जाने क्या और क्यों होती है रम्मतें …

रम्मत का अर्थ सामान्य शब्दों में रम्मने यानि खेलने से बना है । अगर आज की भाषा में बात करें तो एक प्रकार का नुक्कड़ नाटक । बीकानेर में स्वांग -मेहरी, हेडाऊ-मेहरी, शहजादी-नव टंकी, अमरसिंह – राठौड़, की मुख्य रम्मतें होती है । ये किसी ना किसी कहानी से जुडी हुई होती है और इसमें वास्तविक कहानी के साथ-साथ लोग अपनी हसी-मजाक और ख्याल तथा चौमासे भी गाते है । यहाँ हर रम्मत से पहले अखाड़े में भगवन गणपति या फिर आशापुरा माता आतें है और उस समय लोगों की आस्था और भावाना का नजारा यहाँ देखा जा सकता है लोग उन्हें प्रशाद खिलाते है हाथ जोड़ कर प्राथना करते है कि उनके घर और उनके शहर में खुशहाली रहे उनकी मन की कामना पूरी हो और जब उस वर्ष पूरी होती है तो अगले साल फिर वो धन्यवाद करते हुवे आगामी वर्ष के लिए निवेदन करते है । स्वांग -मेहरी रम्मत में खासतौर से हर वर्ष ख्याल और चौमासा गाया जाता है, ख्याल में वर्तमान व्यवस्थों पर राजनीती पर सरकार पर खुल्ले मैदान में करार व्यंग किया जाता है और उन्हें चेतावनी तक दी जाती है खास बात ये है की शहर के राजनेता खुद इसको सुनने और देखने तक आते है और वे बुरा नहीं मानते । चौमासा में प्रेम प्रसंग नव- विवाहितो के मन में चल रही उथल पुथल प्रेम रस से सरोबर गीत गए जाते है । इन रम्मतो को देखने के लिए पुरुष ही नहीं महिलाये भी भारी संख्या में आती है । इसी प्रकार बाकि रम्मतो में भी विशेष पात्र की भूमिकाये होती है, देर रात से शुरू होकर शुबह तक ये चलती रहती है ।

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