसमें उसे दुल्हन नहीं मिलती बिना दुल्हन के बैरंग ही लौटना पड़ता रहा है,आजकल सिर्फ हर्ष जाति का दूल्हा मलन्दा बनता है जिसे उनके सगे व्यासों के यहाँ पौखने सत्कार की परम्परा है ,रास्ते मे कुछ अन्य अन्य परिवार भी उस होली बारात का आवभगत करते है । बारात में विवाह गीत के साथ होली गीत भी गाए जाते है । बारात को देखना या उस बारात में शामिल होना अपने आप में रोमांच पैदा करने वाला है ।

शहर में फ़िल्म एक्ट्रेस के साथ होली !(रमक झमक)

होलाष्टक से धुलण्डी तक शहर में होली की रंगत धीरे 2 परवान पर चढ़ती है । स्कूटी पर शार्ट लिबास में कमसिन लड़कियां आपको आँख मारे या आपके गले लग कर रौने लगे या आपकी चुमी ले तो फिसलियेगा मत ,ये वास्तव में होली के स्वाग धरे पुरुष है ।देर रात रम्मत डांडिया देखने जाते समय ये स्त्रियां जरूर मिलेगी ।अगर आप अपनी पसंदीदा हीरोइन या नेता से मुलाकात के इछुक हो,तो चिंता की बात नहीं वो भी इन दिनों में रात में कही न कही मिल ही जाएगी ।आप इनके साथ सेल्फी भी ले सकते है ।

प्रेमिका की खोज में पागल प्रेमी !(रमक झमक)

शहर में ऐसे भी लोग मिलेंगे जो न कुछ खाते – पीते है बल्कि दिन भर एक चौक से दूसरे चौक और एक गली से दूसरी गली पागलो की तरह अपनी प्रेमिका की तलाश में दौड़ते रहते है,बच्चे बड़े अगर उनको इशारा करे कि तेरी प्रेमिका उस गली में है तो वो उधर ही दौड़ते रहते है ।न बोलना न शिकायत ,बस! प्रेमिका की तलाश में पागल प्रेमी बीकानेर शहर में नजर आ जाते है । शहर में आने वाले नए व्यक्ति को सच मे लगता है पागल प्रेमी है । वास्तव में ऐसे लोग बस लोगो को होली का आनन्द मस्ती दिलाने के लिये स्वयं पागल प्रेमी की एक्टिंग करते है ।

एक दो साढ़े तीन होली !! (रमक झमक)
मरूंनाइक चौक में थम्भ पूजन,ढोल पूजन व लक्ष्मीनाथ मन्दिर में फाग होली होती है जिसमें भगवान के साथ होली खेली जाती है । बाद में मरूंनायक चौक में रोज रात्री 11 बजे बाद डांडिया डांस होता है डांडिया चलते,दौड़ते,बैठकर घूमकर लड़ाया जाता है यहाँ एक दो साढ़े तीन की लय ताल का डांडिया प्रशिद्ध है ।देर रात्रि तक महिलाएं व पुरुष भारी मात्रा में इसे देखने के लिये अपनी जगह शाम से ही सुरक्षित कर लेते है ।

गेर व अश्लील गीत व तणी ! (रमक झमक)
शहर में सगे सम्बन्धी अपना ग्रुप बनाकर अपने सगे समवन्धियों के इलाकों में जाते है,लिंग,भग,सेक्स शब्दो को खुल्लम खुल्ला बोलते है और एक्शन कर अश्लील गीत गाते है ,जब ये गीत गाते गेवरिये निकलते है तो आस पास की छतें औरतों से भर जाती है जो सुनने के लिये छत पर आती है ।(रमक झमक)
नथूसर गेट पर जूतों चपलो की मूँझ से तणी बांधी जाती है जिसे हजारों लोगों व होली के गेवरियो की गुलाल की धुँध के बीच जोशी जाति का व्यक्ति तलवार से काटता है,काटने से पूर्व सुरदासानी पुरोहित इसके तिलक करते है और किराडू जाति का युवा इसको कंधे पर खड़ा करता है । “तणी” आसानी से नहीं कटती । जितना ज्यादा समय लगता है उतनी हूटिंग होती है व जोशियों पर व्यंग बाण चलते है ।

राख भष्मी स्नान और रंग की होली !(रमक झमक)

धुलण्डी की अल सुबह होलिका की ठंडी हुई राख भस्मी से लोग एक दूसरे को भरते है,बुजुर्ग लोग स्वयं बैठ कर अपने आपको पूरा भरवाते है,कुछ लोग इसे भस्मी स्नान कहते है । रमक झमक डॉट कॉम का मानना है कि इससे शरीर मे ऊर्जा का संचार होता है व शरीर निरोग होता है। गोदाम भरो गोदाम भरो यानि उस व्यक्ति जेब भरो,और उसके शरीर के हर अंग को भस्मी से भरो ।भस्मी स्नान के बाद कुछ समय कीचड़ की होली फिर साफ व शुद्ध रंग की होली खेली जाती है । आदमी दिन भर घरों से बाहर होते है अगर उनको कुछ खाना पीना है तो अखबार में लपेट कर छत या खिड़की से ही दिया जाता है । यहाँ शाम 6 बजे जब गैर निकलती है तब होली समाप्त होती है ,अगर पहले स्नान कर लिया तो सम्भव है आपको पुनः रंग से भर दिया जाए ।

होली पर साधना -आराधना बीकानेर शहर की होली खाश विशेषता एक ये भी है कि इस होली में मौज मस्ती गीत चंग धमाल गैर रम्मत के अलावा अश्लील गीतों का प्रदर्शन भी है लेकिन वहीं दूसरा नज़ारा बिल्कुल भिन्न है ,होलिका दहन के तुरंत बाद होलिका अग्नि के चारों ओर बड़े बुजुर्ग आसन लगाकर मन्त्र व ईस्ट साधना में लग जाते है । रमक झमक डॉट कॉम ने परम्परा सस्कृति के इस पक्ष को गहनता से समझा ,जो एक तरफ अश्लील बोलते है वही लोग निर्धारित समय बाद अपने गुरु,ईस्ट व मन्त्र साधना से अपने शरीर को शुद्ध कर सकारात्मक ऊर्जा भरते है ,कहते है इस दिन किया तप हजार गुना अधिक फल देता है । अश्लील बोलने के पीछे भी रमक झमक को ज्ञात हुवा की इसका धार्मिक पुस्तकों में उल्लेख है ।

केशर स्नान होली !! (रमक झमक)
शहर में नव विवाहित जमाई को ससुराल बुलाया जाता है,उनको मिष्ठान व नेक के रूप में रुपये दिया जाता है ,फिर साले की बहू या साली उनके केशर कुकू का तिलक करती है और पूरा पंजा भरकर उनके पीठ पर जोर से व दबाव लगाकर पंजा मारती है जिससे पूरा पंजा उनके कपड़ो पर नजर आने लगता है । इसी तरह होली से एक दिन पूर्व नव विवाहित बेटी के दादा ससुर,ससुर,जेठ व जेठानी आदि को पानी में केशर डालकर उनको आंगन में पाटे चौकी पर बैठाकर केशर स्नान कर होली खेलाइ जाती है ।पूरा घर केशर की खुशबू से महक उठता है ।फिर उनको नए वस्त्र व मिठाई भेंट की जाती है ।सगे सम्बन्धियो की ये केशर होली अद्धभुत है ।
प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ 9460502573 www.ramakjhamak.com

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