गणेश परिक्रमा (छींकी) का वेद मंत्र

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पुष्करणा ब्राह्मणों के विवाहों में छींकी का अपना विशेष स्थान है। इसका शास्त्रीय नाम श्री गणेश परिक्रमा है। इसमें ध्वनि की ही प्रधानता होती है। वेद की पवित्र ध्वनि वधू के घर से वर के घर तक का पथ शुद्ध करती है। सावे पर छींकी वाली तिथि को दिन-रात यह ध्वनि बीकानेर शहर में गूंजती रहती है। पूरे शहर का वातावरण वेदमय हो जाता है।

ॐ आशु: शिशानो वृषभो न भीमो
घनाघन: क्षो भणश्चर्षणीनाम्॥
सक्रन्दानो$निमिष एक वीर: शत् सेना
अजेयत् साकमिन्द्र:

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